शरीर और आत्मा के मध्य सेतु है मन

“बिनु रसरी गृह खल बंधा, तासू बंधा अलेख, दीन्ह दर्पण हस्त मधे, चसम बिना का देख” वक्ता: ‘मन’ ‘शरीर’ और ‘आत्मा’, इनका सम्बन्ध क्या है?

मेरे पास पूछने के लिए सवाल क्यों नहीं हैं?

पहली बात कि उत्तर होते हैं, दूसरी बात कि उत्तर न भी मिले तो भी सवाल अपने आप में बहुत महत्वपूर्ण है। सवाल ही अपने आप में एक दिन विलीन हो जाएगा, अगर पूछो तो। दबाने से सवाल विलीन नहीं होता। उसको सामने लाने से, उसको समझने से विलीन होता है।

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