प्रतियोगी मन – हिंसक मन

प्रश्न: सर प्रतियोगिता से डर लगता है। ऐसा क्यों? वक्ता: प्रतियोगिता का डर है क्योंकि प्रतियोगिता का अर्थ ही है, डर। केवल डरपोक लोग ही

किस दिशा जाऊँ?

पाने की इच्छा हीनता के भाव से निकलती है| इच्छा पूरा होना चाहती है, ख़त्म हो जाना चाहती है, जो असंभव है| कुछ भी पा कर जीवन की रिक्तता ख़त्म नहीं होती| वो जो हीन नहीं है, वो तुममे ही सोया हुआ है| उसे जगाओ, उसकी तरफ ध्यान दो|

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