सम्मान और ज़िम्मेदारी माने क्या?

पति बोलते हैं पत्नियां बड़ा डोमिनेट कर लेती हैं। कोई पत्नी तुम्हें डोमिनेट कर सकती है, तुम्हारे मन में अगर उसकी बॉडी का लालच न हो तो? तुम उसकी बॉडी के पीछे भागते हो, उसी के कारण वो तुमको नाच नचा देती है! और कोई हथियार नहीं है उसके पास। बस यही हथियार है कि तुम्हारे मन में लालच है कि किसी तरह इसका शरीर मिल जाये। और वो इतना नचाएगी तुमको, इतना नचाएगी कि मर जाओगे! उसको तुम्हारे पैसे का लालच है, तुम्हें उसके शरीर का लालच है। दोनों एक दूसरे को नचा रहे हो, फिर दोनों रोते हो! घर-घर की यही तो कहानी है, और क्या चल रहा है? मरी से मरी औरत समर्थ से समर्थ आदमी पर राज करती है!
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आचार्य प्रशांत के नेतृत्व में 31वें अद्वैत बोध शिविर का आयोजन किया जाने वाला है।
आचार्य जी के सानिध्य में रहने का और दुनियाभर के दुर्लभ शास्त्रों के इस अनूठे अवसर को न जाने दें।

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संपर्क करें: श्री अंशु शर्मा: +91 – 8376055661
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आचार्य प्रशांत द्वारा दिए गये बहुमूल्य व्याख्यान इन पुस्तकों में मौजूद हैं:

अमेज़न: http://tinyurl.com/Acharya-Prashant
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तुम ही साधु, तुम ही शैतान

आदमी का जीवन इन्हीं दोनों के बीच की कशमकश है। आपके भीतर एक साधु बैठा है, आपके भीतर एक साँप बैठा है; साधु आपको एक दिशा खींचता है, साँप आपको दूसरी दिशा खींचता है और इन्हीं दोनों के मध्य आपका जीवन चलता रहता है। कबीर कह रहें हैं: साधु को बल दो। तुम साधु के साथ खड़े हो जाओ। याद रखना! भले घर्षण इन दोनों के मध्य हो पर इनमें से जीतेगा कौन, इसके निर्धारक तुम हो। तुम साधु के साथ खड़े रहोगे, साधु को बल मिलेगा। तुम साँप के साथ खड़े रहोगे, साँप को बल मिलेगा क्योंकि हैं तो दोनों तुम्हारे ही ना। तुम्हारे ही हैं, तो तुम्हरा होना ही तय करेगा कि दोनों में से जीतता कौन है। दोनों तुमसे बाहर के तो नहीं है, तुम्हारे ही है। तुम्हीं तय करोगे कि दोनों में जीतता कौन है।
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माफ़ करने का क्या अर्थ है?

बेहोशी का तो एक ही प्रायश्चित है, क्या? ‘होश।’ वास्तविक क्षमा का अर्थ यह है कि “मैं तेरी कही हुई बात को, या फिर तेरे करे हुए कुकर्म को, गंभीरता से ले ही नहीं रहा।” क्षमा का अर्थ तो यह हो गया, जो आम तौर पर हम ले लेते हैं कि, “तूने जो करा, उससे मुझे चोट लगी। जा तुझे माफ़ करता हूँ। तूने मुझे चोट दी। मैं तुझे माफ़ करता हूँ।” ना। समझदार आदमी कहता है कि ‘तूने मुझे चोट दी ही नहीं।’ यह हुई वास्तविक क्षमा।
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हिमालय की गोद में 30वें अद्वैत बोध शिविर का आयोजन किया जाने वाला है।
आचार्य प्रशांत के सानिध्य में रहने का और दुनिया भर के दुर्लभ ग्रंथों के अध्ययन के इस सुनहरे अवसर को न गवाएं।

तिथि: 24-27 मार्च
स्थान: टाइगर ग्रूव रिसोर्ट, जिम कॉर्बेट नेशनल पार्क रामनगर(उत्तराखंड)

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श्री अंशु शर्मा: +91 – 8376055661
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अभिभावकों से स्वस्थ सम्बन्ध

प्रेम ये नहीं होता कि तुम अपनी मानसिकता कि कोठरी में कैद हो और हम उसी में कैद रहने देंगे। प्रेम कहता है कि भले हमारे-तुम्हारे संबंधों में तनाव आ जाए लेकिन मैं तुम्हें भी मुक्त करके रहूँगा क्योंकि मैंने मुक्ति जानी है और मुक्ति बड़ी आनंदपूर्ण है। तो भले तुम्हें बुरा लगे, फिर भी मैं तुम्हारी साहयता करूँगा। एक-दुसरे को बंधन में डालने का नाम थोड़े ही प्रेम है।

~ आचार्य प्रशांत
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जानकर यदि भूल गये तो कभी जाना ही नहीं

सौ साल भक्ति कर के यदि कोई फिसलता है, तो पक्का है कि भक्ति झूठी थी, इसी कारण फिसले। पर अगर कोई सौ साल नरक जैसा जीवन जी करके, एक दिन अचानक जग जाता है, तो ये मत समझ लेना कि जग इसलिए गया क्योंकी वो नरक जैसा जीवन जीया।

‘फिसलने’ के कारण होते हैं, ‘उठना’ कृपा होती है। कारण और कृपा में भेद करना सीख लो। ‘नरक’ के कारण होते हैं, ‘स्वर्ग’ कृपा होती है।
तो सौ साल भक्ति करके, अगर फिसल गए हो, तो कार्य कारण का सम्बन्ध चलेगा। तुम्हारा फिसलना इस बात का सबूत है कि पिछले सौ साल भी झूठे थे।
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भक्ति योग एवं पुरुषोत्तम योग आचार्य प्रशांत के साथ
6 मार्च से आरम्भ
आवेदन भेजने हेतु: requests@prashantadvait.com पर ईमेल करें
या संपर्क करें: +91-9818591240
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मुझे क्या पाने की ज़रूरत है?

‘जिनको कुछ ना चाहिए’ का मतलब ये नहीं है की इच्छाएं कहीं मर गई। उनका मतलब ही यही है कि इच्छाएं आती-जाती रहेंगी। सारी इच्छाएं जिसको पाने के लिए है, हम उसको जान गए हैं। आपकी कोई भी इच्छा है — आपने कहा ना ख़ुशी के लिए है — हम उस ख़ुशी को जान गए हैं।
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भक्ति योग एवं पुरुषोत्तम योग आचार्य प्रशांत के साथ
6 मार्च से आरम्भ
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अपार मेहरोत्रा: 91-9818591240
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