मैं कोई आदर्श नहीं

मन कहता है कि बस मैं यह जान लूँ कि किसी और ने क्या किया है और अपने जीवन को वैसा बना दूँ। कुछ नया करने की आवश्यकता कहाँ है? अतीत में जो कुछ हुआ है, दौहराते चलो और तुम्हें बड़ा मज़ा आता है, यह बोलने में कि वह मेरा रोल मॉडल है और तुम यह नहीं देखते कि रोल मॉडल बनाते ही तुमने जीवन का नाश कर दिया।

हम दुनिया को डरावनी जगह क्यों मानते हैं?

वक्ता: सवाल ये है, ‘हमारी नज़र हमेशा बुरे को क्यों तलाशती है? अच्छे को नज़र क्यों नहीं तलाशती?’ तुम सोचो कि क्या कारण होते होंगे

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