कौनसी किताबें पढ़नी चाहिए?

13-14 साल तक अगर बच्चे इधर-उधर का ही साहित्य पढ़ा है, तो 13-14 साल बाद अगर आप उसके हाथ में कुछ अच्छा थमाएंगे भी न, तो वो उसको पढ़ नहीं पाएगा। उसको रुचि ही नहीं आएगी। वो कहेगा कि, ‘’मुझसे फिक्शन कितना भी पढ़वा लो, मैं पढ़ लूँगा पर ये बोरिंग लगता है।’’ ठीक वैसे ही जैसे आपको बोरिंग लगता है। बोरिंग इसीलिए लगता है क्यूँकी जो पूरी खुराक है, वो गन्दी हो चुकी है। पता नहीं किससे मैं बोल रहा था कि कबीर इसको बहुत अच्छे से समझाते हैं और एक ही वाक्य में सब समझा देते हैं। वो कहते हैं कि, ‘’मन को ऐसा कर लो, जैसे हंस।’ और हंस और कौवे का जो अंतर है, वो उसको सामने रखते हैं। कौवा जहाँ भी कुछ पाता हैं, उसमें चोंच मार देता है। विष्ठा, कूड़ा, गन्दगी में चोंच डाल देगा वो। हंस भूखा मर जाएगा, पर गन्दगी में चोंच नहीं डालता वो, आकर्षित ही नहीं होता। तो इसीलिए कहते हैं कि वो सिर्फ़ मोती चुग-चुग के खाता है।
——————–
आचार्य प्रशांत से जुड़ने के माध्यम

1.) अद्वैत बोध शिविर
आवेदन हेतु ईमेल करें requests@prashantadvait.com par
या
संपर्क करें: श्री अंशु शर्मा: +91 – 8376055661

2.) आध्यात्मिक ग्रंथों पर कोर्स
आवेदन हेतु ईमेल करें requests@prashantadvait.com पर
या
संपर्क करें: श्री अपार मेहरोत्रा : +91 9818591240

3.) बोधसत्र का सीधा ऑनलाइन प्रसारण
आवेदन हेतु ई-मेल भेजें: requests@prashantadvait.com
या संपर्क करें:
श्रीमती अनुष्का जैन: +91 9818585917

4.) आचार्य जी से निजी साक्षात्कार
आवेदन हेतु ईमेल करें requests@prashantadvait.com पर
या
संपर्क करें: अनुष्का जैन: +91 9818585917
—————————–
आचार्य प्रशांत द्वारा दिए गये बहुमूल्य व्याख्यान इन पुस्तकों में मौजूद हैं:

अमेज़न: http://tinyurl.com/Acharya-Prashant
फ्लिप्कार्ट: https://goo.gl/fS0zHf

ग्रन्थ सिर्फ़ शांत मन को ही समझ आते हैं

दो तरह के लोग होते हैं जो किसी धर्म ग्रन्थ का अर्थ करते हैं, एक वो जो वही धर्मावलम्बी हैं, वो अनर्थ करेंगे पक्का, और

नींद और मौत क्या बताते हैं?

दो तरह के लोग होते हैं जो किसी धर्म ग्रन्थ का अर्थ करते हैं, एक वो जो वही धर्मावलम्बी हैं, वो अनर्थ करेंगे पक्का, और दूसरे वो जो विरोधी हैं। कुरान को आप ऐसे लोगों के हाथ में दे दीजिये जो इस्लाम को नहीं पसंद करते, वो कुरान का ऐसा भयानक अर्थ निकालेंगे, कि देखो ये तो बड़ा ही गिरा हुआ ग्रन्थ है। एक तरफ वो लोग बैठे हुए हैं जो कहेंगे कि हम तो बिलकुल डूबे हुए हैं श्रद्धा में और देखो इसका ये अर्थ है। वो भी उल्टा-पुल्टा अर्थ कर रहे हैं, दूसरी ओर वो लोग बैठे हुए हैं जो गहरायी से नफरत में डूबे हुए हैं, वो भी उल्टा अर्थ करेंगे। समयक अर्थ करने के लिए आपको न तो विश्वाशी होना है ना अविश्वाशी होना है, आपको ध्यानस्थ होना है। बड़े गौर से, बड़े शांत चित्त के साथ उसमें उतरना है, तब जा कर के पता चलता है कि बात तो इतनी दूर की थी।
——————————————-
अष्टावक्र-जनक महासंवाद
आचार्य प्रशांत के साथ 6 अप्रैल से

आवेदन भेजने हेतु: requests@prashantadvait.com पर ईमेल करें
या संपर्क करें: +91-9818591240
——————————————-
आचार्य प्रशांत द्वारा दिए गये बहुमूल्य व्याख्यान इन पुस्तकों में मौजूद हैं:

अमेज़न: http://tinyurl.com/Acharya-Prashant
फ्लिप्कार्ट: https://goo.gl/fS0zHf

वह निःसंग है; मात्र वह ही है

कैवल्य का यही अर्थ होता है कि मात्र वो है, केवल वो है, उसके अलावा और कोई है ही नहीं। तो उसका कोई संगी है, ये प्रश्न ही नहीं पैदा होता। संगी का अर्थ ही हुआ कि दो है, कि परम सत्ता दो हैं। ना, वो असंग है। इसी को एकांकीपन कहते हैं। “नो पार्टनर हैज़ गॉड”, इसी बात को कहा जाता है ‘एकांकीपन’।
———————-
हिमालय की गोद में 30वें अद्वैत बोध शिविर का आयोजन किया जाने वाला है।
आचार्य प्रशांत के सानिध्य में रहने का और दुनिया भर के दुर्लभ ग्रंथों के अध्ययन के इस सुनहरे अवसर को न गवाएं।

तिथि: 24-27 मार्च
स्थान: टाइगर ग्रूव रिसोर्ट, जिम कॉर्बेट नेशनल पार्क रामनगर(उत्तराखंड)

आवेदन भेजने हेतु ईमेल करें requests@prashantadvait.com पर
या
संपर्क करें:
श्री अंशु शर्मा: +91 – 8376055661
—————–
आचार्य प्रशांत द्वारा दिए गये बहुमूल्य व्याख्यान इन पुस्तकों में मौजूद हैं:

अमेज़न: http://tinyurl.com/Acharya-Prashant
फ्लिप्कार्ट: https://goo.gl/fS0zHf

सरलतम में सरलता से प्रवेश

कहते हैं कि अगर उसके कोई करीब होता है तो या तो संत, या बच्चा क्योंकि दोनों में क्या होती है? सरलता। वो परम सरल है। तो उसको पाना है तो, तुम भी सरल हो जाओ। जितने सरल होते जाओगे, उसको उतना पाते जाओगे; और गाठों से, कलह से, द्वेष से, और चालाकी से जितने भरते जाओगे, उससे उतने दूर होते जाओगे। हल्के हो जाओ, सरल हो जाओ। सीधे-साधे बिलकुल, कोई चतुराई नहीं, कोई होशियारी नहीं। वो है न, ‘मेरी सब होशियारियां ले लो, मुझको एक जाम दे दो।’
————-
आचार्य प्रशांत द्वारा दिए गये बहुमूल्य व्याख्यान इन पुस्तकों में मौजूद हैं:

अमेज़न: http://tinyurl.com/Acharya-Prashant
फ्लिप्कार्ट: https://goo.gl/fS0zHf

शास्त्र सहारा देते हैं, असली गुरु जीवन है

कबीर आपसे धीरे से कहेंगे कि घबराता क्या है? मुझे भी तो ऐसे ही अनुभव हुआ था। गुरु नानक आपसे आ कर कहेंगे तुम अकेले थोड़े ही हो जिसको अकेले ये परेशानियाँ झेलनी पड़ रही हैं। हमने भी झेली थीं पर पहले तुम ऐसे तो हो जाओ कि जिसे यह परेशानियाँ झेलनी पड़ रही हों तब तो गुरु और तुम्हारी कोई बातचीत बने। तुम तो ऐसे हो जो सुख, सुविधा और जीवन में जी रहा है तो तुम लोगों से कोई संवाद हो कैसे सकता है?
————–
आचार्य प्रशांत द्वारा दिए गये बहुमूल्य व्याख्यान इन पुस्तकों में मौजूद हैं:

अमेज़न : http://tinyurl.com/Acharya-Prashant
फ्लिप्कार्ट: https://goo.gl/fS0zHf

1 2