क्या अध्यात्म के माध्यम से अपने कामों में सफलता पाई जा सकती है?|| आचार्य प्रशांत (2019)

अध्यात्म इसीलिये नहीं होता कि तुम्हारे अरमान पूरे हो जाएँ।

अध्यात्म इसलिए होता है कि अहंकार सत्य के सुपुर्द हो जाये।

अहंकार के अरमानों को पूरा करने के लिये नहीं है अध्यात्म , अहंकार के विसर्जन के लिये है।

ऊपर-ऊपर से लीपा-पोती करने के लिये नहीं है अध्यात्म।

मूल परिवर्तन करने के लिये है।

आचार्य प्रशांत: स्वभाव क्या है?

असल में दिखना और बदलना एक साथ चलते हैं। बदलाव अगर नहीं है तो जो दिखा है वो अधूरा ही है। तो उसमें तुम्हें आस्था तभी बनेगी जब उसमें उसके साथ जो परिवर्तन आना है, वो देखोगे।

दिखने को ताकत तो उसके साथ आया परिवर्तन ही देता है न।

यही तो कहते हो न कि दिख रहा है कि कष्ट में हूँ। आनन्द प्रभाव होता है न, जिसकी पृष्ठभूमि में कष्ट, ‘कष्ट’ जैसा लगता है। आनन्द जितना उभरा हुआ होगा, कष्ट भी उतना उभरा हुआ होगा।

जितना ही तुम आनन्द के निकट होगे, उतना ही तुम्हें कष्ट, ‘कष्ट’ जैसा प्रतीत होगा।

~ आचार्य प्रशांत

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निम्नलिखित माध्यमों से दुनिया के हर कोने से लोग आचार्य जी से जुड़ रहे हैं :-

१. आचार्य जी से निजी साक्षात्कार:
यह एक अभूतपूर्व अवसर है आचार्य जी से मुखातिब होकर उनसे निजी मुद्दों पर चर्चा करने का। यह सुविधा ऑनलाइन भी उपलब्ध है।
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२: अद्वैत बोध शिविर:
अद्वैत बोध शिविर आचार्य जी के सानिध्य में समय बिताने का एक अद्भुत अवसर है। इन बोध शिविरों में दुनिया भर से लोग, अपने व्यस्त जीवन से चार दिन निकालकर, प्रकृति की गोद में शास्त्रों का गहन अध्ययन करते हैं और उनसे प्राप्त शिक्षा की प्रासंगिता अपने जीवन में देख पाते हैं। ऋषिकेश, शिवपुरी, मुक्तेश्वर, जिम कॉर्बेट नेशनल पार्क, चोपटा, कैंचीधाम जैसे नैनाभिराम स्थानों पर आयोजित अनेकों बोध शिविरों में सैकड़ों लोग आच्रार्य जी के आशीर्वचनों से कृतार्थ हुए हैं।
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३. आध्यात्मिक ग्रंथों पर कोर्स:
आध्यात्मिक ग्रंथों पर कोर्स, आचार्य प्रशांत के नेतृत्व में होने वाले क्लासरूम आधारित सत्र हैं। सत्र में आचार्य जी द्वारा चुने गये दुर्लभ आध्यात्मिक ग्रंथों के गहन अध्ययन के माध्यम से साधक बोध को उपलब्ध हो पाते हैं।
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४. जागरुकता का महीना:
फाउंडेशन हर माह जीवन-सम्बन्धित एक आधारभूत विषय पर आचार्य जी के सत्रों की एक श्रृंखला आयोजित करता है। जो व्यक्ति बोध-सत्र में व्यक्तिगत रूप से मौजूद नहीं हो सकते, उन्हें फाउंडेशन की ओर से चुनिंदा सत्रों का ऑनलाइन प्रसारण उपलब्ध कराया जाता है। इस सुविधा द्वारा सभी साधक शारीरिक रूप से दूर रहकर भी, आचार्य जी के सत्रों में सम्मिलित हो पाते हैं।
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५. आचार्य जी के साथ एक दिन
‘आचार्य जी के साथ एक दिन’ एक अनूठा अवसर है जिज्ञासुओं के लिए जो, इस पहल के माध्यम से अद्वैत आश्रम – ग्रेटर नॉएडा में हर महीने, एक पूरे दिन का समय आचार्य जी के साथ व्यतीत कर पाते हैं।
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६. पार से उपहार : आचार्य जी के साथ सप्ताहंत
‘पार से उपहार’ एक सुनहरा प्रयास है आचार्य जी के सानिध्य में रहकर स्वयं को जान पाने का। इसका आयोजन प्रति माह, २ दिन और २ रातों के लिए, अद्वैत आश्रम – ग्रेटर नॉएडा में होता है।
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७. स्टूडियो कबीर
स्टूडियो कबीर एक ऐसी पहल है जो आज के प्रचलित संस्कृति में आदिकाल से पूजनीय संतों व ग्रंथों द्वारा प्रतिपादित बोध का पठन-पाठन एक संगीतमय तरीके से करती है। आम जनमानस में संतों व ग्रंथों के गीतों की लोकप्रियता बढ़ सके, इसके लिए स्टूडियो कबीर उन गीतों को याद करवाने का और सुंदर गीतों के माध्यम से प्रस्तुत करने के अथक प्रयास में संलग्न है।
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८. फ्री-हार्ट्स शिविर: एक नयी दृष्टि में अध्यात्म
यह शिविर हर उस व्यक्ति के लिए है जो दिल से युवा हैं। इस शिविर के अंतर्गत आपसी सौहार्द्य और मैत्री का वर्धन, मनोवैज्ञानिक तथ्यों से रूबरू होना, जीवन की ग्रंथियों को सुलझाना, ध्यान की अभिनव विधियों का प्रयोग करना, नृत्य, गायन, कला-प्रदर्शन करना आदि शामिल है।
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९. त्रियोग:
त्रियोग हठ-योग, भक्ति-योग और ज्ञान-योग का अभूतपूर्व सम्मिश्रण है, जिसमें सम्पूर्ण स्वास्थ्य और सर्वांगीण विकास की प्राप्ति हेतु २ घंटे के योग-सत्र का अनूठा आयोजन किया जाता है।
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१०. बोध-पुस्तक
जीवन के महत्वपूर्ण विषयों पर आचार्य जी के व्यक्तव्यों का बेहतरीन संकलन हिंदी व अंग्रेजी भाषा में पुस्तकों के रूप में अमेज़न और फ्लिपकार्ट पर उपलब्ध हैं:

अमेज़न: http://tinyurl.com/Acharya-Prashant

फ्लिपकार्ट: http://tinyurl.com/AcharyaBooks

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इन सुन्दरतम व अनोखी पहलों में भाग लेने के लिए, अपने आवेदन requests@prashantadvait.comपर भेजें, या श्री कुन्दन सिंह से संपर्क करें: +91-9999102998

मन के स्रोत से निकटता ही है मन की ताकत

हमने जीवन में ये सवाल कभी ईमानदारी से पूछा ही नहीं है कि ‘महत्वपूर्ण क्या है’, क्या है जो पाने योग्य है, क्या है जो करने योग्य है? और क्योंकि हमने कभी पूछा नहीं है, हमारे भीतर खाली जगह है इसीलिए उस खाली जगह में कुछ भी कचरा भर दिया गया है।  हमने दुनिया भर के व्यापारियों को अनुमति दे दी है कि वो आएँ और हमारे मन में व्यापार करें। ये अनुमति दी हम ही ने है। समझ रहे हैं? रुकिये और पूछिए ये बात, महत्वपूर्ण क्या है? क्या ये वास्तव में महत्वपूर्ण है। और दो ही चार गिनी हुई चीजें हैं, जो समाज ने बता दी हैं कि महत्वपूर्ण हैं। उनके विषय में पूछिए कि क्या वो वास्तव में महत्वपूर्ण हैं?
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1.) अद्वैत बोध शिविर
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2.) आध्यात्मिक ग्रंथों पर कोर्स
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गलतियाँ और बदलाव

हजार चीजें तो चाहते ही हो न? जिस दिन तुम उसको ही चाहने लग जाओगे, काम हो जाएगा। जितने सवाल पूछ रहे हो, उन सारे सवालों का मूल सवाल ये है कि, “मैं चाहता भी हूँ क्या?” बातें तो बड़ी समझदारी की कर रहे हो, कोई जानना चाहता है बोध के बारे में, कोई प्यार के बारे में, कोई प्रभाव। कोई कुछ-कुछ। लेकिन सवालों का सवाल एक है। चाहते हो? चाहते हो जो, वो मिल जाएगा?

अगर पक्का-पक्का चाहने लगोगे कि वही मिल जाए, तो वो मिल जाएगा।लेकिन तुम चाह सकते नहीं जब तक वो न चाहे कि तुम चाहो।
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खेल के जारी रहने में मज़ा है और काम के खत्म हो जाने में

खेल वो होता है, जो दो बच्चे खेलते हैं आपस में। वहाँ ये कोशिश नहीं की जाती कि जल्दी से जल्दी जीत लूँ और खेल ख़त्म हो जाए। वहाँ तो प्रेम में खेला जाता है और कहा जाता है कि ऐसा खेलो कि खेलते ही रहो। ये नहीं कहा जाता कि, “अरे वाह! पंद्रह अंक बनाने थे जीतने के लिए। मैंने पहले बना लिए। खेल ख़त्म।” न! तो बड़े जो खेल खेलते हैं, और बच्चे जो खेल खेलते हैं, उसमें ज़मीन-आसमान का अंतर है। बड़े जो खेल खेलते भी हैं, वो खेल नहीं है। वो खेल भी हमारे प्रतियोगी मन से निकला है। वो हिंसा है एक प्रकार की। वो अपनी श्रेष्ठता सिद्ध करने का उपाय है।
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समझ हमेशा पूरी होती है

आप सिर्फ़ शोर के नामौजूदगी में जान सकते हैं। आप किसी चीज़ को नहीं समझते है, आप समझ में होते हैं। अब मन समझ में है और जब मन समझ में होता है, स्वतंत्र, तो वो बेचैन नहीं होता। तो सिर्फ़ वही देख के आप कह सकते हो कि सब कुछ सही होगा। बेचैनी के अभाव में ही, जागरूकता होती है। आपको कैसे पता कि आप जागरुक हैं? क्यूँकी आप बेचैन नहीं है।
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