कर्त्तव्य सज़ा है नासमझी की

कर्त्तव्य संसारो न तां पश्यन्ति सूरयः । शून्याकारो निराकारा निर्विकारा निरामयाः ॥ (अष्टावक्र गीता अध्याय १८, श्लोक ५७) वक्ता: ‘सेंस ऑफ़ ड्यूटी’, कर्त्तव्यों के बारे में बात

शरीर और आत्मा के मध्य सेतु है मन

“बिनु रसरी गृह खल बंधा, तासू बंधा अलेख, दीन्ह दर्पण हस्त मधे, चसम बिना का देख” वक्ता: ‘मन’ ‘शरीर’ और ‘आत्मा’, इनका सम्बन्ध क्या है?

तुम्हारी असली ताक़त और कमजोरी

असली ताक़त या कमज़ोरी का आधार जानना, प्रेम, आनंद और मुक्ति है| इनको भुला देना कमज़ोरी और इनके साथ जीना ताक़त है| इसके अलावा कोई ताक़त या कमज़ोरी नहीं होती|

1 3 4 5 6 7 9