स्वधर्म क्या है?

रूमी ने कहा है ना, “अपनेआप को साफ़ करो अपने ही पानी से”। गलो और तुम जब गलोगे तो उसी गलने में तुम्हारी सफाई है । जैसे कोई गन्दा स्नोबॉल हो, और वह पिघलता जा रहा हो और उसके पिघलने के कारण ही वह साफ़ होता जा रहा हो । तो देखो कि तुम क्या-क्या हो गये हो ? उसी से तुम स्वधर्म जान जाओगे । जो तुमने इकठ्ठा कर लिया है, जो भी तुम अपनेआप को समझते हो, वही बोझ है तुम्हारा । और तुम्हारा धर्म है ‘बोझ से मुक्ति’ । तुम्हारा धर्म है वापस लौटना । समझ रहे हो ?

नाम-पहचान संयोग मात्र

ये सब एक जोक है, इसको जोक ही मानना| वो एक्टिविटी बस यही बता रही है कि इस चीज़ों के लिए सीरियस हो जाने की कोई आवश्यकता नहीं है| ये बस ऐसे ही हैं, एक्सीडेंटल; बाहर से आईं हैं और बाहर को ही चली जायेंगी| और लड़कियों को तो अच्छे से पता है, बेचारी आज गुप्ता होती हैं, कल अग्रवाल बन जाती हैं| थोड़ी मॉडर्न हो गयी है तो ‘गुप्ता अग्रवाल’ बन जाती हैं|

इशारा किधर को कर रहा हूँ, समझो| ये दी जाने वाली चीज़ें हैं, ये बदल जानी हैं|

परिपक्वता क्या है?

प्रश्न: सर, परिपक्वता क्या है? वक्ता: (१८-२२ वर्ष की आयु के विद्यार्थियों की सभा को संबोधित करते हुए) यह शब्द ‘परिपक्वता’ हम सभी को अपने लिए महत्वपूर्ण

अवलोकन और ध्यान में अंतर

हमारे जीवन में यदि उर्जा का अभाव है, यदि हम जो कुछ भी करते हैं उसमे संशय बना रहता है, तो स्पष्ट है कि जीवन में स्पष्टता नहीं है, निजता नहीं हैI कारण – जीवन में ‘अवलोकन’ नहीं हैI अवलोकन किसी भी चीज को स्पष्ट रूप से देखना है – बिना धारणाओं के हस्तक्षेप के – यानि ध्यान की पृष्ठभूमि में देखना है, और ये उर्जा का अनंत स्रोत हैI ये बिखरी हुई, अस्पष्ट, दिशाहीन उर्जा नहीं है, बल्कि केन्द्रित है, एक नुकीली तीर की तरह, जिसे स्पष्ट पता है कि उचित कर्म क्या हैI

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