आचार्य प्रशांत, छात्रों के संग: अपनी प्रतिभा का कैसे पता करूँ?

एक ख़ास किस्म का संगीत अगर तुमको आता है, अगर तुम्हें उसमें पारंगत हासिल है, तो तुम एक देश में बड़े संगीतज्ञ बन जाओगे, दूसरे देश में जहाँ पर उस तरह के संगीत को कोई स्वीकृति नहीं है, वहाँ पर तुममें कोई गुण नहीं देखा जायेगा कि तुम्हें कुछ आता है। तो प्रतिभा तो समाज की एक धारणा है, समाज सिर्फ उन योग्यताओं को प्रतिभा का नाम देता है जो उसके काम की हों, जो कुछ समाज के काम का है, समाज कह देगा यह प्रतिभा है, और यह प्रतिभाशाली आदमी है, वर्ना तो तुम जैसे हो, जो भी हो और जो भी कर रहे हो अगर उसमें पूर्णतया डूब के करते हो तो वही प्रतिभा है, वही टैलेंट है।

प्रत्येक कृत्य में जोश रहे

तुम किसी ख़ास कृत्य में उतकृष्ट नहीं होते। जीवन या तो उतकृष्ट होता है या तो सूना-सूना। इस चक्कर में मत पड़ो कि मुझे ये नहीं, ये मिलेगा, तब जाकर के मेरे जीवन में रौशनी आएगी। मुझे कुछ ख़ास करने को मिले, तब मैं उसमें चमक पाऊंगा।
जहाँ हो जो कर रहे हो, उसी में डूबो और फिर वहाँ से हज़ार रास्ते खुलेंगे। हज़ार रास्ते खुलेंगे।
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प्रशांतअद्वैत फाउंडेशन पच्चीस से ज्यादा अद्वैत बोध शिविरों का आयोजन करने के बाद, इस महीने की 26 तारीख को अपना 28वां बोध शिविर आयोजित करने जा रही है।

28वां अद्वैत बोध शिविर: एक पुकार परम की 💐
आचार्य प्रशांत के सानिध्य में समय बिताने और विभिन्न स्रोतों से लिए गए श्रेष्ठतम कोटि के ग्रंथों को पढ़ने का एक अनूठा अवसर है २८वां अद्वैत बोध शिविर।

शिविर का हिस्सा बनने हेतु, requests@prashantadvait.com पर एक ईमेल करें ।
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अधिक जानकारी के लिए संपर्क करें:
श्री अंशु शर्मा: +91-8376055661
श्री कुंदन सिंह: +91-9999102998
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आचार्य प्रशांत द्वारा दिए गये बहुमूल्य व्याख्यान इन पुस्तकों में मौजूद हैं:

अमेज़न : http://tinyurl.com/Acharya-Prashant
फ्लिप्कार्ट: https://goo.gl/fS0zHf

जानने और जानकारी में क्या फ़र्क है?

आप जब उपनिषद् को पढ़ोगे तो यदि आप उपनिषद् के साथ एक हो पाए तो फिर जैसे ही आपका मुँह खुलेगा और आप जो भी बोलोगे वो एक नया उपनिषद् होगा। उपनिषद् आपके सामने है और आप उपनिषद् में तल्लीन हो गए हो, आप एक हो गए हो उपनिषद् से, बिलकुल एक हो गए हो। उस क्षण में आपके मुँह से जो भी निकलेगा वो उपनिषद् है, ये अर्थ है लर्निंग का।
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प्रशांतअद्वैत फाउंडेशन पच्चीस से ज्यादा अद्वैत बोध शिविरों का आयोजन करने के बाद, इस महीने की 26 तारीख को अपना 28वां बोध शिविर आयोजित करने जा रही है।

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एक और आख़िरी मौका

दुर्लभ मानुष जन्म है, देह न बारम्बार । तरुवर ज्यों पत्ता झड़े, बहुरि न लागे डार ।।  ~ कबीर प्रश्न: संसार में मनुष्य जन्म मुश्किल

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