प्रेम बेहोशी का सम्बन्ध नहीं

श्रोता: सर मेरा प्रश्न ये है कि किसी को चाहने से हमारी ज़िंदगी इतनी अस्त-व्यस्त क्यों हो जाती है ? असर क्यों पड़ता है हमारे जीवन पर? अक्सर

भगवान क्या हैं ?

स्वतंत्रता क्या है? हम नहीं जानते। सत्य क्या है? हम नहीं जानते। शिक्षा क्या है? हम ये भी नहीं जानते। मैं कौन हूँ? ये तो बिल्कुल ही नहीं जानते। पर इन सब बातों के बारे में हमने कुछ-कुछ सुन रखा है और इनको मान लिया है। तो इस प्रश्न को अलग से लेकर के नहीं देखा जा सकता कि ‘भगवान् क्या है, सत्य क्या है ?’

तुम्हारी असली ताक़त और कमजोरी

असली ताक़त या कमज़ोरी का आधार जानना, प्रेम, आनंद और मुक्ति है| इनको भुला देना कमज़ोरी और इनके साथ जीना ताक़त है| इसके अलावा कोई ताक़त या कमज़ोरी नहीं होती|

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