दमित जीवन ही उत्तेजना माँगता है

आपको अच्छे से पता है कि आप सुबह उठ कर कहाँ जाओगे, आपको अच्छे से पता है वहाँ क्या होगा। आपको यह भी पता है कि आप वापस लौट कर कहाँ आओगे। आपको यह भी पता है कि वहाँ आपको कौन-से चेहरे मिलेंगे, आपको यह भी पता है कि वो आपसे किस तरह की बातें करेंगे, आपको यह भी पता है कि उसके बाद क्या होगा, और अगला दिन भी वैसा ही होगा। सब कुछ तो तयशुदा है।

जब सब कुछ इतना तयशुदा हो जाता है, तो मन का एक कोना विद्रोह करता है। वो कहता है, “भले ही मौत का ख़तरा हो, लेकिन कुछ तो अलग हो”।

क्या एकाग्रता ध्यान में सहयोगी है?

प्रश्न: क्या एकाग्रता ध्यान में सहयोगी है? वक्ता: नहीं। हाँलांकि, विशिष्ट परिस्थितियों के अंतर्गत ऐसा हो सकता है। तुम्हें गुरु के पास वापस आना ही

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