मुक्ति पानी नहीं है मुक्ति भीतर बैठी है, वो लगातार आवाज़ देती है।

मुक्ति पानी नहीं है मुक्ति भीतर बैठी है, वो लगातार आवाज़ देती है। आनन्द पाना नहीं है, मिला ही हुआ है वो भी लगातार आवाज़

डर, बंधन और मुक्ति

अगर वो खुद मुक्त हो तो तुम्हें मुक्ति दे पाएँगे। दिये से दूसरा दिया जलता ही है, पर अंधेरा किसी को रोशनी नहीं दे पाएगा। अगर तुम्हें कुछ समझ आया है तो तुम्हारा दायित्व है कि उनको भी समझाओ। कोई जानबूझकर किसी और को बंधन में नहीं डालता, याद रखना दिया कोशिश भी कर ले तो भी अंधेरा नही फैला सकता। सागर कोशिश भी कर ले तो भी ये नहीं कर पाएगा कि अब मेरे पास पानी नहीं है। बादल कोशिश भी कर ले तो भी अपने आप को बरसाने से रोक नहीं सकता क्योंकि उसके पास पानी है, बरसेगा। तो अगर कोई बादल बरस नहीं रहा, अगर कोई नदी तुम्हें पानी दे नहीं पा रही, तो इसका अर्थ जानते हो क्या है? बादल के पास पानी नहीं, नदी के पास पानी नहीं।

तुम्हें ये कहने की कोई जरूरत नहीं कि उनकी नीयति खराब है, उनकी नीयति नहीं खराब है, उन बेचारो के पास अपना ही कुछ नहीं है। जिसके पास अपना नहीं है वो कैसे किसी दूसरे को दे पाता तो वो नहीं दे पाए। नहीं दे पाए, उन्होंने कोई अपराध नहीं कर दिया, ये मजबूरी है उनकी। अरे! उन्हें ही नहीं मिला तो तुम्हें कैसे देते। पर, तुम्हें अगर प्रेम होगा तो तुम ये शिकायत नहीं करते फिरोगे कि माँ-बाप मुझे कुछ दे नहीं पाए। तुम कहोगे “ठीक, आप दे नहीं पाए तो क्या हुआ अब मुझे मिला है मैं आपको दूँगा।”

आचार्य प्रशांत
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निम्नलिखित माध्यमों से दुनिया के हर कोने से लोग आचार्य जी से जुड़ रहे हैं:-

१. आचार्य जी से निजी साक्षात्कार:
यह एक अभूतपूर्व अवसर है आचार्य जी से मुखातिब होकर उनसे निजी मुद्दों पर चर्चा करने का। यह सुविधा ऑनलाइन भी उपलब्ध है।
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२: अद्वैत बोध शिविर:
अद्वैत बोध शिविर आचार्य जी के सानिध्य में समय बिताने का एक अद्भुत अवसर है। इन बोध शिविरों में दुनिया भर से लोग, अपने व्यस्त जीवन से चार दिन निकालकर, प्रकृति की गोद में शास्त्रों का गहन अध्ययन करते हैं और उनसे प्राप्त शिक्षा की प्रासंगिता अपने जीवन में देख पाते हैं। ऋषिकेश, शिवपुरी, मुक्तेश्वर, जिम कॉर्बेट नेशनल पार्क, चोपटा, कैंचीधाम जैसे नैनाभिराम स्थानों पर आयोजित अनेकों बोध शिविरों में सैकड़ों लोग आच्रार्य जी के आशीर्वचनों से कृतार्थ हुए हैं।
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३. आध्यात्मिक ग्रंथों पर कोर्स:
आध्यात्मिक ग्रंथों पर कोर्स, आचार्य प्रशांत के नेतृत्व में होने वाले क्लासरूम आधारित सत्र हैं। सत्र में आचार्य जी द्वारा चुने गये दुर्लभ आध्यात्मिक ग्रंथों के गहन अध्ययन के माध्यम से साधक बोध को उपलब्ध हो पाते हैं।
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४. जागरुकता का महीना:
फाउंडेशन हर माह जीवन-सम्बन्धित एक आधारभूत विषय पर आचार्य जी के सत्रों की एक श्रृंखला आयोजित करता है। जो व्यक्ति बोध-सत्र में व्यक्तिगत रूप से मौजूद नहीं हो सकते, उन्हें फाउंडेशन की ओर से चुनिंदा सत्रों का ऑनलाइन प्रसारण उपलब्ध कराया जाता है। इस सुविधा द्वारा सभी साधक शारीरिक रूप से दूर रहकर भी, आचार्य जी के सत्रों में सम्मिलित हो पाते हैं।
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५. आचार्य जी के साथ एक दिन
‘आचार्य जी के साथ एक दिन’ एक अनूठा अवसर है जिज्ञासुओं के लिए जो, इस पहल के माध्यम से अद्वैत आश्रम – ग्रेटर नॉएडा में हर महीने, एक पूरे दिन का समय आचार्य जी के साथ व्यतीत कर पाते हैं।
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६. पार से उपहार : आचार्य जी के साथ सप्ताहंत
‘पार से उपहार’ एक सुनहरा प्रयास है आचार्य जी के सानिध्य में रहकर स्वयं को जान पाने का। इसका आयोजन प्रति माह, २ दिन और २ रातों के लिए, अद्वैत आश्रम – ग्रेटर नॉएडा में होता है।
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७. स्टूडियो कबीर
स्टूडियो कबीर एक ऐसी पहल है जो आज के प्रचलित संस्कृति में आदिकाल से पूजनीय संतों व ग्रंथों द्वारा प्रतिपादित बोध का पठन-पाठन एक संगीतमय तरीके से करती है। आम जनमानस में संतों व ग्रंथों के गीतों की लोकप्रियता बढ़ सके, इसके लिए स्टूडियो कबीर उन गीतों को याद करवाने का और सुंदर गीतों के माध्यम से प्रस्तुत करने के अथक प्रयास में संलग्न है।
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८. फ्री-हार्ट्स शिविर: एक नयी दृष्टि में अध्यात्म
यह शिविर हर उस व्यक्ति के लिए है जो दिल से युवा हैं। इस शिविर के अंतर्गत आपसी सौहार्द्य और मैत्री का वर्धन, मनोवैज्ञानिक तथ्यों से रूबरू होना, जीवन की ग्रंथियों को सुलझाना, ध्यान की अभिनव विधियों का प्रयोग करना, नृत्य, गायन, कला-प्रदर्शन करना आदि शामिल है।
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९. त्रियोग:
त्रियोग हठ-योग, भक्ति-योग और ज्ञान-योग का अभूतपूर्व सम्मिश्रण है, जिसमें सम्पूर्ण स्वास्थ्य और सर्वांगीण विकास की प्राप्ति हेतु २ घंटे के योग-सत्र का अनूठा आयोजन किया जाता है।
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१०. बोध-पुस्तक
जीवन के महत्वपूर्ण विषयों पर आचार्य जी के व्यक्तव्यों का बेहतरीन संकलन हिंदी व अंग्रेजी भाषा में पुस्तकों के रूप में अमेज़न और फ्लिपकार्ट पर उपलब्ध हैं:

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फ्लिपकार्ट: http://tinyurl.com/AcharyaBooks

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इन सुन्दरतम व अनोखी पहलों में भाग लेने के लिए, अपने आवेदन requests@prashantadvait.com पर भेजें, या श्री कुन्दन सिंह से संपर्क करें: +91-9999102998

तुम्हारा प्रयास ही बाधा है समझने में

मैंने बिलकुल नहीं कहा कि उलझन सुलझाने की कोशिश करो। जितना सुलझाने की कोशिश करोगे, उतना फंसोगे। मैंने कहा, “सिर्फ समझ जाओ।” क्योंकि उसका उपाय तुम कर नहीं सकते हो ना। कर सकते होते तो अब तक कर न लिया होता? वो उलझन है ही इसलिए क्योंकि तुम उसे सुलझा नहीं सकते। और तुम उसे सुलझा  इसीलिए नहीं सकते क्योंकि तुम उसे समझते ही नहीं हो।

गणित के एक सवाल की ही तरह तुम उसे नहीं समझ रहे हो, इसीलिए तुम उसे सुलझा भी नहीं सकते। समझ जाओ, और वही समाधान है। समझना ही समाधान है।

आचार्य प्रशांत
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आचार्य प्रशांत से जुड़ने के माध्यम:

अद्वैत बोध शिविर
हर महीने होने वाले इन यह शिविर हिमालय की गोद में, आचार्य जी के नेतृत्व में रह कर दुनिया भर के दुर्लभ शास्त्रों के अध्ययन का अनूठा अवसर हैं।

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  आध्यात्मिक ग्रंथों का शिक्षण (कोर्स)
आचार्य जी द्वारा हर माह चुनिंदा शास्त्रों पर प्रवचन एवं रोज़ मर्रा की ज़िन्दगी में उनकी महत्ता जानने का अवसर।

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   जागृति माह
   जीवन के एक विशेष विषय पर और जीवन के आम दिनचर्या की समस्याओं का हल पाने का अनूठा अवसर। जो लोग व्यक्तिगत रूप से सत्र में मौजूद नहीं हो सकते, वो ऑनलाइन स्काइप या वेबिनार द्वारा बोध सत्र का            हिस्सा बन सकते हैं।

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 आचार्य जी से निजी साक्षात्कार
आचार्य जी से निजी बातचीत करने का बहुमूल्य अवसर।

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सम्पादकीय टिप्पणी :

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व्यक्ति-सापेक्ष प्रेम, एक झूठ

जो आप अपनेआप को समझते हो — ये अहंकार की बड़ी मस्त चाल होती है — अहंकार उससे नीचे भी नहीं चाहता कि आप जाओ और ये भी नहीं चाहता कि आप उससे ऊपर जाओ। समझ रहे हो? वो और घना होना चाहता है उसी क्षेत्र में, जहाँ पर वो पहले से है। आप अपनेआप को पूरे तरीके से एक पर्सनैलिटी  समझते हो, एक व्यक्तित्व समझते हो, आप बाकी पूरी दुनिया को अपने से नीचे समझते हो, बाकी पूरी दुनिया से मेरा मतलब है जो इंसान नहीं हैं, उनको तो आप अपने से नीचे समझते हो, तो अहंकार ये बिलकुल नहीं चाहेगा कि आप उनके प्यार में पड़ो और जो आपसे ऊपर का है, वास्तव में ऊपर का है, जो बियॉन्ड ईगो है — जिसको चाहे तुम जो बोल लो टोटल, कम्पलीट, गॉड, परम, खुदा, इंटेलिजेंस; मर्ज़ी है तुम्हारी — अहंकार ये भी नहीं चाहता कि तुम उसके प्यार में भी पड़ो! “अहंकार ना तो तुम्हें उसके प्यार में पड़ने देता है, जिसे तुम क्षुद्र कहते हो और ना उसके प्यार में पड़ने देता है, जिसको वो कहीं न कहीं जानता ही है कि ये अति विराट है।
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जीवन गँवाने के डर से अक्सर हम जीते ही नहीं

जब आदेश का पालन करते हो, तो फिर जहाँ से आदेश आता है, वहीँ से उस आदेश के पालन की ऊर्जा भी आ जाती है। वही दे देता है उर्जा, और वही एक मात्र उम्मीद है तुम्हारी, वहीं से जीत है तुम्हें, और कहीं से नहीं मिलेगी। भूलना नहीं कि तुम्हारी अपनी ऊर्जा तो तुम दूसरों को दे आए हो, तुमने अपनेआप को तो बेच ही दिया है। तुम्हारी अपनी बंदूक तो अब तुम्हारे ऊपर ही चलेगी। ये संसार तुम्हारे ऊपर जो बंदूके ताने बैठा है ये संसार ये नहीं है, ये तुम्हारी बंदूके हैं। ये दुनिया जो तुम्हें बन्धनों में कसे बैठी है, ये हक़ दुनिया को किसने दिया? तुमने दिया।
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सुनने का वास्तविक अर्थ

विचार, विचार को पकड़ता है और मौन, मौन से जुड़ता है। मन शब्दों के अलावा कुछ सुन नहीं सकता, मौन को मौन ही सुनेगा। कीमत सिर्फ़ मौन की है। सुनने का अर्थ है इधर के मौन ने, उधर के मौन से एका कर लिया। मौन, मौन से जुड़ गया; अनंतता, अनंतता से मिल गई। सुनने का अर्थ है: ‘’मैं, मैं न रहा, तू तू न रहा; मैं भी खाली, तू भी खाली।’’ खाली, खाली से मिल गया; पूर्ण पूर्ण से मिल गया। अपूर्ण कभी पूर्ण से नहीं मिल पाएगा। अपूर्ण और पूर्ण तो आयाम ही अलग-अलग हैं, उनका कोई मिलन नहीं होता। पूर्ण से मिलने के लिए, पूर्ण ही होना पड़ता है। मौन को सुनने के लिए, मौन ही होना पड़ता है।
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