आचार्य प्रशांत: हम तनाव, डर, परेशानी में क्यों रहते हैं?

डर को छोड़ो ये धारणा छोड़ो, तुम्हें अब सहारे की जरूरत है। ये धारणा छोड़ो की कोई और आये और तुम्हें दिशा दिखाए। जो भी आएगा अपने अनुरूप के उधर को खींचेगा। थोड़ा साहस जुटाओ, थोड़ा श्रद्धा रखो। कोई नुकसान नहीं हो जाएगा तुम्हारा। अब मजबूत हो, बड़े हो अब चलो अपने कदमों पर, शुरू में थोड़ी ठोकर लगेगी, गिरोगे, चोट लगेगी पर मर नहीं जाओगे। दो-चार बार गिर लो, घुटनें छिल जाएंगे, खून बहेगा, ठीक है, क्या हो गया?

बचपन में नहीं गिरते थे क्या? तो दो-चार बार फिर से गिर लो, पर रस्सी की तरह मत रहो, बेज़ान, मुर्दा, गुलाम।

~ आचार्य प्रशांत

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निम्नलिखित माध्यमों से दुनिया के हर कोने से लोग आचार्य जी से जुड़ रहे हैं :-

१. आचार्य जी से निजी साक्षात्कार:
यह एक अभूतपूर्व अवसर है आचार्य जी से मुखातिब होकर उनसे निजी मुद्दों पर चर्चा करने का। यह सुविधा ऑनलाइन भी उपलब्ध है।
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२: अद्वैत बोध शिविर:
अद्वैत बोध शिविर आचार्य जी के सानिध्य में समय बिताने का एक अद्भुत अवसर है। इन बोध शिविरों में दुनिया भर से लोग, अपने व्यस्त जीवन से चार दिन निकालकर, प्रकृति की गोद में शास्त्रों का गहन अध्ययन करते हैं और उनसे प्राप्त शिक्षा की प्रासंगिता अपने जीवन में देख पाते हैं। ऋषिकेश, शिवपुरी, मुक्तेश्वर, जिम कॉर्बेट नेशनल पार्क, चोपटा, कैंचीधाम जैसे नैनाभिराम स्थानों पर आयोजित अनेकों बोध शिविरों में सैकड़ों लोग आच्रार्य जी के आशीर्वचनों से कृतार्थ हुए हैं।
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३. आध्यात्मिक ग्रंथों पर कोर्स:
आध्यात्मिक ग्रंथों पर कोर्स, आचार्य प्रशांत के नेतृत्व में होने वाले क्लासरूम आधारित सत्र हैं। सत्र में आचार्य जी द्वारा चुने गये दुर्लभ आध्यात्मिक ग्रंथों के गहन अध्ययन के माध्यम से साधक बोध को उपलब्ध हो पाते हैं।
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४. जागरुकता का महीना:
फाउंडेशन हर माह जीवन-सम्बन्धित एक आधारभूत विषय पर आचार्य जी के सत्रों की एक श्रृंखला आयोजित करता है। जो व्यक्ति बोध-सत्र में व्यक्तिगत रूप से मौजूद नहीं हो सकते, उन्हें फाउंडेशन की ओर से चुनिंदा सत्रों का ऑनलाइन प्रसारण उपलब्ध कराया जाता है। इस सुविधा द्वारा सभी साधक शारीरिक रूप से दूर रहकर भी, आचार्य जी के सत्रों में सम्मिलित हो पाते हैं।
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५. आचार्य जी के साथ एक दिन
‘आचार्य जी के साथ एक दिन’ एक अनूठा अवसर है जिज्ञासुओं के लिए जो, इस पहल के माध्यम से अद्वैत आश्रम – ग्रेटर नॉएडा में हर महीने, एक पूरे दिन का समय आचार्य जी के साथ व्यतीत कर पाते हैं।
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६. पार से उपहार : आचार्य जी के साथ सप्ताहंत
‘पार से उपहार’ एक सुनहरा प्रयास है आचार्य जी के सानिध्य में रहकर स्वयं को जान पाने का। इसका आयोजन प्रति माह, २ दिन और २ रातों के लिए, अद्वैत आश्रम – ग्रेटर नॉएडा में होता है।
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७. स्टूडियो कबीर
स्टूडियो कबीर एक ऐसी पहल है जो आज के प्रचलित संस्कृति में आदिकाल से पूजनीय संतों व ग्रंथों द्वारा प्रतिपादित बोध का पठन-पाठन एक संगीतमय तरीके से करती है। आम जनमानस में संतों व ग्रंथों के गीतों की लोकप्रियता बढ़ सके, इसके लिए स्टूडियो कबीर उन गीतों को याद करवाने का और सुंदर गीतों के माध्यम से प्रस्तुत करने के अथक प्रयास में संलग्न है।
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८. फ्री-हार्ट्स शिविर: एक नयी दृष्टि में अध्यात्म
यह शिविर हर उस व्यक्ति के लिए है जो दिल से युवा हैं। इस शिविर के अंतर्गत आपसी सौहार्द्य और मैत्री का वर्धन, मनोवैज्ञानिक तथ्यों से रूबरू होना, जीवन की ग्रंथियों को सुलझाना, ध्यान की अभिनव विधियों का प्रयोग करना, नृत्य, गायन, कला-प्रदर्शन करना आदि शामिल है।
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९. त्रियोग:
त्रियोग हठ-योग, भक्ति-योग और ज्ञान-योग का अभूतपूर्व सम्मिश्रण है, जिसमें सम्पूर्ण स्वास्थ्य और सर्वांगीण विकास की प्राप्ति हेतु २ घंटे के योग-सत्र का अनूठा आयोजन किया जाता है।
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१०. बोध-पुस्तक
जीवन के महत्वपूर्ण विषयों पर आचार्य जी के व्यक्तव्यों का बेहतरीन संकलन हिंदी व अंग्रेजी भाषा में पुस्तकों के रूप में अमेज़न और फ्लिपकार्ट पर उपलब्ध हैं:

अमेज़न: http://tinyurl.com/Acharya-Prashant

फ्लिपकार्ट: http://tinyurl.com/AcharyaBooks

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इन सुन्दरतम व अनोखी पहलों में भाग लेने के लिए, अपने आवेदन requests@prashantadvait.comपर भेजें, या श्री कुन्दन सिंह से संपर्क करें: +91-9999102998

अपनी निजता क्यों खो देते हो?

हमारे दिमाग ऐसे ही हैं। उन पर निशान बहुत जल्दी पड़ जाते हैं। जैसे कि एक धातु की पट्टी हो। उसको आप एक बार मोड़ दो और फिर छोड़ो। तो क्या होता है? तुमने एक लोहे की पट्टी ली और उसकी मोड़ दिया। फिर छोड़ोगे तो क्या होगा? वो वैसी ही रहेगी जैसा कर दिया है। ये कहलाती है दिमाग की प्लास्टिसिटी। एक बार मन पर एक प्रभाव पड़ गया, तो वो मन को गन्दा कर के जाएगा। वो मन पर एक तरीके का निशान छोड़ करके जाएगा। वो एक प्रभाव पर से गुज़रा और वो हमेशा के लिए प्रभावित हो गया। हमेशा के लिए।
दूसरी ओर लचीला दिमाग होता है। वो एक स्वस्थ दिमाग होता है। जो प्रभावों से गुज़र जाता है लेकिन रहता साफ़ है। उस पर कोई निशान हमेशा के लिए पड़ नहीं पाता। उसकी कंडीशनिंग नहीं हो पाती।
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आचार्य प्रशांत से जुड़ने के माध्यम

1.) अद्वैत बोध शिविर
आवेदन हेतु ईमेल करें requests@prashantadvait.com par
या
संपर्क करें: श्री अंशु शर्मा: +91 – 8376055661

2.) आध्यात्मिक ग्रंथों पर कोर्स
आवेदन हेतु ईमेल करें requests@prashantadvait.com पर
या
संपर्क करें: श्री अपार मेहरोत्रा : +91 9818591240

3.) बोधसत्र का सीधा ऑनलाइन प्रसारण
आवेदन हेतु ई-मेल भेजें: requests@prashantadvait.com
या संपर्क करें:
श्रीमती अनुष्का जैन: +91 9818585917

4.) आचार्य जी से निजी साक्षात्कार
आवेदन हेतु ईमेल करें requests@prashantadvait.com पर
या
संपर्क करें: अनुष्का जैन: +91 9818585917
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आचार्य प्रशांत द्वारा दिए गये बहुमूल्य व्याख्यान इन पुस्तकों में मौजूद हैं:

अमेज़न: http://tinyurl.com/Acharya-Prashant
फ्लिप्कार्ट: https://goo.gl/fS0zHf

‘अप्प दीपो भव’ के विकृत अर्थ

तुम कहते हो, “देखिए हमें हमारे मन की करने की आज़ादी नहीं दी जा रही है, हमारे ऊपर एक बाहरी व्यवस्था लादी जा रही है। हम क्यों माने किसी की बात? हम क्यों चले किसी और के दिये नियम-कानूनों पर? हमें हमारी करने दो ना।” तुमने कभी गौर किया है कि तुम जिसे कहते हो कि तुम्हारी करने दो, वो है क्या? उसमें तुम्हारा है कितना? तुम कहते हो “नहीं नहीं मुझे मेरे मुताबिक़ नौकरी करने दो, मुझे मत बताओ कि क्या सही, क्या गलत।” ठीक है नहीं बताएंगे, पर तुम यह बता दो कि अगर तुमको सामाजिक पट्टी न पढ़ाई होती, तो तुम्हें यह पता भी होता कि नौकरी जैसी कोई चीज़ होती है? और यदि तुम किसी दूसरे समाज में होते जहाँ तुम्हें दूसरे तरीके से संस्कारित कर दिया होता, तो क्या तुम इसी तरीके से और इन्हीं नौकरियों के पीछे भागते?
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हिमालय की गोद में 30वें अद्वैत बोध शिविर का आयोजन किया जाने वाला है।
आचार्य प्रशांत के सानिध्य में रहने का और दुनिया भर के दुर्लभ ग्रंथों के अध्ययन के इस सुनहरे अवसर को न गवाएं।

तिथि: 24-27 मार्च
स्थान: टाइगर ग्रूव रिसोर्ट, जिम कॉर्बेट नेशनल पार्क रामनगर(उत्तराखंड)

आवेदन भेजने हेतु ईमेल करें requests@prashantadvait.com पर
या
संपर्क करें:
श्री अंशु शर्मा: +91 – 8376055661
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आचार्य प्रशांत द्वारा दिए गये बहुमूल्य व्याख्यान इन पुस्तकों में मौजूद हैं:

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हम दूसरों से अलग अनूठे कैसे बनें?

तुम अपनी बात करने में बहुत घबराते हो, यहीं पर गलती हो रही है। तुम कह रहे हो, समय और ऊर्जा नष्ट हो रहे हैं, समय और ऊर्जा नहीं, पूरा जीवन नष्ट हो रहा है क्योंकि तुम ‘मैं’ बनने को तैयार नहीं हो। ‘मैं’ का अर्थ होता है, मेरी ज़िम्मेदारी, मेरी। अपने पाओं पर खड़ा हूँ, अपनी दृष्टि से देखता हूँ, अपनी समझ से समझता हूँ और फिर मेरा समय, मेरा है, अब समय नष्ट नहीं होगा, फिर मेरी ऊर्जा मेरी है। अब ऊर्जा भी नष्ट नहीं होगी।
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आचार्य प्रशांत द्वारा दिए गये बहुमूल्य व्याख्यान इन पुस्तकों में मौजूद हैं:

अमेज़न: http://tinyurl.com/Acharya-Prashant
फ्लिप्कार्ट: https://goo.gl/fS0zHf

दुनिया से प्रभावित क्यों हो जाता हूँ?

मन की एक स्थिति वैसी भी हो सकती है कि जिसमें कोई विषय उसके लिये महत्वपूर्ण ना रह जाए। मन अपने आप में समा जाए। मन कहे जितने भी विषय हैं, उन सबकी प्रकृति एक है; वो आते हैं जाते हैं। मुझे उनमें से कोई भी महत्वपूर्ण लगता नहीं क्योंकि जो सर्वाधिक महत्वपूर्ण है, वो मेरे भीतर ही है। ना अच्छा महत्वपूर्ण है, ना बुरा महत्वपूर्ण है; जो महत्वपूर्ण है वो हमने पा लिया है, तो अब प्रभावित क्या होना।

अब पूरा खेल तुम्हारे सामने चलता रहेगा और तुम उसके मध्य में अनछुए से बैठे रहोगे। तुम्हारे चारों तरफ़ जैसे नदी बह रही हो और तुम उस नदी के केंद्र में बैठी हो और पानी तुम्हें स्पर्श ना कर पा रहा हो। ऐसी स्थिति हो जाएगी।
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आचार्य प्रशांत द्वारा दिए गये बहुमूल्य व्याख्यान इन पुस्तकों में मौजूद हैं:

अमेज़न: http://tinyurl.com/Acharya-Prashant
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