आध्यात्मिक ग्रंथों की क्या उपयोगिता है? || आचार्य प्रशांत (2018)

हाँ, सत्य की दृष्टि से देखें, तो कहा जायेगा कि वो बली ही नहीं, वो बलातीत है।

सच की नज़र से सच को देखें, तो आप कहेंगे कि सच बलवानों से बलवान है।

और जब अहंकार न्यायधीश हो, और सच को देखा जाये, तो सच कैसा दिखाई देगा? दुर्बल, रोगी, मरियल।

ये ग्रन्थ फ़िर आकर गवाही दे देते हैं।

इसलिये ये उनके ही काम आते हैं, जिनके भीतर सच की मद्धम और सूक्ष्म ही सही, लेकिन आवाज़ ज़रूर हो।