दौड़ने से पहले, देखो !

प्रश्न: सर, जीवन में लक्ष्य होने चाहिए या नहीं? वक्ता: ‘लक्ष्य’, ‘महत्वकांक्षा’, ‘रुचि’, ये सारे शब्द एक ही श्रेणी से सम्बंधित हैं। एक ही वर्ग

मंदिर-जहाँ का शब्द मौन में ले जाये

प्रश्न: ‘अनहता सबद बाजंत भेरी’, कृपया इसका अर्थ बताएँ? वक्ता: मंदिर से जो घंटे, घड़ियाल, ढोल, नगाड़े की आवाज़ आ रही है; वो ‘अनहद’ शब्द है | घंटा जैसे बजता

कर्त्तव्य सज़ा है नासमझी की

कर्त्तव्य संसारो न तां पश्यन्ति सूरयः । शून्याकारो निराकारा निर्विकारा निरामयाः ॥ (अष्टावक्र गीता अध्याय १८, श्लोक ५७) वक्ता: ‘सेंस ऑफ़ ड्यूटी’, कर्त्तव्यों के बारे में बात

तुम्हारी असली ताक़त और कमजोरी

असली ताक़त या कमज़ोरी का आधार जानना, प्रेम, आनंद और मुक्ति है| इनको भुला देना कमज़ोरी और इनके साथ जीना ताक़त है| इसके अलावा कोई ताक़त या कमज़ोरी नहीं होती|

तुम्हें स्वयं ही खोजना पड़ेगा

शिक्षक दो तरीके के होते हैं, एक जो जानकारी देते हैं, जानकारी सदा बाहर से आयेगी, और दूसरे वो जो तुमसे कहते हैं कि खुद खोजो। जहाँ तक निम्नतर शिक्षा का सवाल है, शिक्षक तुम्हें जानकारी दे सकता है कि ए.सी. कैसे चलता है, कैमरा कैसे चलता है, वो सब जानकारी बाहर से आ जायेगी। पर जब जीवन शिक्षा की बात हो रही है, तो गुरु तुम से यही कह सकता है कि बेटा, खुद तलाशो।

आँखें फिर से खोलना

वक्ता: यह प्रसंग गीता के दूसरे अध्याय के अंतर्गत दिया है| अर्जुन ने योगभ्रष्ट के बारे में पूछा है| योगभ्रष्ट कौन है, उसके विषय में अर्जुन ने खुद ही

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