मन से दोस्ती कर लो

मन का हक़ है, थोड़ा सा इधर उछल लिया, उधर कूद लिया। बन्दर है, लेकिन अपना बन्दर है।

उसको यह अनुमति नहीं दी जा सकती कि सर पर चढ़कर उपद्रव करे, घर में तोड़-फोड़ करे। पर ये भी ठीक नहीं है ना कि तुमने उसको इतनी सख्ती से बाँध दिया खम्भे से कि वो बेचारा अधमरा ही हुआ जा रहा है, ख़त्म ही हो गया है।

मन बन्दर ही रहेगा, मन नहीं योगी हो जाता। हाँ, यह है कि तुम बंदर के साथ प्रेम से रहो, तो बंदर भी प्रेम की भाषा समझ जाता है। फ़िर वो भी धीरे-धीरे कुछ बातें ऐसी जान जाता है, जो वैसे नहीं समझाई जा सकतीं; प्रेम से जान जाता है।

आपके जाने के बाद भूल क्यों जाता हूँ?

जब भी कोई समस्या बहुत बड़ी लगने लगे, तो एक सवाल पूछना अपने आप से? “समस्या बड़ी है या मैं छोटा अनुभव कर रहा हूँ।” ईमानदार उत्तर हमेशा एक ही मिलेगा- समस्या बड़ी नहीं है, तुम अपने आप को बहुत छोटा मानते हो। और छोटा मानने का जो कारण है वो बता दिया है

निम्न विचार और उच्च विचार क्या?

प्रश्न: निम्न विचार और उच्च विचार क्या हैं? वक्ता: हम में से कितने लोगों को ये सवाल अपने सन्दर्भ में उचित लग रहा है? कितने लोगों

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