29 वां अद्वैत बोध शिविर: भक्तियोग एवं प्रेमयोग की रसधार

29वां अद्वैत बोध शिविर

एक सुनहरा अवसर आचार्य प्रशांत के सानिध्य में रहने का और विश्व के अलग-अलग कोने से दुर्लभ ग्रंथों का अध्ययन करने का।

तिथि: 24 से 27 फ़रवरी

स्थान: वी.एन.ए रिसोर्ट, ऋषिकेश

इस अद्भुत अवसर को न गवाएँ

आवेदन भेजने हेतु ई-मेल करें: requests@prashantadvait.com

अन्य जानकारी हेतु संपर्क करें:

श्री अंशु शर्मा: +91 8376055661

श्री कुंदन सिंह: +9999102998

मैं इतनी चिंता क्यों करता हूँ?

उसकी आशनाई सब के लिए नहीं है। जो दोनों ओर से मारे जाने को तैयार हों, वही कदम बढाएं।

पहली समस्या भीतर-भीतर होगी, तुम्हारे लक्ष्य बदलेंगे, तुम्हारा होना बदलेगा, तुम्हारे विचार बदलेंगे, पसंदें बदलेंगी, ज़रूरतें बदलेंगी, उपलब्धियों का ख्याल बदलेगा; और दूसरा बदलाव बाहर होगा, दुनिया वालों के साथ रिश्ते-नाते बदलेंगे। लोगों का देखने का तरीका बदलेगा। और दोनों ही तरफ़ उलझन है, क्योंकि बहुत लम्बा समय तुम यूँ ही जीए हो, ऐसे ही, एक तरीके से। वो तरीका झूठा था, पर चला लम्बा है। अब जब सच सामने आता है तो उसके सामने एक लम्बा फैला हुआ विस्तृत झूठ है। और झूठ जितना लम्बा-चौड़ा हो गया होता है, उसमें तुम्हारे दांव उतने ही ऊँचे हो गए होते हैं। तुम्हारे स्वार्थ उसमें उतने ही गहरा गए होते हैं, तुमने उसमें गहरे निवेश कर दिए होते हैं, निवेश।

तुम बीस-साल से एक रिश्ते को खाद और पानी डालते आ रहे थे, आज तुमको दिखाई दिया, उसमें जड़ ही नहीं थीं। तुम बीस-साल से एक ऐसे पौधे को सींच रहे थे जो बिना मूल का है, तुम्हारा निवेश है। बीस-साल तुमने उसमें लगाये हैं। दिक्कत तो होगी, डर तो लगेगा। तुम कहोगे: जो दिखता है, नकली ही दिखता है।

अपने रास्ते की बाधा तुम खुद हो

जबकी जीवन का नियम यह है कि जब जो होना होता है, होता है तुम्हारे करने की ज़रुरत होती नहीं। लेकिन तुम्हारा सारा ज़ोर इस पर है कि मैं करूंगा और तुम्हारा यह भाव कि ‘मैं करूंगा’ सारे होने को रोक देता है, जाम लगा देता है। जो हो जाए खुद हो जाए तुम्हारे रहते वो हो नहीं पाता और फिर तुम रोते हो कि मेरे काम नहीं होते। तुम्हारे काम इसीलिए नहीं होते कि तुम करने की कोशिश में लगे हो। तुम अपनी कोशिश छोड़ दो तो सारे काम हो जाएंगे। तुम खुद बीच में खड़े हुए हो।
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प्रशांतअद्वैत फाउंडेशन पच्चीस से ज्यादा अद्वैत बोध शिविरों का आयोजन करने के बाद, इस महीने की 24 तारीख को अपना 27वां बोध शिविर आयोजित करने जा रही है।

ईसा मसीह के जन्म दिवस को हर्ष एवं उल्लास के साथ मनाने का इस बोध शिविर से बेहतर मौका कहाँ हो सकता है!

विश्व भर के आध्यात्मिक ग्रंथों का अध्ययन करने, आचार्य प्रशांत जी के संग समय बिताने, और गंगा किनारे बैठ खुदमें डूब जाने का भी यह एक अनूठा अवसर है।

शिविर का हिस्सा बनने हेतु, requests@prashantadvait.com पर एक ईमेल करें ।
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अधिक जानकारी के लिए संपर्क करें:
श्री अंशु शर्मा: +91-8376055661
श्री कुंदन सिंह: +91-9999102998
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आचार्य प्रशांत द्वारा दिए गये बहुमूल्य व्याख्यान इन पुस्तकों में मौजूद हैं:

अमेज़न : http://tinyurl.com/Acharya-Prashant
फ्लिप्कार्ट: https://goo.gl/fS0zHf

मन की शीतलता का क्या अर्थ है?

जब तक तुम अपनेआप को एक कटा हुआ हिस्सा समझोगे, दुनिया का,
तब तक तुम्हारे मन में छवि हमेशा यही बनती रहेगी कि,
जैसे दुनिया तुम्हारी दुश्मन है,
और सब तरीके से तुम पर हमला करने चली आ रही है।

जिसने माँगा नहीं उसे मिला है

हम अपनी ही जड़ों को काटते चले हैं| हमें भय है अपने ही विस्तार से|

किसी ने कहा है कि, “हमें किसी से डर नहीं लगता, हमें अपनी ही अपार सम्भावना से डर लगता है|”

कहीं न कहीं हमें पता हैं कि हम अनंत हैं| कहीं न कहीं, हमें पता है कि क्षुद्रता हमारा स्वभाव नहीं| हम अपनेआप से ही डरते हैं, अपनी ही संभावना से बड़ा खौफ़ खाते हैं| अगर हमें हमारी संभावना हासिल हो गयी, तो होगा क्या हमारे छोटे-छोटे गमलों का? हमें उनसे बाहर आना पड़ेगा|

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