आचार्य प्रशांत: अकेलेपन से घबराहट क्यों? || (२०१८)

तुम जब तक दुनिया के सामने रहते हो, तो अपने बारे में सोचने का, या अपने ऊपर ध्यान देने का बहुत मौका रहता नहीं, तुम व्यस्त रहे आते हो। जब दुनिया नहीं सामने होती सिर्फ तुम होते हो, जीवन की ऊब, बेचैनी, छटपटाहट, ये सब सामने सामने खड़े हो जाते हो, इसलिए ‘अकेलेपन’ से नहीं घबराते हो।

जो स्वस्थ आदमी है वो अकेलेपन से नहीं घबराएगा। जिसके पास भीतर १०० तरह के भूत-प्रेत, पिशाच हैं, वो घबराता है अकेलेपन से, क्योंकि उसको पता है कि अकेला हुआ नहीं कि ये सब निकल-निकल के बाहर आएंगे और नाचेंगे चारों ओर।

दूसरों को बुलाने की कोशिश कम करो, जो पहले ही भीतर बैठा हुआ है, उसको निकालने की कोशिश ज़्यादा करो।

जो कुछ भी मन में घुस के बैठा हुआ हो समझ लो वही सताता है ‘अकेलेपन’ में, जो भी कोई हो वो, उसको विदा कर दो।

~ आचार्य प्रशांत