आध्यात्मिक ग्रंथों की क्या उपयोगिता है? || आचार्य प्रशांत (2018)

जिसके भीतर प्राण थोड़े बचे होते हैं, या कहिए कि प्राण उठने लगते हैं, ये उनके काम के हो जाते हैं।

तुम्हारे भीतर से कुछ उठे तो!

कुछ ऊब उठे, कुछ ज्वाला उठे।  

कुछ विद्रोह उठे।

तो फ़िर तुम्हारे हाथ में ये ग्रंथ दें।

अगर विरोध ही नहीं उठ रहा है, तो ग्रंथ क्या करेगा?