प्रेम तुम्हारी दुनिया बर्बाद कर देगा

वक्ता : प्रेम क्या होता है ? तुम बताओ क्या होता है ? श्रोता :  सर अभी तक जो भी सोचा था, वो सब बोलते हैं ये भी नहीं होता, ये भी

आत्म-ज्ञान ही आत्म-सम्मान

‘सम्मान’ का मतलब बस मान लेना नहीं है कि बस मान लिया, आँख बंद करके। फिर तो सिर्फ ‘मान’ भी लिखा जा सकता था, जैसे मान-अपमान होता है ।

‘सम्मान’ का अर्थ है ठीक तरीके से मानना, ठीक तरीके से मानने का अर्थ है पहले जानना-फिर मानना। “जानूँगा तभी मानूँगा”।

शरीर यन्त्र है, तुम नहीं

क्या तुम्हारे साथ ऐसा नहीं होता कि सिर दर्द हो रहा है पर तुम कहो कि सिर को दर्द होने दो, हम नहीं रुकेंगे? शरीर को मशीन की भाँति लगे रहने दो। तुम मशीन मत बन जाना।

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