प्रकृति के तीन गुण

ज्ञान वो है जो अज्ञान को काटे।
पर ज्ञान के साथ दूषण ये होता है कि वो अज्ञान को तो काट देता है, लेकिन स्वयं बच जाता है।
गुणातीत होने का अर्थ है कि अज्ञान नहीं रहा, और अज्ञान के बाद अब ज्ञान भी नहीं रहा। अब तो शान्त बोध है।
उसी शान्त, खाली बोध को साक्षित्व कहते है।

स्वस्थ मन कैसा?

एक चीनी गुरु थे, वो जंगल ले गये अपने शिष्यों को| वहाँ पर कुछ खड़े हुए पेड़ थे और कुछ कटे हुए पेड़ थे|

गुरु ने अपने शिष्यों से पूछा, “बताओ ज़रा कुछ पेड़ खड़े हुए क्यों हैं और कुछ पेड़ कटे हुए क्यों हैं?”

शिष्यों ने कहा, “जो काम के थे, वो कट गये और उनका उपयोग हो गया|”

गुरु ने पूछा, “और ये जो खड़े हुए हैं, ये कौन से हैं”? शिष्य बोले, “ये वो हैं, जो किसी के काम के नहीं थे|”

गुरु बोले, “बस ठीक है, समझ जाओ|”

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