मन की शीतलता का क्या अर्थ है?

जब तक तुम अपनेआप को एक कटा हुआ हिस्सा समझोगे, दुनिया का,
तब तक तुम्हारे मन में छवि हमेशा यही बनती रहेगी कि,
जैसे दुनिया तुम्हारी दुश्मन है,
और सब तरीके से तुम पर हमला करने चली आ रही है।

जीवन से अनजाना मन मौत से बचने को आतुर रहता है

क्या आप हमेशा भयभीत रहते हैं कि आपके जीवन में कुछ गलत हो जाएगा?
भय से ज़्यादा कुछ और क्या गलत होगा।

आईये इस रविवार, उड़ान भरिये, भय के पार

अपने भय के कारणों को समझने के लिए, और इनसे निवृत्त होने के लिए,
आप सभी सादर आमंत्रित हैं,
इस रविवार, 29 नवम्बर, श्री प्रशांत के व्याख्यान में:

विषय: भयमुक्त जीवन
स्थान: महर्षि रमण केंद्र, लोधी रोड, नयी दिल्ली
समय: 9:45 a.m.
वक्ता: श्री प्रशांत (http://www.advait.org.in/shri-prashant.html, http://hindi.prashantadvait.com/about/)
आयोजक एवं संपर्क: 09910685048

सभी का स्वागत है।

इन्हें तुम ज़रूरतें कहते हो?

अपनी ज़िंदगी में से अगर तुम ऐसे दो-तीन खर्चे भी निकाल दो, तो तुम्हारी ज़िन्दगी कम पैसे में भी बड़े आराम से चलेगी|

पहला ये ख्याल कि एक आलिशान मकान होना चाहिए|
दूसरा ये कि बच्चों को बड़े-से-बड़े स्कूल में पढ़ाने के लिए खूब जोड़ कर रखना है|
और तीसरा कि बुढ़ापे के बीमारी के लिये बचाकर रखना है|

ये तीन भ्रम तुम दिमाग से निकाल दो और मुक्त जियोगे| बिल्कुल मुक्त जियोगे| जितना भी मिलेगा, बहुत मिलेगा| आराम से ख़र्चा-पानी भी चलेगा और बच भी जायेगा, उधार भी दे दोगे|

जिसने माँगा नहीं उसे मिला है

हम अपनी ही जड़ों को काटते चले हैं| हमें भय है अपने ही विस्तार से|

किसी ने कहा है कि, “हमें किसी से डर नहीं लगता, हमें अपनी ही अपार सम्भावना से डर लगता है|”

कहीं न कहीं हमें पता हैं कि हम अनंत हैं| कहीं न कहीं, हमें पता है कि क्षुद्रता हमारा स्वभाव नहीं| हम अपनेआप से ही डरते हैं, अपनी ही संभावना से बड़ा खौफ़ खाते हैं| अगर हमें हमारी संभावना हासिल हो गयी, तो होगा क्या हमारे छोटे-छोटे गमलों का? हमें उनसे बाहर आना पड़ेगा|

संचय और डर

हम क्यों इकट्ठा करना चाहते हैं, जानते हो?

हमें लगता है कोई अनहोनी घट जाएगी कल| आगे पता नहीं क्या हो तो पहले से इंतज़ाम करके रख लो|

दुनिया में और कोई भी नहीं है जो इतना डरा हुआ हो| अस्तित्व में कोई भी इतना ज़्यादा खौफ़ज़दा है ही नहीं जितना इंसान है| सब को भरोसा है; सबको एक आंतरिक भरोसा है कि “जो भी होगा चल जायेगा काम”| उन्हें सोचने की जरूरत ही नही पड़ती |

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