तुम दुनिया से भिन्न नहीं हो

दो देश नहीं लड़ते, हिंसा सर्वप्रथम मनुष्य के मन में जन्म लेती है| बड़े से बड़े बम की जो उर्जा है वो भौतिक उर्जा नहीं है वो मानसिक उर्जा है| तुम ये मत समझ लेना कि परमाणु हथियार  भौतिक उर्जा  से चलता है, वो मानसिक उर्जा से चलता है| दिखती भौतिक है, तुम उसे नाप सकते हो तुम कह सकते हो कि इतने मेगा टन का विस्फोट था इतनी जूल ऊर्जा इसमें से निकली, किसी भी तरीके से नाप सकते हो पर ध्यान से देखोगे तो समझ आएगा कि वो उर्जा तुम्हारी घृणा की है| वो उर्जा यूरेनियम की या प्लूटोनियम की बाद में है सर्वप्रथम वो उर्जा तुम्हारी घृणा की उर्जा है|

आचार्य प्रशांत
_______________

सत्र देखें: आचार्य प्रशांत: तुम दुनिया से भिन्न नहीं हो (You are not separate from the world)

 
 

आचार्य प्रशान्त – Acharya Prashant
आचार्य प्रशांत से जुड़ने के माध्यम:

अद्वैत बोध शिविर
हर महीने होने वाले इन यह शिविर हिमालय की गोद में, आचार्य जी के नेतृत्व में रह कर दुनिया भर के दुर्लभ शास्त्रों के अध्ययन का अनूठा अवसर हैं।

आवेदन हेतु ईमेल करें requests@prashantadvait.com पर या

संपर्क करें: श्री अंशु शर्मा:  +91 – 8376055661

  आध्यात्मिक ग्रंथों का शिक्षण (कोर्स)
आचार्य जी द्वारा हर माह चुनिंदा शास्त्रों पर प्रवचन एवं रोज़ मर्रा की ज़िन्दगी में उनकी महत्ता जानने का अवसर।

आवेदन हेतु ईमेल करें requests@prashantadvait.com पर या

 संपर्क करें: श्री अपार मेहरोत्रा : +91 9818591240

   जागृति माह
   जीवन के एक विशेष विषय पर और जीवन के आम दिनचर्या की समस्याओं का हल पाने का अनूठा अवसर। जो लोग व्यक्तिगत रूप से सत्र में मौजूद नहीं हो सकते, वो ऑनलाइन स्काइप या वेबिनार द्वारा बोध सत्र का            हिस्सा बन सकते हैं।

    आवेदन हेतु ईमेल करें requests@prashantadvait.com पर या

सम्पर्क करें: सुश्री अनुष्का जैन: +91 9818585917

 आचार्य जी से निजी साक्षात्कार
आचार्य जी से निजी बातचीत करने का बहुमूल्य अवसर।

आवेदन हेतु ईमेल करें requests@prashantadvait.com पर या

संपर्क करें: सुश्री अनुष्का जैन: +91 9818585917

सम्पादकीय टिप्पणी :

आचार्य प्रशांत द्वारा दिए गये बहुमूल्य व्याख्यान इन पुस्तकों में मौजूद हैं:

अमेज़न:  http://tinyurl.com/Acharya-Prashant
फ्लिप्कार्ट:  https://goo.gl/fS0zHf                            

हर काम के साथ परिणाम की उम्मीद क्यों?

ऐसा मत सोचो कि जीवन ऐसा होना चाहिए। कोई ज़रूरी नहीं है कि ज़िन्दगी ऐसे ही जी जाए कि अभी जो कुछ हो रहा है उसमें तो कोई मज़ा नहीं, और आगे की उम्मीदें पाल रखी हैं। पर तुम्हें तो बताया ही यही गया है कि दुनिया उम्मीद पर चलती है। दुनिया उम्मीद पर नहीं चलती है, दुनिया अभी है। अभी है। उम्मीद पे सिर्फ कल्पनाएँ चलती हैं। उम्मीद क्या है? कल्पना ही है ना? उम्मीद एक कल्पना ही तो है ना कि आगे कुछ हो जाएगा।

तो तुम देखो, कि तुम्हारी सारी अपेक्षाएँ पैदा कहाँ से होती हैं। तुम्हारी सारी अपेक्षाएँ पैदा ही इसीलिए होती हैं, क्योंकि तुम इस क्षण से बुरी तरह से असंतुष्ट हो। जब इस क्षण से कोई संतुष्टि नहीं मिल रही तो तुम आगे के लिए उम्मीदें पालते हो। जो अभी में पूरा पूरा डूबा होगा, उसको वक़्त कहाँ है जो आगे के लिए सोचे?

आचार्य प्रशांत
____________

आचार्य प्रशांत से जुड़ने के माध्यम:

अद्वैत बोध शिविर
हर महीने होने वाले इन यह शिविर हिमालय की गोद में, आचार्य जी के नेतृत्व में रह कर दुनिया भर के दुर्लभ शास्त्रों के अध्ययन का अनूठा अवसर हैं।

आवेदन हेतु ईमेल करें requests@prashantadvait.com पर या

संपर्क करें: श्री अंशु शर्मा:  +91 – 8376055661

  आध्यात्मिक ग्रंथों का शिक्षण (कोर्स)
आचार्य जी द्वारा हर माह चुनिंदा शास्त्रों पर प्रवचन एवं रोज़ मर्रा की ज़िन्दगी में उनकी महत्ता जानने का अवसर।

आवेदन हेतु ईमेल करें requests@prashantadvait.com पर या

 संपर्क करें: श्री अपार मेहरोत्रा : +91 9818591240

   जागृति माह
   जीवन के एक विशेष विषय पर और जीवन के आम दिनचर्या की समस्याओं का हल पाने का अनूठा अवसर। जो लोग व्यक्तिगत रूप से सत्र में मौजूद नहीं हो सकते, वो ऑनलाइन स्काइप या वेबिनार द्वारा बोध सत्र का            हिस्सा बन सकते हैं।

    आवेदन हेतु ईमेल करें requests@prashantadvait.com पर या

सम्पर्क करें: सुश्री अनुष्का जैन: +91 9818585917

 आचार्य जी से निजी साक्षात्कार
आचार्य जी से निजी बातचीत करने का बहुमूल्य अवसर।

आवेदन हेतु ईमेल करें requests@prashantadvait.com पर या

संपर्क करें: सुश्री अनुष्का जैन: +91 9818585917

सम्पादकीय टिप्पणी :

आचार्य प्रशांत द्वारा दिए गये बहुमूल्य व्याख्यान इन पुस्तकों में मौजूद हैं:

अमेज़न:  http://tinyurl.com/Acharya-Prashant
फ्लिप्कार्ट:  https://goo.gl/fS0zHf                            

तुम्हारी सहमति के बिना ठगे नहीं जा सकते तुम

आपकी अनुमति के बिना ‘वो’ भी आपके पास नहीं आ सकता| याद रखिएगा आख़िरी ‘हाँ’, या आख़िरी ‘न’ आपको बोलनी है; आपकी मुक्ति हर मायने में पूरी है| जब तब आप नहीं कहते, “हाँ, स्वीकार है” स्वयं परम भी आपसे मिल नहीं सकता; और तो छोड़ दीजिए कि कोई इंसान आपको मिल लेगा या पा लेगा या बदल देगा, स्वयं परम भी न आपको बदल सकता है, न मिल सकता है; जब तक आप नहीं कह देते| आपको अपनी पूरी जानकारी में, जानते बूझते हाँ कहना पड़ेगा, और याद रखिएगा वो बेहोशी की ‘हाँ’ नहीं हो सकती|

आचार्य प्रशांत
_____________

आचार्य प्रशांत से जुड़ने के माध्यम:

अद्वैत बोध शिविर
हर महीने होने वाले इन यह शिविर हिमालय की गोद में, आचार्य जी के नेतृत्व में रह कर दुनिया भर के दुर्लभ शास्त्रों के अध्ययन का अनूठा अवसर हैं।

आवेदन हेतु ईमेल करें requests@prashantadvait.com पर या

संपर्क करें: श्री अंशु शर्मा:  +91 – 8376055661

  आध्यात्मिक ग्रंथों का शिक्षण (कोर्स)
आचार्य जी द्वारा हर माह चुनिंदा शास्त्रों पर प्रवचन एवं रोज़ मर्रा की ज़िन्दगी में उनकी महत्ता जानने का अवसर।

आवेदन हेतु ईमेल करें requests@prashantadvait.com पर या

 संपर्क करें: श्री अपार मेहरोत्रा : +91 9818591240

   जागृति माह
   जीवन के एक विशेष विषय पर और जीवन के आम दिनचर्या की समस्याओं का हल पाने का अनूठा अवसर। जो लोग व्यक्तिगत रूप से सत्र में मौजूद नहीं हो सकते, वो ऑनलाइन स्काइप या वेबिनार द्वारा बोध सत्र का            हिस्सा बन सकते हैं।

    आवेदन हेतु ईमेल करें requests@prashantadvait.com पर या

सम्पर्क करें: सुश्री अनुष्का जैन: +91 9818585917

 आचार्य जी से निजी साक्षात्कार
आचार्य जी से निजी बातचीत करने का बहुमूल्य अवसर।

आवेदन हेतु ईमेल करें requests@prashantadvait.com पर या

संपर्क करें:  सुश्री अनुष्का जैन: +91 9818585917

सम्पादकीय टिप्पणी :

आचार्य प्रशांत द्वारा दिए गये बहुमूल्य व्याख्यान इन पुस्तकों में मौजूद हैं:

अमेज़न:  http://tinyurl.com/Acharya-Prashant
फ्लिप्कार्ट:  https://goo.gl/fS0zHf

1 3 4 5 6 7 36