खाने और कपड़ों के प्रति आकर्षण || आचार्य प्रशांत (2018)

न कुछ अच्छा है, न कुछ बुरा है।  
मुक्ति अच्छी है, बाकि सब बुरा है।

जो कुछ मुक्ति की ओर ले जाता हो, वो बुरा हो नहीं सकता।

और वो अच्छी-से-अच्छी चीज़, जो तुम्हें मुक्ति न देती हो, बताओ वो अच्छी कैसे हुई?

धन की क्या महत्ता है? || आचार्य प्रशांत, ओशो पर (2018)

धन अकस्मात नहीं आ जाता। हाथ का मैल नहीं होता वो, भले ही हमारा प्रचलित मुहावरा ऐसा कहता हो।

धन आता है, उसके पास, जो दुनिया को समझता है।

धन कमाना एक कला है, जो माँग करती है कि आपने जगत के दाँव-पेंचों की समझ हो।

जो दुनिया को नहीं जानता, वो दुनिया में धन नहीं कमा सकता।

और ‘दुनिया को जानने’ का अर्थ होता है – मन को जानना।

जग गए हो, ये कहना बड़ी भ्रान्ति है

जग गए हो, ये कहना बड़ी भ्रान्ति है। कोई जग जाता नहीं है। जगने की प्रक्रिया, सतत चेतना की है; कंटीन्यूअस अवेकनिंग। ‘जग गए हो’, जैसे स्टेटमेंट का

बचपन से देखा सुना, उससे अचानक कैसे हटें?

जग गए हो, ये कहना बड़ी भ्रान्ति है। कोई जग जाता नहीं है। जगने की प्रक्रिया, सतत चेतना की है; कंटीन्यूअस अवेकनिंग। ‘जग गए हो’, जैसे स्टेटमेंट का कोई अर्थ नहीं होता। लगातार जगते रहना होता है। क्योंकि सुलाने वाली ताकतें बहुत हैं।

सुलाने वाली ताकतें बहुत हैं, और लगातार काम कर रही हैं। तो जगना भी लगातार होता है; लगातार। ‘जग गए हो’ जैसा कुछ नहीं है । फिर सो जाओगे ।
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अद्वैत बोध शिविर
हर महीने होने वाले इन यह शिविर हिमालय की गोद में, आचार्य जी के नेतृत्व में रह कर दुनिया भर के दुर्लभ शास्त्रों के अध्ययन का अनूठा अवसर हैं।

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संपर्क करें: श्री अंशु शर्मा:  +91 – 8376055661

  आध्यात्मिक ग्रंथों का शिक्षण (कोर्स)
आचार्य जी द्वारा हर माह चुनिंदा शास्त्रों पर प्रवचन एवं रोज़ मर्रा की ज़िन्दगी में उनकी महत्ता जानने का अवसर।

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 संपर्क करें: श्री अपार मेहरोत्रा : +91 9818591240

   जागृति माह
   जीवन के एक विशेष विषय पर और जीवन के आम दिनचर्या की समस्याओं का हल पाने का अनूठा अवसर। जो लोग व्यक्तिगत रूप से सत्र में मौजूद नहीं हो सकते, वो ऑनलाइन स्काइप या वेबिनार द्वारा बोध सत्र का            हिस्सा बन सकते हैं।

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 आचार्य जी से निजी साक्षात्कार
आचार्य जी से निजी बातचीत करने का बहुमूल्य अवसर।

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सम्पादकीय टिप्पणी :

आचार्य प्रशांत द्वारा दिए गये बहुमूल्य व्याख्यान इन पुस्तकों में मौजूद हैं:

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मैं इकट्ठा क्यों करता हूँ?

व्यापारी और वैज्ञानिक दोनों एक मामले में नास्तिक होते हैं। उन्हें ये भ्रम होता है कि सत्य जाना जा सकता है। एक कहता है: ‘’सत्य को जान कर के बुद्धि में कैद कर लूँगा,’’ और दूसरा कहता है, ‘’जीवन में जो ही पाने योग्य है, उसे पा कर के तिजोरी में कैद कर लूँगा।’’ एक ने ऊँचे से ऊँचा स्थान ज्ञान को दिया होता है, और दूसरे ने ऊँचे से ऊँचा स्थान धन को दिया होता है। इन दोनों की ज़िन्दगी में समर्पण नहीं होता। इन दोनों की ही जिंदगी में ये भाव नहीं होता कि, ”जो उच्चतम है, ना मैं उसको मानसिक रूप से जान सकता हूँ, ना ही किताबों में लिख सकता हूँ, और ना ही अपने बैंक अकाउंट में कैद कर सकता हूँ।”
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आचार्य प्रशांत से जुड़ने के माध्यम

1.) अद्वैत बोध शिविर
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आचार्य प्रशांत द्वारा दिए गये बहुमूल्य व्याख्यान इन पुस्तकों में मौजूद हैं:

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पारिवारिक माहौल से विचलित मन

प्रतिक्षण मन के सामने विकल्प ही विकल्प होते हैं। हम जान नहीं पाते क्योंकि हम ध्यान नहीं देते कि लगातार चुनाव की प्रक्रिया चल ही रही है। मन किस आधार पर चुनाव करता है?

मन इस आधार पर चुनाव करता है कि उसको क्या बता दिया गया है कि महत्त्वपूर्ण है।

तुम जो भी कुछ मन को बता दोगे कि महत्त्वपूर्ण है, मन उसी को आधार बना कर के निर्णय ले लेगा!
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हिमालय की गोद में 30वें अद्वैत बोध शिविर का आयोजन किया जाने वाला है।
आचार्य प्रशांत के सानिध्य में रहने के और दुनिया भर के दुर्लभ शास्त्रों के अध्ययन के इस सुनहरे अवसर को व्यर्थ न जाने दें।

तिथि: 24-27 मार्च
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श्री अंशु शर्मा: +91 8376055661
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आचार्य प्रशांत द्वारा दिए गये बहुमूल्य व्याख्यान इन पुस्तकों में मौजूद हैं:

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