जो संसार से मिले सो समस्या; समस्या का साक्षित्व है समाधान

सारी चिंता, या सारी प्रसन्नता शुरू किस समय होती है? जब आँखों के सामने संसार आता है, और संसार का बड़ा हिस्सा है समाज, जो इंसान ने बनाया, ये पूरा मॉहौल। ये जैसे ही इन्द्रियों के माध्यम से मन में घुसता है, आक्रमण करता है वैसे ही चिंता शुरू, और इसका कोई उपचार नहीं है, क्योंकि इसकी परिभाषा ही यही है। अगर इसने मन को जकड़ लिया, तो चिंता होनी ही होनी है। तुमने आँख खोली और बाहर उपद्रव देखा, चिंता शुरू, क्योंकि उपद्रव सीधा आँखों से घुस कर के मन तक पहुँचा और मन को अपनी गिरफ्त में ले लिया। तुम कुछ कर नहीं पाओगे। तो ये तो बड़ी लाचारगी की हालत हो गयी, क्या करें? कुछ करा जा सकता है। करा ये जा सकता है कि तुम अपने आप को मन से ज़रा हटा लो, मन तो पकड़ में आ ही जाएगा संसार की क्योंकि मन बना ही संसार से है।
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अद्वैत बोध शिविर
हर महीने होने वाले इन यह शिविर हिमालय की गोद में, आचार्य जी के नेतृत्व में रह कर दुनिया भर के दुर्लभ शास्त्रों के अध्ययन का अनूठा अवसर हैं।

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आचार्य जी द्वारा हर माह चुनिंदा शास्त्रों पर प्रवचन एवं रोज़ मर्रा की ज़िन्दगी में उनकी महत्ता जानने का अवसर।

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   जागृति माह
   जीवन के एक विशेष विषय पर और जीवन के आम दिनचर्या की समस्याओं का हल पाने का अनूठा अवसर। जो लोग व्यक्तिगत रूप से सत्र में मौजूद नहीं हो सकते, वो ऑनलाइन स्काइप या वेबिनार द्वारा बोध सत्र का            हिस्सा बन सकते हैं।

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सम्पादकीय टिप्पणी :

आचार्य प्रशांत द्वारा दिए गये बहुमूल्य व्याख्यान इन पुस्तकों में मौजूद हैं:

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दशहरा, और रावण के दस सिर

राम वो जो सदा स्वकेंद्रित है, वो जहाँ पर है, वहीं पर केंद्र आ जाता है। रावण वो जिसके अनेक केंद्र हैं और वो किसी भी केंद्र के प्रति पूर्णतया समर्पित नहीं है। इस केंद्र पर है तो वो खींच रहा है, उस केंद्र पर है तो वो खींच रहा है। इसी कारण वो केंद्र-केंद्र भटकता है, घर-घर भटकता है, मन-मन भटकता है। जो मन-मन भटके, जो घर-घर भटके, जिसके भीतर विचारों का लगातार संघर्ष चलता रहे, वो रावण।
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25वां अद्वैत बोध शिविर आचार्य प्रशांत के साथ आयोजित किया जाने वाला है।
दिनांक: 16 से 19 अक्टूबर
स्थान: मुक्तेश्वर, उत्तराखंड

आवेदन हेतु requests@prashantadvait.com पर ई-मेल भेजें।
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आचार्य प्रशांत द्वारा दिए गये बहुमूल्य व्याख्यान इन पुस्तकों में मौजूद हैं:

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अपनी बेसब्री की वजह जानते हो?

साधु जन कौन है? साधु जन वो है जिसने वहाँ घर बनाया है जहाँ आने-जाने का कोई सवाल नहीं पैदा होता। तुम उसका घर उजाड़ ही नहीं सकते। तुम जितनी बार उसका घर उजाड़ोगे उतनी बार तुम पाओगे कि वो बना ही रखा है, वैसे ही जैसे पानी पर लाठी मारी हो। तुम समुद्र पर लाठियाँ मारोगे तो क्या होगा? कुछ भी नहीं, मारते रहो वो टूटेगा नहीं। “हम वहाँ रहते हैं जहाँ हमारे घर को कोई छू नहीं सकता, खराब नहीं कर सकता।” तुम नहीं भेज पाओगे, कि जा करके इसका घर गिरा दो।
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Spirituality on Streets
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When do you call someone as Spiritual?
Is Spirituality about reading scriptures and gaining knowledge?
Or it is about practicing Meditation techniques?
Have you ever seen a Spiritual man fighting on the streets? Let’s learn the Real Essence of being Spiritual!
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Discourse by Acharya Prashant
Day and Date: Sunday, 28st August 2016.
Venue: Maharishi Ramana Kendra, 8 Institutional Area,
Near Sai Mandir, Lodhi Road, Delhi
Time: 11:00 a.m.

पक्षी, आकाश, नदी, और तुम

रविवार सुबह को बोधपूर्ण बिताने का एक बेहतरीन मौका !
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आप आमंत्रित हैं इस रविवार 15 नवम्बर, श्री प्रशांत के व्याख्यान में:

विषय: धर्म क्या है?
स्थान: महर्षि रमण केंद्र, लोधी रोड, नयी दिल्ली
समय: 9:45 am
वक्ता: श्री प्रशांत (http://www.advait.org.in/shri-prashant.html, http://hindi.prashantadvait.com/about/)
आयोजक एवं संपर्क: 09910685048

धर्म-सम्बंधित अपने प्रश्नों के समाधान के लिए ज़रूर आयें| अन्य उत्सुक जनों को भी साथ लायें, सबका स्वागत है |

स्वस्थ मन कैसा?

एक चीनी गुरु थे, वो जंगल ले गये अपने शिष्यों को| वहाँ पर कुछ खड़े हुए पेड़ थे और कुछ कटे हुए पेड़ थे|

गुरु ने अपने शिष्यों से पूछा, “बताओ ज़रा कुछ पेड़ खड़े हुए क्यों हैं और कुछ पेड़ कटे हुए क्यों हैं?”

शिष्यों ने कहा, “जो काम के थे, वो कट गये और उनका उपयोग हो गया|”

गुरु ने पूछा, “और ये जो खड़े हुए हैं, ये कौन से हैं”? शिष्य बोले, “ये वो हैं, जो किसी के काम के नहीं थे|”

गुरु बोले, “बस ठीक है, समझ जाओ|”

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