कुछ बच्चे इतना डरते क्यों हैं? || आचार्य प्रशांत (2018)

नुकसान व्यर्थ चीज़ नहीं होती।

नुकसान के लाभ हैं। 

नुकसान न हुआ होता, तो और बड़ा नुकसान हो जाता, इसीलिये नुकसान भली बात है।

हर नुकसान छोटा है, क्योंकि उसके आगे और बड़ा नुकसान  है।

जब भी नुकसान हो, और धन्यवाद दो।

आचार्य प्रशांत, छात्रों के संग: डर और सावधानी में क्या रिश्ता है?

तो सावधानी तो बड़ी ही सहज एवं सरल बात है।

जितने सरल और सहज रहोगे, समझ लो उतना ही सावधान भी हो।

बड़ी हल्की चीज़ है सावधानी। उसमें कुछ करना नहीं पड़ता। कोई प्रयत्न, कोई विचार, कोई आयोजन उसमें शामिल ही नहीं है।

समझ रहे हो बात को? आँखे खुली हैं, इतना काफ़ी है। ध्यान बस इतना रहे कि आँखें खुली होनी चाहिए। वास्तव में खुली होनी चाहिए। कहाँ की? आँखों की भी, और मन की भी।

सावधानी की चिंता छोड़ो, डर से बचो। डर से।

आचार्य प्रशांत, छात्रों के संग: सजगता का सस्ता विकल्प है डर

सिर्फ एक बीमार आदमी ही डर को पसंद कर सकता है। और हम सभी डर पसंद करते हैं। हम ये दावा कर सकते हैं कि हमें डर अच्छा नहीं लगता, सच ये है कि हम डर को आमंत्रित करते रहते हैं। वरना हम डरावनी फ़िल्में देखने नहीं जा सकते!

डर बीमारी है जो हमने खुद पाल रखी है। और डर पर सीधा हमला नहीं किया जा सकता। क्योंकि डर एक अधूरे जीवन की पैदाइश है। जीवन पूरा कर लो, डर अपने आप चला जाएगा। जो एक पूरा-पूरा जीवन जी रहा है, वो डर नहीं सकता। डर आता है ताकि रोमांच आ सके। जिसके जीवन में रोमांच पहले से ही है उसके जीवन में डर की कोई जगह नहीं है।

~ आचार्य प्रशांत

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निम्नलिखित माध्यमों से दुनिया के हर कोने से लोग आचार्य जी से जुड़ रहे हैं :-

१. आचार्य जी से निजी साक्षात्कार:
यह एक अभूतपूर्व अवसर है आचार्य जी से मुखातिब होकर उनसे निजी मुद्दों पर चर्चा करने का। यह सुविधा ऑनलाइन भी उपलब्ध है।
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२: अद्वैत बोध शिविर:
अद्वैत बोध शिविर आचार्य जी के सानिध्य में समय बिताने का एक अद्भुत अवसर है। इन बोध शिविरों में दुनिया भर से लोग, अपने व्यस्त जीवन से चार दिन निकालकर, प्रकृति की गोद में शास्त्रों का गहन अध्ययन करते हैं और उनसे प्राप्त शिक्षा की प्रासंगिता अपने जीवन में देख पाते हैं। ऋषिकेश, शिवपुरी, मुक्तेश्वर, जिम कॉर्बेट नेशनल पार्क, चोपटा, कैंचीधाम जैसे नैनाभिराम स्थानों पर आयोजित अनेकों बोध शिविरों में सैकड़ों लोग आच्रार्य जी के आशीर्वचनों से कृतार्थ हुए हैं।
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३. आध्यात्मिक ग्रंथों पर कोर्स:
आध्यात्मिक ग्रंथों पर कोर्स, आचार्य प्रशांत के नेतृत्व में होने वाले क्लासरूम आधारित सत्र हैं। सत्र में आचार्य जी द्वारा चुने गये दुर्लभ आध्यात्मिक ग्रंथों के गहन अध्ययन के माध्यम से साधक बोध को उपलब्ध हो पाते हैं।
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४. जागरुकता का महीना:
फाउंडेशन हर माह जीवन-सम्बन्धित एक आधारभूत विषय पर आचार्य जी के सत्रों की एक श्रृंखला आयोजित करता है। जो व्यक्ति बोध-सत्र में व्यक्तिगत रूप से मौजूद नहीं हो सकते, उन्हें फाउंडेशन की ओर से चुनिंदा सत्रों का ऑनलाइन प्रसारण उपलब्ध कराया जाता है। इस सुविधा द्वारा सभी साधक शारीरिक रूप से दूर रहकर भी, आचार्य जी के सत्रों में सम्मिलित हो पाते हैं।
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५. आचार्य जी के साथ एक दिन
‘आचार्य जी के साथ एक दिन’ एक अनूठा अवसर है जिज्ञासुओं के लिए जो, इस पहल के माध्यम से अद्वैत आश्रम – ग्रेटर नॉएडा में हर महीने, एक पूरे दिन का समय आचार्य जी के साथ व्यतीत कर पाते हैं।
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६. पार से उपहार : आचार्य जी के साथ सप्ताहंत
‘पार से उपहार’ एक सुनहरा प्रयास है आचार्य जी के सानिध्य में रहकर स्वयं को जान पाने का। इसका आयोजन प्रति माह, २ दिन और २ रातों के लिए, अद्वैत आश्रम – ग्रेटर नॉएडा में होता है।
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७. स्टूडियो कबीर
स्टूडियो कबीर एक ऐसी पहल है जो आज के प्रचलित संस्कृति में आदिकाल से पूजनीय संतों व ग्रंथों द्वारा प्रतिपादित बोध का पठन-पाठन एक संगीतमय तरीके से करती है। आम जनमानस में संतों व ग्रंथों के गीतों की लोकप्रियता बढ़ सके, इसके लिए स्टूडियो कबीर उन गीतों को याद करवाने का और सुंदर गीतों के माध्यम से प्रस्तुत करने के अथक प्रयास में संलग्न है।
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८. फ्री-हार्ट्स शिविर: एक नयी दृष्टि में अध्यात्म
यह शिविर हर उस व्यक्ति के लिए है जो दिल से युवा हैं। इस शिविर के अंतर्गत आपसी सौहार्द्य और मैत्री का वर्धन, मनोवैज्ञानिक तथ्यों से रूबरू होना, जीवन की ग्रंथियों को सुलझाना, ध्यान की अभिनव विधियों का प्रयोग करना, नृत्य, गायन, कला-प्रदर्शन करना आदि शामिल है।
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९. त्रियोग:
त्रियोग हठ-योग, भक्ति-योग और ज्ञान-योग का अभूतपूर्व सम्मिश्रण है, जिसमें सम्पूर्ण स्वास्थ्य और सर्वांगीण विकास की प्राप्ति हेतु २ घंटे के योग-सत्र का अनूठा आयोजन किया जाता है।
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१०. बोध-पुस्तक
जीवन के महत्वपूर्ण विषयों पर आचार्य जी के व्यक्तव्यों का बेहतरीन संकलन हिंदी व अंग्रेजी भाषा में पुस्तकों के रूप में अमेज़न और फ्लिपकार्ट पर उपलब्ध हैं:

अमेज़न: http://tinyurl.com/Acharya-Prashant

फ्लिपकार्ट: http://tinyurl.com/AcharyaBooks

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वो काठ के योद्धा होते हैं जिन्हें डर नहीं लगता || आचार्य प्रशांत, छात्रों के संग (2014)

डर उठेगा; लेकिन तुम्हें यह फैसला करना है कि डर के आगे घुटने टेक देने हैं या कहना है डर तू बड़ा है, पर तुझसे कही ज़्यादा महत्वपूर्ण कुछ और है, मैं तेरे कारण रुक नहीं सकता।

अगला कदम कहाँ रखें यह साफ-साफ दिख नहीं रहा आपको, कोहरा है, अस्पष्टता है, कुछ पता नहीं चल रहा कि अगला कदम क्या लें, खतरा भी है, गिर सकते हैं, पता नहीं कहाँ कदम रख दिया। लेकिन हम वो खतरा उठायेंगे, हम आगे बढ़ेंगे, गिरने की संभावना है हम तब भी आगे बढ़ेंगे, हो सकता है गिर भी जाएं, गिर जाएंगे तो उठेंगे, फिर भी आगे बढ़ेंगे। और जब ऐसे कर-कर के आगे बढ़ते रहते हो तो फिर धीरे-धीरे मन समझ जाता है कि डर में कुछ रखा नहीं है।

संकोच माने क्या? || आचार्य प्रशांत, छात्रों के संग (2013)

संकोच का उल्टा अर्थ मत निकाल लेना। कोई संकोच नहीं करता इसका अर्थ यह नहीं है कि वो पूरा मनमौजी हो गया है, निरंकुश हो गया है। ‘संकोच नहीं है’ इसकी एक ही जायज़ वजह हो सकती है — स्पष्टता।

स्पष्टता में अगर शांत भी बैठे हो तो बढ़िया। हम संकोच न होने का आमतौर पर यह अर्थ निकालते हैं कि यह बिंदास है, कुछ भी जाकर बोल आता है। यह अधूरी बात है, आधी बात है। जो संकोच नहीं करता वो चुप रहने में भी संकोच नहीं करता — यह पूरी बात हुई। वो बोलने में भी संकोच नहीं करता और चुप रहने में भी। तो कभी तुम चुप रह जाओ तो अपनेआप को अपराधी मत समझ लेना। मौन बड़ी बात है और कई बार शब्दों से ज़्यादा कीमती होता है मौन।

आचार्य प्रशांत, छात्रों के संग: डर की वजह क्या है?

जो कुछ भी ऐसा पाओ, जो तुम्हें सीमित करता है, तुम्हें छोटा करता है, तुम्हें डराता है, तुरंत उसको छोड़ दो, तुरंत त्याग दो, यही मुक्ति है।

सिर्फ इसलिए कि बहुत सारे लोगों ने, बहुत समय तक, कुछ कहा है, वो बात ठीक नहीं हो जाती। उसको जाँचो, उसको परखो, उसको अपनी मुक्त दृष्टि से देखो। सिर्फ इसलिए, कि परंपरा, समाज, एक प्रकार से चलते रहे हैं, वो बात ठीक नहीं हो जाती। बल्कि, ज़्यादा सम्भावना इसी बात की है, कि बहुत सारे लोग यदि कुछ कर रहे हैं तो वो बात मूर्खता की ही होगी।

~ आचार्य प्रशांत

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१. आचार्य जी से निजी साक्षात्कार:
यह एक अभूतपूर्व अवसर है आचार्य जी से मुखातिब होकर उनसे निजी मुद्दों पर चर्चा करने का। यह सुविधा ऑनलाइन भी उपलब्ध है।
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२: अद्वैत बोध शिविर:
अद्वैत बोध शिविर आचार्य जी के सानिध्य में समय बिताने का एक अद्भुत अवसर है। इन बोध शिविरों में दुनिया भर से लोग, अपने व्यस्त जीवन से चार दिन निकालकर, प्रकृति की गोद में शास्त्रों का गहन अध्ययन करते हैं और उनसे प्राप्त शिक्षा की प्रासंगिता अपने जीवन में देख पाते हैं। ऋषिकेश, शिवपुरी, मुक्तेश्वर, जिम कॉर्बेट नेशनल पार्क, चोपटा, कैंचीधाम जैसे नैनाभिराम स्थानों पर आयोजित अनेकों बोध शिविरों में सैकड़ों लोग आच्रार्य जी के आशीर्वचनों से कृतार्थ हुए हैं।
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३. आध्यात्मिक ग्रंथों पर कोर्स:
आध्यात्मिक ग्रंथों पर कोर्स, आचार्य प्रशांत के नेतृत्व में होने वाले क्लासरूम आधारित सत्र हैं। सत्र में आचार्य जी द्वारा चुने गये दुर्लभ आध्यात्मिक ग्रंथों के गहन अध्ययन के माध्यम से साधक बोध को उपलब्ध हो पाते हैं।
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४. जागरुकता का महीना:
फाउंडेशन हर माह जीवन-सम्बन्धित एक आधारभूत विषय पर आचार्य जी के सत्रों की एक श्रृंखला आयोजित करता है। जो व्यक्ति बोध-सत्र में व्यक्तिगत रूप से मौजूद नहीं हो सकते, उन्हें फाउंडेशन की ओर से चुनिंदा सत्रों का ऑनलाइन प्रसारण उपलब्ध कराया जाता है। इस सुविधा द्वारा सभी साधक शारीरिक रूप से दूर रहकर भी, आचार्य जी के सत्रों में सम्मिलित हो पाते हैं।
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५. आचार्य जी के साथ एक दिन
‘आचार्य जी के साथ एक दिन’ एक अनूठा अवसर है जिज्ञासुओं के लिए जो, इस पहल के माध्यम से अद्वैत आश्रम – ग्रेटर नॉएडा में हर महीने, एक पूरे दिन का समय आचार्य जी के साथ व्यतीत कर पाते हैं।
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६. पार से उपहार : आचार्य जी के साथ सप्ताहंत
‘पार से उपहार’ एक सुनहरा प्रयास है आचार्य जी के सानिध्य में रहकर स्वयं को जान पाने का। इसका आयोजन प्रति माह, २ दिन और २ रातों के लिए, अद्वैत आश्रम – ग्रेटर नॉएडा में होता है।
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७. स्टूडियो कबीर
स्टूडियो कबीर एक ऐसी पहल है जो आज के प्रचलित संस्कृति में आदिकाल से पूजनीय संतों व ग्रंथों द्वारा प्रतिपादित बोध का पठन-पाठन एक संगीतमय तरीके से करती है। आम जनमानस में संतों व ग्रंथों के गीतों की लोकप्रियता बढ़ सके, इसके लिए स्टूडियो कबीर उन गीतों को याद करवाने का और सुंदर गीतों के माध्यम से प्रस्तुत करने के अथक प्रयास में संलग्न है।
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८. फ्री-हार्ट्स शिविर: एक नयी दृष्टि में अध्यात्म
यह शिविर हर उस व्यक्ति के लिए है जो दिल से युवा हैं। इस शिविर के अंतर्गत आपसी सौहार्द्य और मैत्री का वर्धन, मनोवैज्ञानिक तथ्यों से रूबरू होना, जीवन की ग्रंथियों को सुलझाना, ध्यान की अभिनव विधियों का प्रयोग करना, नृत्य, गायन, कला-प्रदर्शन करना आदि शामिल है।
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९. त्रियोग:
त्रियोग हठ-योग, भक्ति-योग और ज्ञान-योग का अभूतपूर्व सम्मिश्रण है, जिसमें सम्पूर्ण स्वास्थ्य और सर्वांगीण विकास की प्राप्ति हेतु २ घंटे के योग-सत्र का अनूठा आयोजन किया जाता है।
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१०. बोध-पुस्तक
जीवन के महत्वपूर्ण विषयों पर आचार्य जी के व्यक्तव्यों का बेहतरीन संकलन हिंदी व अंग्रेजी भाषा में पुस्तकों के रूप में अमेज़न और फ्लिपकार्ट पर उपलब्ध हैं:

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