माँ-बाप मुझे समझते क्यों नहीं?

कौन है जो कुछ भी समझता है? क्या कोई भी कुछ भी समझ रहा है? सब सिर्फ एक सोच के गुलाम हैं। माँ-बाप भी ऐसे ही लोगों में से हैं। तो इसमें ताजुब्ब क्या है कि उन्हें कुछ भी क्यों नहीं समझ आता? माँ-बाप हो जाने से अचानक आप में कोई दैविक गुण तो आ नहीं जाएंगे। माँ-बाप हो जाना तो सिर्फ एक शारीरिक प्रक्रिया है।

गॉसिप – व्यर्थ चर्चा- मेरे जीवन का हिस्सा क्यों न हो?

श्रोता: सर, अभी सैशन शुरू होने से पहले हम सभी लोग मन्त्रणा कर रहे थे| एक सर ने यह सवाल उठाया कि क्या तुम लोगों ने

1 2 3 4