आनंद सफलता की कुंजी है

जीवन उत्सव है, आनंद है। पर वो तभी है जब उसे पूरे तरीके से जिया जाए, उसमें प्रवेश किया जाए। और उस प्रवेश का ही नाम है ध्यान। पूरे तरीके से होना। जब खेल रहे हो तो पूरे तरीके से खेलो, परिश्रम बिल्कुल नहीं लगेगा।

इच्छाओं को नियंत्रित कैसे करूँ?

श्रोता: सर, इच्छाओं को नियंत्रित कैसे करूँ? वक्ता: कृष्णमोहन पूछ रहे हैं कि इच्छाओं को कैसे नियंत्रित किया जा सकता है। अच्छा! क्यों नियंत्रित करना है? सवाल यह

जगत पदार्थ है, तो स्त्री वस्तु मात्र

प्रश्न: सर, औरतों को शादी के उपरान्त अपने पति का उपनाम क्यों लगाना पड़ता है? वक्ता: मेघना, अगर देख पाओगी तो बात साफ़-साफ़ खुल जाएगी। तुमने देखा

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