शिकायतें पीढ़ी दर पीढ़ी

अब माँ दिन-रात घर पर बैठ कर के घटिया धारावाहिक देख रही है| बच्चे पर क्या प्रभाव पड़ रहा है – बच्चे के कान में भी तो आवाज जा ही रही है ना| माँ दिन-रात बैठ करके रिश्तेदारों की, पड़ोसियों की लड़ाई बुझाई करती हैं, “इसने ये कर दिया, उसने वो कर दिया, इसका ऐसा है, उसका वैसे है” तो बच्चा सुन नही रहा है? बच्चे के मन पर क्या प्रभाव जा रहा है? माँ-बाप की दिन-रात खट -पट होती है कि तुमनें कहा था इस दिवाली पेपर दिला दोगे इसपे भी नही दिलाया| वो कह रहा है, “दिला तो दिया”, वो कह रही है, “पर ये तो बहुत हल्का है; भारी वाला ले के आते, कुंदन का चाहिए|” और बच्चा सुन नही रहा है ये सब?

अस्वस्थ अभिवावकों से स्वस्थ बच्चा कैसे आएगा? मैं फिर कह रहा हूँ ‘असली माँ-बाप वो जो शारीरिक रूप से जन्म दें और फिर मानसिक रूप से भी जन्म दे पाएँ| तब असली माँ-बाप हुए, वो कम होते हैं|

आचार्य प्रशांत
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जो तुम्हारी गुणवत्ता है और जैसा तुम्हारा जीवन है, तुम्हारे रिश्ते की भी वही गुणवत्ता होगी|

लोग आते हैं, बात करते हैं रिश्तों की, संबंधो की – दोस्त आते हैं, ज़्यादातर तो पति-पत्नी ही आते हैं या जोड़े| मैं कभी नहीं

क्या एक साथ रहने से प्यार बढ़ेगा?

लोग आते हैं, बात करते हैं रिश्तों की, संबंधो की – दोस्त आते हैं, ज़्यादातर तो पति-पत्नी ही आते हैं या जोड़े| मैं कभी नहीं कहता कि तुम दोनों के “बीच” में कुछ गड़बड़ है, गड़बड़ दोनों के “बीच” में नही होती है- गड़बड़ “दोनों में” होती है|

तुम ठीक हो जाओ, और तुम ठीक हो जाओ तो तुम्हारा रिश्ता अपने आप ही ठीक हो जाएगा , तुम्हारा रिश्ता तुम दोनों की गुणवत्ता से कुछ जुदा थोड़ी है|

जो तुम्हारी गुणवत्ता है और जैसा तुम्हारा जीवन है तुम्हारे रिश्ते की भी वही गुणवत्ता होगी|
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सम्मान और ज़िम्मेदारी माने क्या?

पति बोलते हैं पत्नियां बड़ा डोमिनेट कर लेती हैं। कोई पत्नी तुम्हें डोमिनेट कर सकती है, तुम्हारे मन में अगर उसकी बॉडी का लालच न हो तो? तुम उसकी बॉडी के पीछे भागते हो, उसी के कारण वो तुमको नाच नचा देती है! और कोई हथियार नहीं है उसके पास। बस यही हथियार है कि तुम्हारे मन में लालच है कि किसी तरह इसका शरीर मिल जाये। और वो इतना नचाएगी तुमको, इतना नचाएगी कि मर जाओगे! उसको तुम्हारे पैसे का लालच है, तुम्हें उसके शरीर का लालच है। दोनों एक दूसरे को नचा रहे हो, फिर दोनों रोते हो! घर-घर की यही तो कहानी है, और क्या चल रहा है? मरी से मरी औरत समर्थ से समर्थ आदमी पर राज करती है!
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आचार्य प्रशांत के नेतृत्व में 31वें अद्वैत बोध शिविर का आयोजन किया जाने वाला है।
आचार्य जी के सानिध्य में रहने का और दुनियाभर के दुर्लभ शास्त्रों के इस अनूठे अवसर को न जाने दें।

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हम दूसरों से अलग अनूठे कैसे बनें?

तुम अपनी बात करने में बहुत घबराते हो, यहीं पर गलती हो रही है। तुम कह रहे हो, समय और ऊर्जा नष्ट हो रहे हैं, समय और ऊर्जा नहीं, पूरा जीवन नष्ट हो रहा है क्योंकि तुम ‘मैं’ बनने को तैयार नहीं हो। ‘मैं’ का अर्थ होता है, मेरी ज़िम्मेदारी, मेरी। अपने पाओं पर खड़ा हूँ, अपनी दृष्टि से देखता हूँ, अपनी समझ से समझता हूँ और फिर मेरा समय, मेरा है, अब समय नष्ट नहीं होगा, फिर मेरी ऊर्जा मेरी है। अब ऊर्जा भी नष्ट नहीं होगी।
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जो पकड़ेगा वो गँवायेगा

प्रेम को आप आँख से देख नहीं पाएंगे। आनंद को आप हाथ से पकड़ नहीं पाएंगे। मुक्ति का आप कोई चित्र नहीं बना सकते। सत्य का कोई नाम नहीं होता लेकिन ये हैं, और यही वास्तविक हैं। जीसस कह रहे हैं, इन्हीं की दुनियां मे तुम आखिरी रहोगे। जो द्वैत की दुनिया में अव्वल है, वो अद्वैत की दुनिया में आखिरी रहेगा। ना उसे सत्य मिलेगा, ना प्रेम मिलेगा, ना आनंद, ना मुक्ति।
जो खूब पदार्थों के पीछे भाग रहा है, जो खूब प्रतिष्ठा कमा रहा है, जिसने ज़मीन को, पत्थर को और आसमान को, इन्हीं को सच मान लिया है, वो असली दुनिया में, अपनी भीतरी दुनिया में — जहाँ उसका घर ही है — वहां वो तड़पेगा, वहां उसे कुछ न मिलेगा, वहां वो कतार में आखिरी नज़र आएगा।
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