क्यों समझूँ ? क्यों प्रेम जानूँ ?

वक्ता: ये बातें व्यवहार में उतारने की हैं, बल्कि अपने आप उतरेंगी अगर तुम्हें समझ में आए| समझ में नहीं आएंगी तो डरे-डरे रहोगे और जो डरा

डर आता है क्योंकि तुम उसे बुलाते हो

वक्ता: डर कैसे निकाल सकते हैं? कितने लोगों के लिए डर का सवाल महत्वपूर्ण है, कि डर है जीवन में? (कई श्रोतागण हाथ उठाते हैं) तो सिर्फ

1 2 3 4 5 7