मेरा असली स्वभाव क्या है?

कुत्रापि खेद: कायस्य जिह्वा कुत्रापि खेद्यते।  मन: कुत्रापि तत्त्यक्त्वा पुरुषार्थे स्थित: सुखम्।।  ~ अष्टावक्र गीता(१३.२)  अनुवाद: शारीरिक दुःख भी कहाँ है, वाणी के दुःख भी

क्या एकाग्रता ध्यान में सहयोगी है?

प्रश्न: क्या एकाग्रता ध्यान में सहयोगी है? वक्ता: नहीं। हाँलांकि, विशिष्ट परिस्थितियों के अंतर्गत ऐसा हो सकता है। तुम्हें गुरु के पास वापस आना ही

अनछुए रहो, अडिग रहो

एक बात समझ लो अच्छे तरीके से: तुममें कोई कमी नहीं है| कोई भी तुम्हें ये जताने आये कि तुममें कोई कमी है, तो सुनो ही मत| कोई तुमसे अगर बोलने आए कि बी.टेक. कर लो वरना बेवक़ूफ़ रह जाओगे, तो भगा दो उसको| कोई बोले कि तुझे ऐसी ऐसी नौकरी नहीं मिली, तो तू बेवक़ूफ़ रह गया, तो भगा दो उसको|

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