जहाँ लालच वहाँ गुलामी

हम जो बार-बार अपनी असमर्थता का रोना रोते हैं, वह कुछ नहीं है, हम एक बड़ा दोहरा खेल खेलना चाहते हैं।

हम कहते हैं, हमारा लालच भी बरकरार रहे और हम गुलाम भी न बनें। यह अब नियमों के विपरीत बात कर रहे हैं आप। आप चाहते हैं आपका लालच भी बरकरार रहे और आपको गुलाम भी न बनना पड़े।

जहाँ लालच है, वहाँ गुलामी है।

जिसको गुलामी छोडनी है, उसे लालच छोड़ना होगा। अगर आप बार-बार पा रहे हैं कि आप गुलाम बन जा रहे हैं, तो देखिए कि क्या-क्या लालच है, उस लालच को हटा दीजिए और गुलामी को हटा दिया आपने।

दूसरों को सिद्ध करने की ज़रुरत क्यों?

हार्दिक आमंत्रण आपको श्री प्रशांत के साथ २२वें अद्वैत बोध शिविर का|

मुक्तेश्वर के पर्वतों में गहन आध्यात्मिक आनंद का अनुभव करें|
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आवेदन आमंत्रित हैं:

अद्वैत बोध शिविर
श्री प्रशांत के साथ

(9 से 13 नवंबर, ’15)
मुक्तेश्वर, उत्तराँचल

मेल लिखें: bodh.camp@advait.org.in
जानकारी हेतु: रोहित राज़दान @ 9910685048

आनंद क्या है?

आनंद मन की वो स्थिति है, जिसमें वो अपनी ही मौज में है। ऐसा नहीं है कि उसे दुनिया से कुछ लेना-देना नहीं है। वो दुनिया में काम कर रहा है, दुनिया में रह रहा है, दुनिया में परिणाम भी आ रहे हैं, पर वो उन परिणामों को बहुत गंभीरता से नहीं ले रहा है। वो उन परिणामों को मन में गहरे नहीं उतर जाने दे रहा। वो कह रहा है, “परिणाम हैं, ठीक है। जीते, बहुत बढ़िया बात। हारे, तो भी ठीक”।

परिपक्वता क्या है?

प्रश्न: सर, परिपक्वता क्या है? वक्ता: (१८-२२ वर्ष की आयु के विद्यार्थियों की सभा को संबोधित करते हुए) यह शब्द ‘परिपक्वता’ हम सभी को अपने लिए महत्वपूर्ण

असली जीना माने क्या?

प्रश्न : पंचदशी में वर्णन किया गया है कि इन्द्रियों द्वारा जिन विषयों का ज्ञान होता है उन विषयों की उपेक्षा और अनादर कर देने

 तुम ही सुख दुःख हो

जिसकी सुरती जहाँ रहे, तिसका तहाँ विश्राम भावै माया मोह में, भावै आतम राम – संत दादू दयाल वक्ता : क्या कहते हैं कबीर भी?

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