देश की फ़िक्र! || आचार्य प्रशांत (2014)

तुम बदल जाओ, देश अपने आप बदल जाएगा।

अपनी फ़िक्र करो, देश की नहीं। देश अपनी फ़िक्र कर लेगा। जहाँ पर नागरिक स्वस्थ है, जगा हुआ है, वो देश भी स्वस्थ होगा और जगा हुआ होगा।

अपनी फ़िक्र करो।

चेतना है मूल, नैतिकता है फूल

प्रश्न: क्या समाज में नैतिकता से रहना बहुत आवश्यक है? वक्ता: सामाजिक नैतिकता कोई नैतिकता होती ही नहीं है। नैतिकता होती है तुम्हारी अपनी समझ

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