ज़्यादा सोचने की समस्या

विचार का अतिरेग, वो तब होता है जब आप कर्म का स्थान विचार को दे देते हैं; कर्म का विकल्प बना लेते हैं विचार को। चार कदम चलना है, चल रहे नहीं, डर के मारे या आलस के मारे, या धारणा के मारे, जो भी बात है। तो जो भीतर कमी रह गयी, उसकी क्षति पूर्ती कैसे करते हैं फिर? चलने के बारे में? सोच सोच के। करिये ना! सोचिये मत। और जो कर्म में डूबा हुआ है उसको सोचने का अवकाश नहीं मिलेगा। अगर आप जान ही गए हैं, पूर्णतया नहीं, मान लीजिये आंशिक भी; अंशतया भी यदि आपको पता है कि क्या करणीय है, क्या उचित है, तो उसको करने में क्यों नहीं उद्यत हो जातीं?

जितनी ऊर्जा, जितना समय सोच को दे रहीं हैं, वो सब जाना किस तरफ चाहिए था? कर्म की ओर! और ऐसा नहीं है कि आपको बिलकुल नहीं पता कि उचित कर्म क्या है! पता तो है। और उसका प्रमाण है आपकी बेचैनी। आप यदि बिलकुल ही न जानती होती कि क्या उचित है तो बेचैन नहीं हो सकती थीं। बेचैनी उठती ही तब है जब सत्य को जान बूझ कर स्थगित किया जाता है। पता है, पर टला हुआ है। तब बेचैनी उठेगी। क्यों टालती हैं? कर डालिये। जो करने में लग गया, वो सोचेगा कैसे? और जो कर नहीं रहा है वो दिन रात बैठे बैठे क्या करेगा? दिमाग चलाएगा। मैं तो सीख ही यही देता हूँ, सर मत चलाओ, हाथ चलाओ। सर झुकाओ, हाथ चलाओ। और जिसका सर झुका नहीं हुआ है उसका सर? खूब चले, चकरघिन्नी की तरह दौड़ रहा है, दौड़ रहा है। पहुँच कहाँ रहा है? कहीं नहीं। पर दौड़ खूब रहा है।

आचार्य प्रशांत
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निम्नलिखित माध्यमों से दुनिया के हर कोने से लोग आचार्य जी से जुड़ रहे हैं:-

१. आचार्य जी से निजी साक्षात्कार:
यह एक अभूतपूर्व अवसर है आचार्य जी से मुखातिब होकर उनसे निजी मुद्दों पर चर्चा करने का। यह सुविधा ऑनलाइन भी उपलब्ध है।
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२: अद्वैत बोध शिविर:
अद्वैत बोध शिविर आचार्य जी के सानिध्य में समय बिताने का एक अद्भुत अवसर है। इन बोध शिविरों में दुनिया भर से लोग, अपने व्यस्त जीवन से चार दिन निकालकर, प्रकृति की गोद में शास्त्रों का गहन अध्ययन करते हैं और उनसे प्राप्त शिक्षा की प्रासंगिता अपने जीवन में देख पाते हैं। ऋषिकेश, शिवपुरी, मुक्तेश्वर, जिम कॉर्बेट नेशनल पार्क, चोपटा, कैंचीधाम जैसे नैनाभिराम स्थानों पर आयोजित अनेकों बोध शिविरों में सैकड़ों लोग आच्रार्य जी के आशीर्वचनों से कृतार्थ हुए हैं।
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३. आध्यात्मिक ग्रंथों पर कोर्स:
आध्यात्मिक ग्रंथों पर कोर्स, आचार्य प्रशांत के नेतृत्व में होने वाले क्लासरूम आधारित सत्र हैं। सत्र में आचार्य जी द्वारा चुने गये दुर्लभ आध्यात्मिक ग्रंथों के गहन अध्ययन के माध्यम से साधक बोध को उपलब्ध हो पाते हैं।
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४. जागरुकता का महीना:
फाउंडेशन हर माह जीवन-सम्बन्धित एक आधारभूत विषय पर आचार्य जी के सत्रों की एक श्रृंखला आयोजित करता है। जो व्यक्ति बोध-सत्र में व्यक्तिगत रूप से मौजूद नहीं हो सकते, उन्हें फाउंडेशन की ओर से चुनिंदा सत्रों का ऑनलाइन प्रसारण उपलब्ध कराया जाता है। इस सुविधा द्वारा सभी साधक शारीरिक रूप से दूर रहकर भी, आचार्य जी के सत्रों में सम्मिलित हो पाते हैं।
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५. आचार्य जी के साथ एक दिन
‘आचार्य जी के साथ एक दिन’ एक अनूठा अवसर है जिज्ञासुओं के लिए जो, इस पहल के माध्यम से अद्वैत आश्रम – ग्रेटर नॉएडा में हर महीने, एक पूरे दिन का समय आचार्य जी के साथ व्यतीत कर पाते हैं।
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६. पार से उपहार : आचार्य जी के साथ सप्ताहंत
‘पार से उपहार’ एक सुनहरा प्रयास है आचार्य जी के सानिध्य में रहकर स्वयं को जान पाने का। इसका आयोजन प्रति माह, २ दिन और २ रातों के लिए, अद्वैत आश्रम – ग्रेटर नॉएडा में होता है।
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७. स्टूडियो कबीर
स्टूडियो कबीर एक ऐसी पहल है जो आज के प्रचलित संस्कृति में आदिकाल से पूजनीय संतों व ग्रंथों द्वारा प्रतिपादित बोध का पठन-पाठन एक संगीतमय तरीके से करती है। आम जनमानस में संतों व ग्रंथों के गीतों की लोकप्रियता बढ़ सके, इसके लिए स्टूडियो कबीर उन गीतों को याद करवाने का और सुंदर गीतों के माध्यम से प्रस्तुत करने के अथक प्रयास में संलग्न है।
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८. फ्री-हार्ट्स शिविर: एक नयी दृष्टि में अध्यात्म
यह शिविर हर उस व्यक्ति के लिए है जो दिल से युवा हैं। इस शिविर के अंतर्गत आपसी सौहार्द्य और मैत्री का वर्धन, मनोवैज्ञानिक तथ्यों से रूबरू होना, जीवन की ग्रंथियों को सुलझाना, ध्यान की अभिनव विधियों का प्रयोग करना, नृत्य, गायन, कला-प्रदर्शन करना आदि शामिल है।
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९. त्रियोग:
त्रियोग हठ-योग, भक्ति-योग और ज्ञान-योग का अभूतपूर्व सम्मिश्रण है, जिसमें सम्पूर्ण स्वास्थ्य और सर्वांगीण विकास की प्राप्ति हेतु २ घंटे के योग-सत्र का अनूठा आयोजन किया जाता है।
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१०. बोध-पुस्तक
जीवन के महत्वपूर्ण विषयों पर आचार्य जी के व्यक्तव्यों का बेहतरीन संकलन हिंदी व अंग्रेजी भाषा में पुस्तकों के रूप में अमेज़न और फ्लिपकार्ट पर उपलब्ध हैं:

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आचार्य प्रशांत, श्री कृष्ण पर: जगते में जागे नहीं सोते नहीं सोए, वही जाने कृष्ण को दूजा न कोय

हमारे लिए जागना यही है कि भौतिक शरीर पर दो जो भौतिक आँखें हैं, वो खुली हुई हैं तो हम कह देते हैं कि हम जगे हुए हैं। मुनि वो जो इस जगने को जगना माने नहीं और ये बात धारणा की नहीं है कि उसकी धारणा ये है कि तुम जगे हुए नहीं हो। मुनि वो जो साफ़-साफ़ देख पाए कि खुली आँखों से जो कुछ तुम्हें दिखता है, वो तुम्हारे अपने ही संकल्प-विकल्प हैं। वो प्रकाशित भले ही आपको तत्त्व से हो रहे हों पर उनको नाम-रूप तुमने खुद ही दे दिए हैं। उनमें कोई सत्य नहीं। उनका प्रकाश भले ही आत्मा का हो, पर उनकी सीमाएँ और विविधताएँ तुमने गढ़ी हैं।

तो इसीलिए खुली आँखों से तुम जो भी देखते हो उसको मुनि बहुत महत्त्व, बहुत प्राथमिकता नहीं दे सकता।

कृष्ण कह रहे हैं कि मुनि वो जिसकी जगने-सोने की परिभाषा वास्तविक है। जिसको इन्द्रियों ने छल नहीं लिया है। जो इतनी स्थूल बात नहीं करता कि आँख खुलने भर से अपना जागरण माने। मुनि वो जो ये अच्छे से जानता है कि दुनिया भर में ये तमाम लोग जो खुली आँखों के साथ घूम रहे हैं, वास्तव में गहरी मूर्छा से बाधित हैं। मुनि वो जो ये अच्छे से समझता हो कि चाहे आँख खुली हो या आँख बंद हो, तम्हारा स्वप्न लगातार कायम रहता है बस दृश्य बदल जाते हैं। और स्वप्न में दृश्यों के बदलने को या एक स्वप्न से दूसरे स्वप्न में चले जाने को जागरण नहीं कहते।

मुनि वो जिसके लिए जागरण का अर्थ ये नहीं है कि स्वप्न बदल गए बल्कि ये है कि स्वप्न अब नहीं रहे। तो कृप्या इस श्लोक का सम्बन्ध भौतिक या प्राकृतिक दिन-रात से बिलकुल न जोड़ें। कृष्ण नहीं कह रहे हैं कि मध्य रात्रि की साधना या रात भर के जगने भर से जीवन में कोई क्रांति आ जाएगी या कोई सिद्धि प्राप्त हो जाएगी। हाँ, ये सत्य है कि मैंने कहा था कि सूफी पद्यति में रात्रि जागरण का बड़ा महत्त्व है पर वो इसीलिए रहा है  क्योंकि साधक को शान्ति का जो माहौल चाहिए वो बहुथा उसे रात्रि में ही सुलभ हो पाता है। संसार सोया पड़ा होता है तो साधक को बहुत ज़्यादा विक्षेपों का सामना नहीं करना पड़ता। कान में आवाजें कम आती हैं, आँखों के सामने दृश्य कम रहते हैं ,दुनियादारी के झंझट थोड़े कम रहते हैं पर वो बात बहुत महत्त्व की नहीं है। अगर यही सारी स्थितियां दिन के समय उपलब्ध हो जाएँ तो रात्री को जगने की आवश्यकता कदाचित कम हो जाएगी।

रात्रि और दिन तो बस मानसिक हैं, कहीं बाहर नहीं हैं और जो कुछ मानसिक है वो प्राथमिक कैसे हो सकता है? कैसे उसे बहुत गंभीरता से लिया जा सकता है? कैसे कहा जा सकता हा कि उसके आधार पर तय होगा कि कौन जाग्रित है और कौन संयमी और कौन मुनि?

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१. आचार्य जी से निजी साक्षात्कार:
यह एक अभूतपूर्व अवसर है आचार्य जी से मुखातिब होकर उनसे निजी मुद्दों पर चर्चा करने का। यह सुविधा ऑनलाइन भी उपलब्ध है।
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२: अद्वैत बोध शिविर:
अद्वैत बोध शिविर आचार्य जी के सानिध्य में समय बिताने का एक अद्भुत अवसर है। इन बोध शिविरों में दुनिया भर से लोग, अपने व्यस्त जीवन से चार दिन निकालकर, प्रकृति की गोद में शास्त्रों का गहन अध्ययन करते हैं और उनसे प्राप्त शिक्षा की प्रासंगिता अपने जीवन में देख पाते हैं। ऋषिकेश, शिवपुरी, मुक्तेश्वर, जिम कॉर्बेट नेशनल पार्क, चोपटा, कैंचीधाम जैसे नैनाभिराम स्थानों पर आयोजित अनेकों बोध शिविरों में सैकड़ों लोग आच्रार्य जी के आशीर्वचनों से कृतार्थ हुए हैं।
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३. आध्यात्मिक ग्रंथों पर कोर्स:
आध्यात्मिक ग्रंथों पर कोर्स, आचार्य प्रशांत के नेतृत्व में होने वाले क्लासरूम आधारित सत्र हैं। सत्र में आचार्य जी द्वारा चुने गये दुर्लभ आध्यात्मिक ग्रंथों के गहन अध्ययन के माध्यम से साधक बोध को उपलब्ध हो पाते हैं।
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४. जागरुकता का महीना:
फाउंडेशन हर माह जीवन-सम्बन्धित एक आधारभूत विषय पर आचार्य जी के सत्रों की एक श्रृंखला आयोजित करता है। जो व्यक्ति बोध-सत्र में व्यक्तिगत रूप से मौजूद नहीं हो सकते, उन्हें फाउंडेशन की ओर से चुनिंदा सत्रों का ऑनलाइन प्रसारण उपलब्ध कराया जाता है। इस सुविधा द्वारा सभी साधक शारीरिक रूप से दूर रहकर भी, आचार्य जी के सत्रों में सम्मिलित हो पाते हैं।
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५. आचार्य जी के साथ एक दिन
‘आचार्य जी के साथ एक दिन’ एक अनूठा अवसर है जिज्ञासुओं के लिए जो, इस पहल के माध्यम से अद्वैत आश्रम – ग्रेटर नॉएडा में हर महीने, एक पूरे दिन का समय आचार्य जी के साथ व्यतीत कर पाते हैं।
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६. पार से उपहार : आचार्य जी के साथ सप्ताहंत
‘पार से उपहार’ एक सुनहरा प्रयास है आचार्य जी के सानिध्य में रहकर स्वयं को जान पाने का। इसका आयोजन प्रति माह, २ दिन और २ रातों के लिए, अद्वैत आश्रम – ग्रेटर नॉएडा में होता है।
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७. स्टूडियो कबीर
स्टूडियो कबीर एक ऐसी पहल है जो आज के प्रचलित संस्कृति में आदिकाल से पूजनीय संतों व ग्रंथों द्वारा प्रतिपादित बोध का पठन-पाठन एक संगीतमय तरीके से करती है। आम जनमानस में संतों व ग्रंथों के गीतों की लोकप्रियता बढ़ सके, इसके लिए स्टूडियो कबीर उन गीतों को याद करवाने का और सुंदर गीतों के माध्यम से प्रस्तुत करने के अथक प्रयास में संलग्न है।
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८. फ्री-हार्ट्स शिविर: एक नयी दृष्टि में अध्यात्म
यह शिविर हर उस व्यक्ति के लिए है जो दिल से युवा हैं। इस शिविर के अंतर्गत आपसी सौहार्द्य और मैत्री का वर्धन, मनोवैज्ञानिक तथ्यों से रूबरू होना, जीवन की ग्रंथियों को सुलझाना, ध्यान की अभिनव विधियों का प्रयोग करना, नृत्य, गायन, कला-प्रदर्शन करना आदि शामिल है।
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९. त्रियोग:
त्रियोग हठ-योग, भक्ति-योग और ज्ञान-योग का अभूतपूर्व सम्मिश्रण है, जिसमें सम्पूर्ण स्वास्थ्य और सर्वांगीण विकास की प्राप्ति हेतु २ घंटे के योग-सत्र का अनूठा आयोजन किया जाता है।
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१०. बोध-पुस्तक
जीवन के महत्वपूर्ण विषयों पर आचार्य जी के व्यक्तव्यों का बेहतरीन संकलन हिंदी व अंग्रेजी भाषा में पुस्तकों के रूप में अमेज़न और फ्लिपकार्ट पर उपलब्ध हैं:

अमेज़न: http://tinyurl.com/Acharya-Prashant

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जिसे सत्य का पता है उसके लिए सारे तथ्य सार्थक हो जाते हैं

तुम जिन शब्दों में दिन रात खेलते-कूदते रहते हो, तुम जिन शब्दों में लगातार जी रहे हो, जो शब्द तुम्हारे मानस-पटल पर दिन-रात उभरते रहते

‘मैं जानता हूँ’-सबसे अधार्मिक वचन

तुम जिन शब्दों में दिन रात खेलते-कूदते रहते हो, तुम जिन शब्दों में लगातार जी रहे हो, जो शब्द तुम्हारे मानस-पटल पर दिन-रात उभरते रहते है तुम्हें उनका ही कुछ नहीं पता। तुम्हें पैसे का पता है? बताओ पैसा क्या है, समझाओ? तुम बार-बार कहते हो कैरियर, समझाओ बात, ठीक से समझाओ बात कैरियर क्या है। तुम कहते हो तरक्की, प्रगति, समझाओ ठीक-ठीक तरक्की माने क्या? तुम कहते हो परिवार, थोड़ा बता दीजिये, परिवार माने क्या? और बात साफ़-साफ़ करियेगा, छुपाने की नीयत से नहीं, खोलने की नियत से करियेगा।

तुम्हें कुछ नहीं पता, तुम्हें परमात्मा का क्या पता होगा। जिसे परमात्मा का पता हो उसे सब पता चल जाता है। जिसे सत्य का पता है उसके लिए सारे तथ्य सार्थक हो जाते है। फिर सारे तथ्य, सत्य की रोशनी में चमकने लगते है। जिसे सत्य का नहीं पता उसके लिए जितने तथ्य है वो सब मुर्दा है। उनका कोई अर्थ नहीं।

जिसे सत्य का पता है वो देखेगा पदार्थ को, शरीर को देखेगा। आँखे शरीर ही देखेंगी, शरीर तथ्य है। पर अब उसके लीए शारीर जो है, वो उसके लिए कभी नहीं हो सकता जिसे सत्य का कुछ पता नहीं। जो सत्य को जाने बिना शरीर को देख रहा है, उसके लिए शरीर सिर्फ एक मुर्दा इकाई है। थोड़ा सा माँस, कुछ किलो माँस।

आश्वस्ति से बचिये, सर्टेनिटी  से बचिये। इस भाव से बचिये कि ऐसा तो है ही। साफ़-साफ कह रहा हूँ आपसे, आप जैसा भी समझते हो कि है, वैसा तो नहीं है। नहीं कुछ मामलो में वैसा नहीं है या हर मामले में वैसा नहीं है? हर मामले में वैसा नहीं है। आप जहाँ कहीं भी सोचते है कि ऐसा है, ऐसा नहीं है। ऐसा नहीं है। शुरू में आपको ये बात अजीब सी लगेगी, लेकिन जैसे-जैसे ज़रा सी श्रद्धा के साथ इस पर आगे बढ़ेंगे आपको दिखता जाएगा, कि हाँ हम जो भी, जैसा भी समझते थे वैसा तो नहीं था, वैसा तो नहीं था। और फिर आपके लिए और सरल होता जाएगा, अपने विश्वास पर अविश्वास करना।

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२: अद्वैत बोध शिविर:
अद्वैत बोध शिविर आचार्य जी के सानिध्य में समय बिताने का एक अद्भुत अवसर है। इन बोध शिविरों में दुनिया भर से लोग, अपने व्यस्त जीवन से चार दिन निकालकर, प्रकृति की गोद में शास्त्रों का गहन अध्ययन करते हैं और उनसे प्राप्त शिक्षा की प्रासंगिता अपने जीवन में देख पाते हैं। ऋषिकेश, शिवपुरी, मुक्तेश्वर, जिम कॉर्बेट नेशनल पार्क, चोपटा, कैंचीधाम जैसे नैनाभिराम स्थानों पर आयोजित अनेकों बोध शिविरों में सैकड़ों लोग आच्रार्य जी के आशीर्वचनों से कृतार्थ हुए हैं।
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३. आध्यात्मिक ग्रंथों पर कोर्स:
आध्यात्मिक ग्रंथों पर कोर्स, आचार्य प्रशांत के नेतृत्व में होने वाले क्लासरूम आधारित सत्र हैं। सत्र में आचार्य जी द्वारा चुने गये दुर्लभ आध्यात्मिक ग्रंथों के गहन अध्ययन के माध्यम से साधक बोध को उपलब्ध हो पाते हैं।
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४. जागरुकता का महीना:
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५. आचार्य जी के साथ एक दिन
‘आचार्य जी के साथ एक दिन’ एक अनूठा अवसर है जिज्ञासुओं के लिए जो, इस पहल के माध्यम से अद्वैत आश्रम – ग्रेटर नॉएडा में हर महीने, एक पूरे दिन का समय आचार्य जी के साथ व्यतीत कर पाते हैं।
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६. पार से उपहार : आचार्य जी के साथ सप्ताहंत
‘पार से उपहार’ एक सुनहरा प्रयास है आचार्य जी के सानिध्य में रहकर स्वयं को जान पाने का। इसका आयोजन प्रति माह, २ दिन और २ रातों के लिए, अद्वैत आश्रम – ग्रेटर नॉएडा में होता है।
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७. स्टूडियो कबीर
स्टूडियो कबीर एक ऐसी पहल है जो आज के प्रचलित संस्कृति में आदिकाल से पूजनीय संतों व ग्रंथों द्वारा प्रतिपादित बोध का पठन-पाठन एक संगीतमय तरीके से करती है। आम जनमानस में संतों व ग्रंथों के गीतों की लोकप्रियता बढ़ सके, इसके लिए स्टूडियो कबीर उन गीतों को याद करवाने का और सुंदर गीतों के माध्यम से प्रस्तुत करने के अथक प्रयास में संलग्न है।
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८. फ्री-हार्ट्स शिविर: एक नयी दृष्टि में अध्यात्म
यह शिविर हर उस व्यक्ति के लिए है जो दिल से युवा हैं। इस शिविर के अंतर्गत आपसी सौहार्द्य और मैत्री का वर्धन, मनोवैज्ञानिक तथ्यों से रूबरू होना, जीवन की ग्रंथियों को सुलझाना, ध्यान की अभिनव विधियों का प्रयोग करना, नृत्य, गायन, कला-प्रदर्शन करना आदि शामिल है।
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९. त्रियोग:
त्रियोग हठ-योग, भक्ति-योग और ज्ञान-योग का अभूतपूर्व सम्मिश्रण है, जिसमें सम्पूर्ण स्वास्थ्य और सर्वांगीण विकास की प्राप्ति हेतु २ घंटे के योग-सत्र का अनूठा आयोजन किया जाता है।
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श्रद्धा है बुद्धि के आगे की बेवकूफ़ी

एक आदमी बिस्तर पर सोया पड़ा है। उसमें तो कुछ है ही नहीं, वो मन की ऐसा अवस्था में है जहाँ पर मन अपने ही दायरों में चक्कर काट रहा है। सोते हुए आदमी के लिए बस भूत होता है, वर्तमान जैसा कुछ होता नहीं। मन का एक दायरा है, मन उसी में चक्कर काट रहा है। फिर हुई जाग्रति, जाग्रति में तुम्हें साधन उपलब्ध होते हैं, इन साधनों का नाम है विचार, वितर्क, ज्ञान, इन साधनों का उपयोग करना है परम जाग्रति के लिए, असली जाग्रति के लिए। और असली जाग्रति जब होती है तब ये साधन छोड़ दिए जाते हैं।

ज्ञान की अपने आप में कोई कीमत नहीं है, ज्ञान सिर्फ तुम्हें जाग्रति से परम जाग्रति में ले जाने का साधन है। ज्ञान इसीलिए है ताकि ज्ञान का उपयोग करके ज्ञान को छोड़ सको। अस्मिता इसीलिए है ताकि मैं, मैं को पहचाने और मैं की व्यर्थता को जान कर के मैं का त्याग कर दे। साधारण जाग्रति से ज्यादा बड़ी जाग्रति है श्रद्धा। श्रद्धा अँधा होने का नाम नहीं है, कि कोई कहे अन्धविश्वास है श्रद्धा। श्रद्धा में तो तुम्हारी आँखें पूरी तरह खुल जाती हैं। शरीर की आँखें जब खुलें तब साधारण जाग्रति, और मन कि आँखें जब खुल जाएँ तो परमजाग्रती, उसका नाम है श्रद्धा।

~आचार्य प्रशांत
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१. आचार्य जी से निजी साक्षात्कार:
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२: अद्वैत बोध शिविर:
अद्वैत बोध शिविर आचार्य जी के सानिध्य में समय बिताने का एक अद्भुत अवसर है। इन बोध शिविरों में दुनिया भर से लोग, अपने व्यस्त जीवन से चार दिन निकालकर, प्रकृति की गोद में शास्त्रों का गहन अध्ययन करते हैं और उनसे प्राप्त शिक्षा की प्रासंगिता अपने जीवन में देख पाते हैं। ऋषिकेश, शिवपुरी, मुक्तेश्वर, जिम कॉर्बेट नेशनल पार्क, चोपटा, कैंचीधाम जैसे नैनाभिराम स्थानों पर आयोजित अनेकों बोध शिविरों में सैकड़ों लोग आच्रार्य जी के आशीर्वचनों से कृतार्थ हुए हैं।
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३. आध्यात्मिक ग्रंथों पर कोर्स:
आध्यात्मिक ग्रंथों पर कोर्स, आचार्य प्रशांत के नेतृत्व में होने वाले क्लासरूम आधारित सत्र हैं। सत्र में आचार्य जी द्वारा चुने गये दुर्लभ आध्यात्मिक ग्रंथों के गहन अध्ययन के माध्यम से साधक बोध को उपलब्ध हो पाते हैं।
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४. जागरुकता का महीना:
फाउंडेशन हर माह जीवन-सम्बन्धित एक आधारभूत विषय पर आचार्य जी के सत्रों की एक श्रृंखला आयोजित करता है। जो व्यक्ति बोध-सत्र में व्यक्तिगत रूप से मौजूद नहीं हो सकते, उन्हें फाउंडेशन की ओर से चुनिंदा सत्रों का ऑनलाइन प्रसारण उपलब्ध कराया जाता है। इस सुविधा द्वारा सभी साधक शारीरिक रूप से दूर रहकर भी, आचार्य जी के सत्रों में सम्मिलित हो पाते हैं।
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५. आचार्य जी के साथ एक दिन
‘आचार्य जी के साथ एक दिन’ एक अनूठा अवसर है जिज्ञासुओं के लिए जो, इस पहल के माध्यम से अद्वैत आश्रम – ग्रेटर नॉएडा में हर महीने, एक पूरे दिन का समय आचार्य जी के साथ व्यतीत कर पाते हैं।
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६. पार से उपहार : आचार्य जी के साथ सप्ताहंत
‘पार से उपहार’ एक सुनहरा प्रयास है आचार्य जी के सानिध्य में रहकर स्वयं को जान पाने का। इसका आयोजन प्रति माह, २ दिन और २ रातों के लिए, अद्वैत आश्रम – ग्रेटर नॉएडा में होता है।
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७. परमचेतना नेतृत्व
नेतृत्व क्या है? असली नायक कौन है?
एक असली नायक क्या लोगों को कहीं आगे ले जाता है, या वो लोगों को उनतक ही वापस ले आता है?
क्या नेतृत्व प्रचलित कॉर्पोरेट और शैक्षिक ढाँचे से आगे भी कुछ है?
क्या आप या आपका संस्थान सही नेतृत्व की समस्या से जूझ रहे हैं?

जब आम नेतृत्व अपनी सीमा तक पहुँच जाए, तब आमंत्रित कीजिये ‘परमचेतना नेतृत्व’ – एक अनूठा मौका आचार्य प्रशान्त जी के साथ व्यग्तिगत व संस्थागत रूप से जुड़कर जीवन के महत्वपूर्ण पहलुओं को जानने का।
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८. स्टूडियो कबीर
स्टूडियो कबीर एक ऐसी पहल है जो आज के प्रचलित संस्कृति में आदिकाल से पूजनीय संतों व ग्रंथों द्वारा प्रतिपादित बोध का पठन-पाठन एक संगीतमय तरीके से करती है। आम जनमानस में संतों व ग्रंथों के गीतों की लोकप्रियता बढ़ सके, इसके लिए स्टूडियो कबीर उन गीतों को याद करवाने का और सुंदर गीतों के माध्यम से प्रस्तुत करने के अथक प्रयास में संलग्न है।
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९. फ्री-हार्ट्स शिविर: एक नयी दृष्टि में अध्यात्म
यह शिविर हर उस व्यक्ति के लिए है जो दिल से युवा हैं। इस शिविर के अंतर्गत आपसी सौहार्द्य और मैत्री का वर्धन, मनोवैज्ञानिक तथ्यों से रूबरू होना, जीवन की ग्रंथियों को सुलझाना, ध्यान की अभिनव विधियों का प्रयोग करना, नृत्य, गायन, कला-प्रदर्शन करना आदि शामिल है।
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१०. त्रियोग:
त्रियोग हठ-योग, भक्ति-योग और ज्ञान-योग का अभूतपूर्व सम्मिश्रण है, जिसमें सम्पूर्ण स्वास्थ्य और सर्वांगीण विकास की प्राप्ति हेतु २ घंटे के योग-सत्र का अनूठा आयोजन किया जाता है।
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११. बोध-पुस्तक
जीवन के महत्वपूर्ण विषयों पर आचार्य जी के व्यक्तव्यों का बेहतरीन संकलन हिंदी व अंग्रेजी भाषा में पुस्तकों के रूप में अमेज़न और फ्लिपकार्ट पर उपलब्ध हैं:

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