आरक्षण का सामना क्यों करना पड़ता है?

सत्र देखें: आचार्य प्रशांत: व्यर्थ है मन को बाँधना (Concentration and distraction)

आचार्य प्रशान्त – Acharya Prashant

आचार्य प्रशांत से जुड़ने के माध्यम:

अद्वैत बोध शिविर
हर महीने होने वाले इन यह शिविर हिमालय की गोद में, आचार्य जी के नेतृत्व में रह कर दुनिया भर के दुर्लभ शास्त्रों के अध्ययन का अनूठा अवसर हैं।

आवेदन हेतु ईमेल करें requests@prashantadvait.com पर या

संपर्क करें: श्री अंशु शर्मा:  +91 – 8376055661

  आध्यात्मिक ग्रंथों का शिक्षण (कोर्स)
आचार्य जी द्वारा हर माह चुनिंदा शास्त्रों पर प्रवचन एवं रोज़ मर्रा की ज़िन्दगी में उनकी महत्ता जानने का अवसर।

आवेदन हेतु ईमेल करें requests@prashantadvait.com पर या

 संपर्क करें: श्री अपार मेहरोत्रा : +91 9818591240

   जागृति माह
   जीवन के एक विशेष विषय पर और जीवन के आम दिनचर्या की समस्याओं का हल पाने का अनूठा अवसर। जो लोग व्यक्तिगत रूप से सत्र में मौजूद नहीं हो सकते, वो ऑनलाइन स्काइप या वेबिनार द्वारा बोध सत्र का            हिस्सा बन सकते हैं।

    आवेदन हेतु ईमेल करें requests@prashantadvait.com पर या

सम्पर्क करें: सुश्री अनुष्का जैन: +91 9818585917

 आचार्य जी से निजी साक्षात्कार
आचार्य जी से निजी बातचीत करने का बहुमूल्य अवसर।

आवेदन हेतु ईमेल करें requests@prashantadvait.com पर या

संपर्क करें: सुश्री अनुष्का जैन: +91 9818585917

सम्पादकीय टिप्पणी :

आचार्य प्रशांत द्वारा दिए गये बहुमूल्य व्याख्यान इन पुस्तकों में मौजूद हैं:

अमेज़न:  http://tinyurl.com/Acharya-Prashant
फ्लिप्कार्ट:  https://goo.gl/fS0zHf                            

शास्त्रों को अक़्ल से नहीं पढ़ते

डर क्या है? ये विचार की मेरा कुछ खो सकता है, मैं किसी पर आश्रित हूँ, जिस पर आश्रित हूँ वो मेरा कुछ छीन सकता है| तुम्हारा होना ही दूसरे पर आश्रित है, तुम हो ही इसीलिए क्योंकि दूसरा है, तुम उसी दिन तक हो ना जिस दिन तक दुनिया है| कोई है यहाँ पर जो ये दावा करे की दुनिया मिट जायगी फिर भी मैं रहूँगा? दुनिया मिट गयी है और तुम टंगे हुए हो, खड़े हो कहीं पर, ऐसा हो सकता है? आश्रित हो न पूरे तरीके से दुनिया पर ?

आचार्य प्रशांत
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हर महीने होने वाले इन यह शिविर हिमालय की गोद में, आचार्य जी के नेतृत्व में रह कर दुनिया भर के दुर्लभ शास्त्रों के अध्ययन का अनूठा अवसर हैं।

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आध्यात्मिक ग्रंथों का शिक्षण (कोर्स)

आचार्य जी द्वारा हर माह चुनिंदा शास्त्रों पर प्रवचन एवं रोज़ मर्रा की ज़िन्दगी में उनकी महत्ता जानने का अवसर।

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जागृति माह

जीवन के एक विशेष विषय पर और जीवन के आम दिनचर्या की समस्याओं का हल पाने का अनूठा अवसर। जो लोग व्यक्तिगत रूप से सत्र में मौजूद नहीं हो सकते, वो ऑनलाइन स्काइप या वेबिनार द्वारा बोध सत्र का हिस्सा बन सकते हैं।

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आचार्य जी से निजी साक्षात्कार

आचार्य जी से निजी बातचीत करने का बहुमूल्य अवसर।

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आचार्य प्रशांत द्वारा दिए गये बहुमूल्य व्याख्यान इन पुस्तकों में मौजूद हैं:

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अच्छे-बुरे का अंतर कैसे करें?

कौन आदमी कितनी अच्छाई को स्वीकार रहा है ये बिलकुल इसपर निर्भर करता है कि वो बुराई को भी कितना सोख ले रहा है। क्योंकि अच्छाई और बुराई, जिनको हम कहते हैं वो एक ही द्वैत के दो सिरे हैं। दो ऐसे विपरीत हैं जो एक दूसरे के बिना चल नहीं सकते। उदाहरण के लिए, तुमको मीठे वचन बोलने की ज़रूरत ही तब पड़ेगी, जब तुमने पहले कड़वे खूब बोल दिए हों।
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हिमालय की गोद में 30वें अद्वैत बोध शिविर का आयोजन किया जाने वाला है।
आचार्य प्रशांत के सानिध्य में रहने का और दुनिया भर के दुर्लभ ग्रंथों के अध्ययन के इस सुनहरे अवसर को न गवाएं।

तिथि: 24-27 मार्च
स्थान: टाइगर ग्रूव रिसोर्ट, जिम कॉर्बेट नेशनल पार्क रामनगर(उत्तराखंड)

आवेदन भेजने हेतु ईमेल करें requests@prashantadvait.com पर
या
संपर्क करें:
श्री अंशु शर्मा: +91 – 8376055661
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आचार्य प्रशांत द्वारा दिए गये बहुमूल्य व्याख्यान इन पुस्तकों में मौजूद हैं:

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दूसरों की मदद का भ्रम

यदि मेरा काम ही यही है कि मैं दूसरों की मदद करता रहूँ, मुझे अपने आप से नज़र चुरानी है और लगातार दूसरों की ओर ही देखते रहना है, एक झूठ में जीना है मुझे, तो मेरे लिए ज़रूरी हो जाता है कि मेरे आस पास ऐसे लोग बने रहें जो मेरी मदद के आकांक्षी हों। और मुझे बहुत अच्छा लगेगा जब लोग मुझसे मदद मांगने आएँगे। कई लोग बिलकुल प्रसन्न हो जाते हैं जब तुम उनके पास मदद मांगने जाओ। जो तुम्हारी मदद मांगने से खुश होता हो, जिसको इस बात में ख़ुशी मिलती हो कि कोई मेरे पास माद मांगने आया, उसको इस बात से दुःख भी होगा कि लोग अब मेरे पास मदद मांगने नहीं आ रहे।
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आचार्य प्रशांत द्वारा दिए गये बहुमूल्य व्याख्यान इन पुस्तकों में मौजूद हैं:

अमेज़न: http://tinyurl.com/Acharya-Prashant
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निजता वो अदृश्य रौशनी है जो सब कुछ दिखाती है

निजता यही है कि उसको जान लिया जो मेरा नहीं है। ये जानना ही निजी है। अविभक्तता यही है कि उसको जान लिया जो बाहर से आया है, ये जानना ही सब कुछ है। ध्यान रखिएगा लेकिन कि ये जानना, विचार करना नहीं है। इस जानने का अर्थ नहीं है कि आपने विचार करना शुरू कर दिया कि “मैं ‘मैं’ हूँ, मैं समझ हूँ, मैं बोध हूँ, मैं इंटेलिजेंस हूँ।” ये विचार नहीं है, ये कोई भाव नहीं है, ये कोई इन्ट्यूशन नहीं है। ये सूक्ष्म से भी सूक्ष्मतर है, इसका होना न होने के बराबर है। ये आपके जीवन की एक एक तस्वीर को रंग देगा, लेकिन खुद कभी नजर नहीं आएगा। ये रौशनी की तरह है, जो सब कुछ दिखाती है पर खुद कभी नज़र नहीं आती।
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प्रशांतअद्वैत फाउंडेशन पच्चीस से ज्यादा अद्वैत बोध शिविरों का आयोजन करने के बाद, इस महीने की 26 तारीख को अपना 28वां बोध शिविर आयोजित करने जा रही है।

28वां अद्वैत बोध शिविर: एक पुकार परम की 💐
आचार्य प्रशांत के सानिध्य में समय बिताने और विभिन्न स्रोतों से लिए गए श्रेष्ठतम कोटि के ग्रंथों को पढ़ने का एक अनूठा अवसर है २८वां अद्वैत बोध शिविर।

शिविर का हिस्सा बनने हेतु, requests@prashantadvait.com पर एक ईमेल करें ।
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अधिक जानकारी के लिए संपर्क करें:
श्री अंशु शर्मा: +91-8376055661
श्री कुंदन सिंह: +91-9999102998

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आचार्य प्रशांत द्वारा दिए गये बहुमूल्य व्याख्यान इन पुस्तकों में मौजूद हैं:

अमेज़न : http://tinyurl.com/Acharya-Prashant
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