मन से मुक्ति मन की चाल

वक्ता: मन को मिरतक देखि के, मति माने विश्वास साधु तहाँ लौं भय करे, जो लौं पिंजर साँस।। ​ माया के बड़े से बड़े छलावों में यह है कि ‘मैं नहीं हूँ’। सबसे

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