शमन क्या है? नित्यता क्या है? || आचार्य प्रशांत, तत्वबोध पर (2019)

‘नित्यता’ तो कसौटी है। ‘नित्यता’ कसौटी है जिसपर तुम अनित्य को वर्जित करते हो।

जिसपर तुम अनित्य को गंभीरता से लेने से इंकार करते हो।

जब घरवाले अध्यात्म की बातें न सुनना चाहें || आचार्य प्रशांत (2019)

सत्र में तुम जो कमा रहे हो, तुम्हें बाँटना चाहिये।

और जब तुम बच्चे थे, तो तुम आसानी से पिताजी का दिया कुछ भी ले नहीं लेते थे? याद है न माँ खिलाने आती थी, तो तुम कितना उत्पात करते थे?

इसी तरीके से, तुम्हें यहाँ अध्यात्म की जो बातें पता चल रही हैं, तुम्हारी क्यों उम्मीद है कि तुम घर जाओगे, और माँ-बाप को बताओगे, और वो आसानी से ग्रहण कर लेंगे?

वो भी नहीं आसानी से ग्रहण कर रहे।

अब तुम उन्हें बच्चा मनो।

जब उन्होंने तुम्हें बच्चे की तरह देखा, तो उन्होंने तुम्हें स्नेह दिया था न? अब अध्यात्म की दृष्टि से, मान लो कि वो बच्चे हैं। तो तुम उनको स्नेह दो।

प्यार से समझाओ।

सपनों में गुरुदर्शन का क्या महत्व है?

इतना भी आसान नहीं होता है।

ये तो बहुत ही दूर की बात है कि गुरु के कहे को गह लिया, समझ लिया, या गुरु के समक्ष नतमस्तक हो गये।

ये तो बहुत-बहुत आगे की बात है।

मन के लिये इतना भी आसान नहीं होता, कि वो मान ले कि मन के आगे, मन से बड़ा, मन के अतीत, मन के परे भी कुछ होता है।

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