नए साल को कैसे मनायें?

जब ‘कर्तव्य’ सिर्फ़ नैतिकता के उद्देश्यों से आता है, तो वो ‘कोरा-कर्तव्य’ कहलाता है ।

‘कर्तव्य’ जब ‘आत्मा’ से प्रस्फुटित होता है तो उसी का नाम ‘धर्म’ होता है ।

~ आचार्य प्रशांत

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निम्नलिखित माध्यमों से दुनिया के हर कोने से लोग आचार्य जी से जुड़ रहे हैं:-

१. आचार्य जी से निजी साक्षात्कार:
यह एक अभूतपूर्व अवसर है आचार्य जी से मुखातिब होकर उनसे निजी मुद्दों पर चर्चा करने का। यह सुविधा ऑनलाइन भी उपलब्ध है।
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२: अद्वैत बोध शिविर:
अद्वैत बोध शिविर आचार्य जी के सानिध्य में समय बिताने का एक अद्भुत अवसर है। इन बोध शिविरों में दुनिया भर से लोग, अपने व्यस्त जीवन से चार दिन निकालकर, प्रकृति की गोद में शास्त्रों का गहन अध्ययन करते हैं और उनसे प्राप्त शिक्षा की प्रासंगिता अपने जीवन में देख पाते हैं। ऋषिकेश, शिवपुरी, मुक्तेश्वर, जिम कॉर्बेट नेशनल पार्क, चोपटा, कैंचीधाम जैसे नैनाभिराम स्थानों पर आयोजित अनेकों बोध शिविरों में सैकड़ों लोग आच्रार्य जी के आशीर्वचनों से कृतार्थ हुए हैं।
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३. आध्यात्मिक ग्रंथों पर कोर्स:
आध्यात्मिक ग्रंथों पर कोर्स, आचार्य प्रशांत के नेतृत्व में होने वाले क्लासरूम आधारित सत्र हैं। सत्र में आचार्य जी द्वारा चुने गये दुर्लभ आध्यात्मिक ग्रंथों के गहन अध्ययन के माध्यम से साधक बोध को उपलब्ध हो पाते हैं।
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४. जागरुकता का महीना:
फाउंडेशन हर माह जीवन-सम्बन्धित एक आधारभूत विषय पर आचार्य जी के सत्रों की एक श्रृंखला आयोजित करता है। जो व्यक्ति बोध-सत्र में व्यक्तिगत रूप से मौजूद नहीं हो सकते, उन्हें फाउंडेशन की ओर से चुनिंदा सत्रों का ऑनलाइन प्रसारण उपलब्ध कराया जाता है। इस सुविधा द्वारा सभी साधक शारीरिक रूप से दूर रहकर भी, आचार्य जी के सत्रों में सम्मिलित हो पाते हैं।
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५. आचार्य जी के साथ एक दिन
‘आचार्य जी के साथ एक दिन’ एक अनूठा अवसर है जिज्ञासुओं के लिए जो, इस पहल के माध्यम से अद्वैत आश्रम – ग्रेटर नॉएडा में हर महीने, एक पूरे दिन का समय आचार्य जी के साथ व्यतीत कर पाते हैं।
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६. पार से उपहार : आचार्य जी के साथ सप्ताहंत
‘पार से उपहार’ एक सुनहरा प्रयास है आचार्य जी के सानिध्य में रहकर स्वयं को जान पाने का। इसका आयोजन प्रति माह, २ दिन और २ रातों के लिए, अद्वैत आश्रम – ग्रेटर नॉएडा में होता है।
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७. स्टूडियो कबीर
स्टूडियो कबीर एक ऐसी पहल है जो आज के प्रचलित संस्कृति में आदिकाल से पूजनीय संतों व ग्रंथों द्वारा प्रतिपादित बोध का पठन-पाठन एक संगीतमय तरीके से करती है। आम जनमानस में संतों व ग्रंथों के गीतों की लोकप्रियता बढ़ सके, इसके लिए स्टूडियो कबीर उन गीतों को याद करवाने का और सुंदर गीतों के माध्यम से प्रस्तुत करने के अथक प्रयास में संलग्न है।
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८. फ्री-हार्ट्स शिविर: एक नयी दृष्टि में अध्यात्म
यह शिविर हर उस व्यक्ति के लिए है जो दिल से युवा हैं। इस शिविर के अंतर्गत आपसी सौहार्द्य और मैत्री का वर्धन, मनोवैज्ञानिक तथ्यों से रूबरू होना, जीवन की ग्रंथियों को सुलझाना, ध्यान की अभिनव विधियों का प्रयोग करना, नृत्य, गायन, कला-प्रदर्शन करना आदि शामिल है।
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९. त्रियोग:
त्रियोग हठ-योग, भक्ति-योग और ज्ञान-योग का अभूतपूर्व सम्मिश्रण है, जिसमें सम्पूर्ण स्वास्थ्य और सर्वांगीण विकास की प्राप्ति हेतु २ घंटे के योग-सत्र का अनूठा आयोजन किया जाता है।
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१०. बोध-पुस्तक
जीवन के महत्वपूर्ण विषयों पर आचार्य जी के व्यक्तव्यों का बेहतरीन संकलन हिंदी व अंग्रेजी भाषा में पुस्तकों के रूप में अमेज़न और फ्लिपकार्ट पर उपलब्ध हैं:

अमेज़न: http://tinyurl.com/Acharya-Prashant

फ्लिपकार्ट: http://tinyurl.com/AcharyaBooks

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इन सुन्दरतम व अनोखी पहलों में भाग लेने के लिए, अपने आवेदन requests@prashantadvait.comपर भेजें, या श्री कुन्दन सिंह से संपर्क करें: +91-9999102998

आत्म-जिज्ञासा क्या है?

ऐसे समझ लीजिए कि एक बिलकुल ही उद्धमी लड़का है और वो खूब तोड़-फोड़ कर रहा है। मैदान में है, गेंद फेंक रहा है पेड़, पौधे, पत्ते इन सब को नष्ट कर रहा है, परेशान कर रहा है। एक तरीका हो सकता है उसको देखने का कि आपने ये देखा कि वो क्या-क्या कर रहा है। आप देख रहे हैं कि वो अभी दाएँ गया, अभी बाएँ और आप दुनिया भर की चीज़ें गिन रहे हो। आप यह देख रहे हो कि यह जो कुछ कर रहा है उसमें मेरा कितना नुकसान हो रहा है। आप विधियाँ खोज रहे हो कि इसको कैसे काबू में लाना है। आप याद करने की कोशिश कर रहे हो कि और लोग इसको कैसे काबू में ले कर के आए थे और एक दूसरा तरीका ये हो सकता है कि आप कुछ भी नहीं देख रहे हो कि क्या चल रहा है आप बस ये देख रहे हो कि ये बच्चा है । उसके आस-पास क्या हो रहा है, वो किन वस्तुओं से सम्बन्धित है। आपकी उस पर कोई नज़र नहीं है क्योंकि उन वस्तुओं से वो बच्चा ही सम्बन्धित है ना! आपकी नज़र मात्र उस बच्चे पर है और आप उसको देखते हुए कहीं नहीं जा रहे हो स्मृतियों में, ये पता करने कि कल इसने क्या किया था?
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आचार्य प्रशांत द्वारा दिए गये बहुमूल्य व्याख्यान इन पुस्तकों में मौजूद हैं:

अमेज़न : http://tinyurl.com/Acharya-Prashant
फ्लिप्कार्ट: https://goo.gl/fS0zHf

बोध में स्मृति का क्या स्थान है?

जैसे अनंत विस्तार का कोई केंद्र नहीं हो सकता न। कुछ सीमित है, तो उसका केंद्र बना सकते हो। अनंतता का, इन्फिनिटी का कोई केंद्र नहीं हो सकता। तो यह संभव है कि मन रहे पर मन का कोई केंद्र न रहे। यह बिलकुल संभव है। तब स्मृतियाँ रहेंगी, यादें रहेंगी पर कोई केंद्र नहीं होगा जहाँ से याद कर रहे हो।
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आप सभी आमंत्रित हैं:

‘स्पिरिचुअल हीलिंग’ पर आचार्य प्रशांत द्वारा शब्द योग सत्र में।

दिनांक: बुधवार, 26.10.2016

समय: 6:30 p.m से

स्थान: तीसरी मंजिल,G-39, सेक्टर-63 , नॉएडा
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आचार्य प्रशांत द्वारा दिए गये बहुमूल्य व्याख्यान इन पुस्तकों में मौजूद हैं:

https://prashantadvait.com/books-in-hindi/

इश्क है बेपरवाही

प्रेम तुम्हारी एक आंतरिक स्थिति है। जिसमें तुम आनंदित हो।

मस्त, बेपरवाह, बेफ़िक्र – बस वही प्रेम है।

उसके लिए ज़रूरी नहीं है कि कोई और भी हो सामने।

प्रेम तुम्हारी आंतरिक अवस्था है।

यही प्रेम है।
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श्री प्रशांत ‘मिथक भंजन यात्रा’ का दूसरा चरण धर्मशाला, हिमाचल प्रदेश में आरम्भ कर रहे हैं।

25 अप्रैल से।

कृपया अपनी जगह आरक्षित कर लें।

जो तुम्हारे विचार हैं वही तुम हो

एक रेपिटीशन ऐसा भी हो सकता है जिसमें मैं सतर्क हो कर, जागरूक होकर
अपने ही जालों को काटने की कोशिश कर रहा हूँ।
वो कोशिश भी निरंतर है, इसी कारण रेपिटिटिव (पुनरावृत्ति) लगती है।

ठीक वैसे ही जैसे कोई रोज़ सफाई कर, तो सफ़ाई रेपिटिशन है,
पर वो सफ़ाई भी रोज़ चाहिए क्योंकि धूल भी रोज़ जम रही है।
और वो अंधी सफ़ाई नहीं है, कि अँधा होकर झाड़ू लेकर कुछ इधर-उधर कर दिया।

जहाँ गन्दा है, वहाँ साफ़ कर रहे हैं। उस सफ़ाई में एक चेतना है, जानने का भाव है।
तो देखने में वो रेपिटिशन ही लगेगा, पर है नहीं, कुछ और ही चल रहा है।
दिखने में एक-सी ही बात लगेगी, पर है नहीं।

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