बदलो नहीं, समझो

तुम्हारी हर इच्छा, हर वस्तु, हर राह, हर कोशिश सिर्फ़ अपने स्त्रोत तक पहुँचने के प्रयास हैं। लेकिन जीवन के कुछ विकृत प्रभाव हैं जिनके कारण तुम परोक्ष रास्ते ले लेते हो – जैसे हत्या, चोरी, सिगरेट, महत्वाकांक्षा। परन्तु अस्तित्व में कुछ भी घृणित नहीं होता, अतः कुछ भी बदलने की चेष्टा मत करो। सिर्फ समझो। सही बदलाव समझ में स्वतः हो जायेगा।

माहौल से प्रभावित क्यों हो जाता हूँ?

एक बच्चे के साथ ऐसा होगा और अच्छा है ऐसा हो, कि उसे बाहर से ही प्रभावित होना पड़े, क्योंकि आप एक बच्चे के विवेक पर ये नहीं छोड़ सकते कि ये जो बिजली का सर्किट है, इसमें उंगली डालनी है या नहीं। अगर वो प्रयोग करके सीखेगा, तो शायद शारीरिक रूप से बचेगा ही नहीं। एक बच्चे का प्रभावित होना स्वाभाविक है आठ साल, दस साल, बारह साल की उम्र तक, पर दिक्कत ये है कि तुम अभी तक बारह साल की उम्र के ही रह गए हो।प्रौढ़ता, व्यस्कता तुममें आ ही नहीं रही है।

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