विद्यार्थी जीवन, पढ़ाई, और मौज || आचार्य प्रशांत (2018)

मौज कोई मस्ती तो होती नहीं कि सड़क पर घूम रहे हैं, और उछल-कूद मचा रहे हैं।

वो सब तो मौज होती नहीं।

मौज तो आदमी की सहज और स्वभावगत आदत होती है।

मौज को लाने जैसा कोई कार्यक्रम सफल नहीं हो सकता।

हाँ, जो चीज़ें तुमको अर्धविकसित, या ग्रंथिग्रस्त बनाए हुए हैं, जिनकी वजह से तुम छोटे हो, सीमित हो, संकुचित हो, उन चीज़ों को दूर कर दो।

अगर बच्चों का मन पढ़ाई में नहीं लगता हो || आचार्य प्रशांत (2018)

तुम ऐसे तो बनो कि ज़रा प्रभावशाली लगो उनको।

उन्हें भी पिता की बातों में ज़रा दम लगे, पिता के व्यक्तित्व पर ज़रा फक्र हो।

फिर सीखेंगे।

पहले तुम सीखो।

पढ़ाई में मन नहीं लगता? || आचार्य प्रशांत (2019)

पढ़ाई नहीं करनी है, तो गौर से देख लो कि क्या आवश्यक है जीवन में।

अगर रोटी आवश्यक है, तो देख लो कि पढ़ाई के बिना भी कैसे कमा सकते हो।

कोई ज़रूरी थोड़ी ही है कि पढ़-लिख कर ही रोटी कमाई जाए।

और भी तरीके हैं, उनसे कमा लो।

और पाओ कि रोटी आवश्यक नहीं है, घरवाले ज़बरदस्ती धक्का दे रहे हैं, तो मना कर दो हाथ जोड़कर कि नहीं पढ़ना।

और पाओ कि रोटी के लिए ही सही, लेकिन पढ़ना ज़रूरी है, तो पढ़ो बैठकर।