इश्क़ दी नवियों नवीं बहार- बुल्ले शाह

बुल्हे नूं समझावण आइयां बुल्हे नूं समझावण आइयां, भैणा ते भरजाइयां | टेक | “मन्न लै बुल्लिहआ साडा कहणा, छड दे पल्ला, राइयां, आल नबी औलादि

प्रतियोगी मन – हिंसक मन

प्रश्न: सर प्रतियोगिता से डर लगता है। ऐसा क्यों? वक्ता: प्रतियोगिता का डर है क्योंकि प्रतियोगिता का अर्थ ही है, डर। केवल डरपोक लोग ही

डर का मूल कारण

याद रखना, तुम कभी किसी व्यक्ति से नहीं डरते, कोई व्यक्ति तुम्हें कभी भी डरा नहीं सकता| तुम डरते हो अपनी सुविधाएं छिन जाने से| तुमने एक सौदा कर रखा है कि हमें कुछ चंद छोटी-मोटी सुविधाएं दे दो और उनके लिए हम अपनी स्वतंत्रता तुम्हें दे देते हैं|

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