आपके बच्चे आपकी सुनते क्यों नहीं?

वो रोशनी किसी काम की नहीं, जो दावा तो करे होने का, पर जिससे किसी को देखने में मदद ना मिलती हो। आप अपनेआप को रोशनी कहने के हक़दार सिर्फ तब हैं, जब आपके कारण, जो आपके सम्पर्क में आये, उसकी दृष्टि खुल जाए। इस ट्यूब लाइट की क़ीमत तभी है ना, जब ये जले तो मुझे दिखाई दे। आप अगर अपने बच्चों के पास हैं लेकिन आपकी उपस्थिति की वजह से आपके बच्चे देखने में मदद नहीं पा रहे, तो आप अभी प्रकाशवान नहीं हैं। आप अभी स्वयं ही प्रकाश नहीं हैं, तो आप अँधेरे से कैसे लड़ेंगे? तो ये मत कहिये कि कई बार रोशनी अँधेरे से हार जाती है। ये कहिये कि अभी हमारी ही रोशनी प्रज्ज्वलित नहीं हुई है।
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प्रेम में तोहफ़े नहीं दिए जाते, स्वयं को दिया जाता है

जहाँ प्रेम होता है, वहाँ लुक्का-छुप्पी नहीं होती। ऐसा नहीं होता कि ये एक विशेष चीज़ है, तुम्हारी है। विशेष हो कि निर्विशेष हो, जैसे हैं तुम्हारे हैं और खबरदार अगर तुमने ठुकराया। और फिर यह भी नहीं होता कि साल में एक दिन लाए हैं खीर तुम्हारे लिए, फिर तो साल में जो भी बनेगा, जिस दिन भी बनेगा तुम्हारा ही है।
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