प्रेम उम्मीद नहीं रखता

मैं दो बातें कह रहा हूँ- तुम उम्मीद करोगी नहीं अगर अभी जो हो रहा है उसमें तुम्हें बहुत मज़ा आ रहा है। अभी जो चल रहा है, अगर ये बिल्कुल मस्त चीज़ है तो आगे की उम्मीद करनी किसे है? तो उम्मीद का जन्म भी मायूसी से होता है और उम्मीद का अंत भी मायूसी में होता है क्योंकि आज तक किसी की उम्मीदें पूरी हुई नहीं। तुम अपवाद नहीं हो सकतीं। आज तक किसी की उम्मीदें पूरी नहीं हुई हैं।
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मन से दोस्ती कर लो

मन का हक़ है, थोड़ा सा इधर उछल लिया, उधर कूद लिया। बन्दर है, लेकिन अपना बन्दर है।

उसको यह अनुमति नहीं दी जा सकती कि सर पर चढ़कर उपद्रव करे, घर में तोड़-फोड़ करे। पर ये भी ठीक नहीं है ना कि तुमने उसको इतनी सख्ती से बाँध दिया खम्भे से कि वो बेचारा अधमरा ही हुआ जा रहा है, ख़त्म ही हो गया है।

मन बन्दर ही रहेगा, मन नहीं योगी हो जाता। हाँ, यह है कि तुम बंदर के साथ प्रेम से रहो, तो बंदर भी प्रेम की भाषा समझ जाता है। फ़िर वो भी धीरे-धीरे कुछ बातें ऐसी जान जाता है, जो वैसे नहीं समझाई जा सकतीं; प्रेम से जान जाता है।

श्रद्धाहीन रिश्ते

जो संबंध उपजा ही बीमारी से है वो स्वास्थय कैसे दे सकता है आपको? जो व्यक्ति आपके जीवन में आया ही प्रपंचवश है, वो प्रेम कैसे दे सकता है आपको?
प्रेम पूर्णता से उठता है, प्रपंच से नहीं।

क्या एकाग्रता ध्यान में सहयोगी है?

प्रश्न: क्या एकाग्रता ध्यान में सहयोगी है? वक्ता: नहीं। हाँलांकि, विशिष्ट परिस्थितियों के अंतर्गत ऐसा हो सकता है। तुम्हें गुरु के पास वापस आना ही

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