सुनना ही मोक्ष है

सुणि सुणि मेरी कामणी पारि उतारा होइ ॥२॥ (श्री गुरू ग्रन्थ साहिब जी, अंग ६६०) वक्ता: सुणि सुणि मेरी कामणी पारि उतारा होइ| सुन-सुन कर मैं

पहला याद रखो,आखिरी स्वयं होगा

श्रोता १: यहाँ पर एक पंक्ति है: गावै तो ताणु होवै किसै ताणु | इसका अनुवाद लिखा था, ‘कोई उसकी शक्ति का गुणगान करे- ये शक्ति

समय, साधना और सुरति

वक्ता: खिंथा कालु कुआरी काइआ जुगति डंडा परतीति| मौत को हमेशा याद रखो| मौत की स्मृति को ऐसे पहनो, जैसे तुम अपना पैबंद लगा लिबास

मंदिर-जहाँ का शब्द मौन में ले जाये

प्रश्न: ‘अनहता सबद बाजंत भेरी’, कृपया इसका अर्थ बताएँ? वक्ता: मंदिर से जो घंटे, घड़ियाल, ढोल, नगाड़े की आवाज़ आ रही है; वो ‘अनहद’ शब्द है | घंटा जैसे बजता

1 3 4 5