कर्मफल मिलता नहीं, ग्रहण किया जाता है

फ़ल मिलने के लिए कोई होना चाहिए, जिसे फ़ल मिले| फ़ल मिला, किसको? जब शंकर कहते हैं कि बोध से तीनों प्रकार के कर्मों का विघलन हो जाता है| तो क्या कहते हैं? यही कहते हैं न कि जिसको सज़ा मिल सकती थी, वही नहीं रहा| जिसको फ़ल मिलता, वही नहीं रहा| आपने पूछा था न अभी कि लोग अपने कर्म फ़ल भुगत रहे हैं| कौन भुगत रहा है कर्म फ़ल? हमने क्या कहा था? वो जो उन कर्मों को अपना कर्म समझता है, उन कर्मों का फिर फ़ल भी भुगतेगा| जो उस कर्म के साथ बद्ध है ही नहीं, वो फिर उस फ़ल के साथ भी कहाँ से बद्ध हो जाएगा|
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आचार्य प्रशांत के साथ 26वां अद्वैत बोध शिविर आयोजित किया जा रहा है|

दिनांक: 26-29 नवम्बर
स्थान: शिवपुरी, ऋषिकेश, उत्तराखंड

आवेदन हेतु ई-मेल करें: requests@prashantadvait.com
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आचार्य प्रशांत द्वारा दिए गये बहुमूल्य व्याख्यान इन पुस्तकों में मौजूद हैं:

https://prashantadvait.com/books-in-hindi/

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