सही कर्म कौन सा?

ये मत पूछो कि, ‘ मुझे कैसे पता कि मेरा एक्शन पूर्णतया सही है या नहीं?’ ज़्यादा ईमानदारी की बात यह है कि, ‘मुझे जो चीज़ पता है कि सही है, मैं वो भी कर पा रहा हूँ या नहीं?’ ग़लती यह नहीं है कि कोई पूर्णतया सही कर्म था और वो तुम नहीं कर पाए; ग़लती यह थी कि जो तुम को पता था कि सही है, तुममें वो करने की भी हिम्मत नहीं थी| लोग आमतौर पर यह पूछते हैं कि, ‘हम कैसे पता करें कि ‘‘सही कर्म’ क्या है?’’’ मैं कहता हूँ कि सवाल हटाओ!
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25वां अद्वैत बोध शिविर आचार्य प्रशांत के साथ आयोजित किया जाने वाला है।

दिनांक: 16 से 19 अक्टूबर

स्थान: मुक्तेश्वर, उत्तराखंड

आवेदन हेतु requests@prashantadvait.com पर ई-मेल भेजें।
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आचार्य प्रशांत द्वारा दिए गये बहुमूल्य व्याख्यान इन पुस्तकों में मौजूद हैं:

https://prashantadvait.com/books-in-hindi/

सत्य किसको चुनता है?

उसने तुम्हें गाड़ी दे दी है और उसने तुम्हें यह भी ताकत दे दी है कि दारू पी कर भी चला सकते हो और होश में भी चला सकते हो। तुम तंग हो कर दारू पियो जब गाड़ी चला रहे हो, तो ठीक है, तुम्हारी मर्ज़ी है!

वो सभी को वयस्क रूप में देखता है।
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श्री प्रशांत ‘मिथक भंजन यात्रा’ का दूसरा चरण धर्मशाला, हिमाचल प्रदेश में आरम्भ कर रहे हैं।

25 अप्रैल से।

कृपया अपनी जगह आरक्षित कर लें।

जहाँ लालच वहाँ गुलामी

हम जो बार-बार अपनी असमर्थता का रोना रोते हैं, वह कुछ नहीं है, हम एक बड़ा दोहरा खेल खेलना चाहते हैं।

हम कहते हैं, हमारा लालच भी बरकरार रहे और हम गुलाम भी न बनें। यह अब नियमों के विपरीत बात कर रहे हैं आप। आप चाहते हैं आपका लालच भी बरकरार रहे और आपको गुलाम भी न बनना पड़े।

जहाँ लालच है, वहाँ गुलामी है।

जिसको गुलामी छोडनी है, उसे लालच छोड़ना होगा। अगर आप बार-बार पा रहे हैं कि आप गुलाम बन जा रहे हैं, तो देखिए कि क्या-क्या लालच है, उस लालच को हटा दीजिए और गुलामी को हटा दिया आपने।

फ़ायदे का फ़ायदा क्या?

फ़ायदे का फ़ायदा क्या है?

तुम बचपन से ही तो फ़ायदे की तलाश में नहीं थे| तुम्हें ये किसने सिखाया कि फ़ायदा बड़ी बेहतरीन चीज़ है|

फँस गये?

जो ये फ़ायदा तुम खोज रहे हो, तुम्हें कैसे पता कि फ़ायदे का कुछ फ़ायदा होता है?

ये तुमने बस सुन लिया है| तुम्हारे चारों ओर एक समाज है जो फ़ायदे के पीछे भाग रहा है| घर में भी तुमने यही देखा है, तो तुम्हें लगता है कि फ़ायदा कोई बहुत अच्छी बात होगी|

तुम्हें कैसे पता कि फ़ायदा फ़ायदेमंद है?

मन के मूड़े देखि करि, ता संग लीजै औट

मन ऐसा न रखो कि वह लगातार कहीं पहुँचने की इच्छा रखता हो,
जिसके भीतर महत्वकांक्षाएँ भरी हुई हों।

जिस पर जब इधर-उधर से आक्रमण होते हों,
विषयों के, वासनाओं के, इच्छाओं, कामनाओं के, दृश्यों के, ध्वनियों के,
तो वो जो जल्दी से बहक जाता हो।

निम्न विचार और उच्च विचार क्या?

प्रश्न: निम्न विचार और उच्च विचार क्या हैं? वक्ता: हम में से कितने लोगों को ये सवाल अपने सन्दर्भ में उचित लग रहा है? कितने लोगों

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