कैसे जियें?

जो भी कुछ कर रहे हो, खेल रहे हो तो पूरी तरह खेलो, सुन रहे हो तो सिफ सुनो, खा रहे हो तो सिर्फ खाओ, पढ़ रहे हो तो सिर्फ पढ़ो, बोल रहे हो तो पूरा ध्यान सिर्फ बोलने में, तब भूल जाओ कुछ भी और, यही ज़िन्दगी है, यही जीवन है। प्रतिपल जो हो रहा है, यही तो जीवन है, इससे अलग थोड़ी कुछ होता है जीवन।

दूसरों को आदर्श बनाने की जगह खुद को देखो

वक्ता: सिर्फ एक व्यक्ति है जिसका तुम्हें सच पता हो सकता हैं, किसका? सभी श्रोता: अपना वक्ता: तो उसकी ओर क्यों नहीं देखते? जिस एक

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