सरल ही सही है

इस धरती पर अभी बहुत कुछ ऐसा हो रहा है जिसे ज़रूरत है तुम्हारे गुस्से की | दिखाओ वहाँ जा कर के गुस्सा | बदल

अधकचरी ज़िन्दगी, अधकचरा क्रोध

ध्यान बहुत बड़ी बात नहीं है; वो उपलब्ध हो जाता है | छोड़ना बड़ी बात है, वो साहस बड़ी बात है | वो सहास श्रद्धा से से आएगा | दिख तो जाता है, ध्यान दिखा देता है पर श्रद्धा की कमी की वजह से ध्यान जो दिखा देता है तुम उस पर अमल नहीं कर पाते |

हम में से कोई ऐसा यहाँ नहीं है जो पूर्णतया अँधा हो | ध्यान सबको उपलब्ध है, जान सब जाते हो | जान ने के बाद चलते नहीं हो क्योंकि श्रद्धाहीन हो |

~ आचार्य प्रशांत

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निम्नलिखित माध्यमों से दुनिया के हर कोने से लोग आचार्य जी से जुड़ रहे हैं:-

१. आचार्य जी से निजी साक्षात्कार:
यह एक अभूतपूर्व अवसर है आचार्य जी से मुखातिब होकर उनसे निजी मुद्दों पर चर्चा करने का। यह सुविधा ऑनलाइन भी उपलब्ध है।
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२: अद्वैत बोध शिविर:
अद्वैत बोध शिविर आचार्य जी के सानिध्य में समय बिताने का एक अद्भुत अवसर है। इन बोध शिविरों में दुनिया भर से लोग, अपने व्यस्त जीवन से चार दिन निकालकर, प्रकृति की गोद में शास्त्रों का गहन अध्ययन करते हैं और उनसे प्राप्त शिक्षा की प्रासंगिता अपने जीवन में देख पाते हैं। ऋषिकेश, शिवपुरी, मुक्तेश्वर, जिम कॉर्बेट नेशनल पार्क, चोपटा, कैंचीधाम जैसे नैनाभिराम स्थानों पर आयोजित अनेकों बोध शिविरों में सैकड़ों लोग आच्रार्य जी के आशीर्वचनों से कृतार्थ हुए हैं।
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३. आध्यात्मिक ग्रंथों पर कोर्स:
आध्यात्मिक ग्रंथों पर कोर्स, आचार्य प्रशांत के नेतृत्व में होने वाले क्लासरूम आधारित सत्र हैं। सत्र में आचार्य जी द्वारा चुने गये दुर्लभ आध्यात्मिक ग्रंथों के गहन अध्ययन के माध्यम से साधक बोध को उपलब्ध हो पाते हैं।
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४. जागरुकता का महीना:
फाउंडेशन हर माह जीवन-सम्बन्धित एक आधारभूत विषय पर आचार्य जी के सत्रों की एक श्रृंखला आयोजित करता है। जो व्यक्ति बोध-सत्र में व्यक्तिगत रूप से मौजूद नहीं हो सकते, उन्हें फाउंडेशन की ओर से चुनिंदा सत्रों का ऑनलाइन प्रसारण उपलब्ध कराया जाता है। इस सुविधा द्वारा सभी साधक शारीरिक रूप से दूर रहकर भी, आचार्य जी के सत्रों में सम्मिलित हो पाते हैं।
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५. आचार्य जी के साथ एक दिन
‘आचार्य जी के साथ एक दिन’ एक अनूठा अवसर है जिज्ञासुओं के लिए जो, इस पहल के माध्यम से अद्वैत आश्रम – ग्रेटर नॉएडा में हर महीने, एक पूरे दिन का समय आचार्य जी के साथ व्यतीत कर पाते हैं।
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६. पार से उपहार : आचार्य जी के साथ सप्ताहंत
‘पार से उपहार’ एक सुनहरा प्रयास है आचार्य जी के सानिध्य में रहकर स्वयं को जान पाने का। इसका आयोजन प्रति माह, २ दिन और २ रातों के लिए, अद्वैत आश्रम – ग्रेटर नॉएडा में होता है।
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७. स्टूडियो कबीर
स्टूडियो कबीर एक ऐसी पहल है जो आज के प्रचलित संस्कृति में आदिकाल से पूजनीय संतों व ग्रंथों द्वारा प्रतिपादित बोध का पठन-पाठन एक संगीतमय तरीके से करती है। आम जनमानस में संतों व ग्रंथों के गीतों की लोकप्रियता बढ़ सके, इसके लिए स्टूडियो कबीर उन गीतों को याद करवाने का और सुंदर गीतों के माध्यम से प्रस्तुत करने के अथक प्रयास में संलग्न है।
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८. फ्री-हार्ट्स शिविर: एक नयी दृष्टि में अध्यात्म
यह शिविर हर उस व्यक्ति के लिए है जो दिल से युवा हैं। इस शिविर के अंतर्गत आपसी सौहार्द्य और मैत्री का वर्धन, मनोवैज्ञानिक तथ्यों से रूबरू होना, जीवन की ग्रंथियों को सुलझाना, ध्यान की अभिनव विधियों का प्रयोग करना, नृत्य, गायन, कला-प्रदर्शन करना आदि शामिल है।
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९. त्रियोग:
त्रियोग हठ-योग, भक्ति-योग और ज्ञान-योग का अभूतपूर्व सम्मिश्रण है, जिसमें सम्पूर्ण स्वास्थ्य और सर्वांगीण विकास की प्राप्ति हेतु २ घंटे के योग-सत्र का अनूठा आयोजन किया जाता है।
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१०. बोध-पुस्तक
जीवन के महत्वपूर्ण विषयों पर आचार्य जी के व्यक्तव्यों का बेहतरीन संकलन हिंदी व अंग्रेजी भाषा में पुस्तकों के रूप में अमेज़न और फ्लिपकार्ट पर उपलब्ध हैं:

अमेज़न: http://tinyurl.com/Acharya-Prashant

फ्लिपकार्ट: http://tinyurl.com/AcharyaBooks

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इन सुन्दरतम व अनोखी पहलों में भाग लेने के लिए, अपने आवेदन requests@prashantadvait.comपर भेजें, या श्री कुन्दन सिंह से संपर्क करें: +91-9999102998

तुम्हारा प्रयास ही बाधा है समझने में

मैंने बिलकुल नहीं कहा कि उलझन सुलझाने की कोशिश करो। जितना सुलझाने की कोशिश करोगे, उतना फंसोगे। मैंने कहा, “सिर्फ समझ जाओ।” क्योंकि उसका उपाय तुम कर नहीं सकते हो ना। कर सकते होते तो अब तक कर न लिया होता? वो उलझन है ही इसलिए क्योंकि तुम उसे सुलझा नहीं सकते। और तुम उसे सुलझा  इसीलिए नहीं सकते क्योंकि तुम उसे समझते ही नहीं हो।

गणित के एक सवाल की ही तरह तुम उसे नहीं समझ रहे हो, इसीलिए तुम उसे सुलझा भी नहीं सकते। समझ जाओ, और वही समाधान है। समझना ही समाधान है।

आचार्य प्रशांत
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आचार्य प्रशांत से जुड़ने के माध्यम:

अद्वैत बोध शिविर
हर महीने होने वाले इन यह शिविर हिमालय की गोद में, आचार्य जी के नेतृत्व में रह कर दुनिया भर के दुर्लभ शास्त्रों के अध्ययन का अनूठा अवसर हैं।

आवेदन हेतु ईमेल करें requests@prashantadvait.com पर या

संपर्क करें: श्री अंशु शर्मा:  +91 – 8376055661

  आध्यात्मिक ग्रंथों का शिक्षण (कोर्स)
आचार्य जी द्वारा हर माह चुनिंदा शास्त्रों पर प्रवचन एवं रोज़ मर्रा की ज़िन्दगी में उनकी महत्ता जानने का अवसर।

आवेदन हेतु ईमेल करें requests@prashantadvait.com पर या

 संपर्क करें: श्री अपार मेहरोत्रा : +91 9818591240

   जागृति माह
   जीवन के एक विशेष विषय पर और जीवन के आम दिनचर्या की समस्याओं का हल पाने का अनूठा अवसर। जो लोग व्यक्तिगत रूप से सत्र में मौजूद नहीं हो सकते, वो ऑनलाइन स्काइप या वेबिनार द्वारा बोध सत्र का            हिस्सा बन सकते हैं।

    आवेदन हेतु ईमेल करें requests@prashantadvait.com पर या

सम्पर्क करें: सुश्री अनुष्का जैन: +91 9818585917

 आचार्य जी से निजी साक्षात्कार
आचार्य जी से निजी बातचीत करने का बहुमूल्य अवसर।

आवेदन हेतु ईमेल करें requests@prashantadvait.com पर या

संपर्क करें: सुश्री अनुष्का जैन: +91 9818585917

सम्पादकीय टिप्पणी :

आचार्य प्रशांत द्वारा दिए गये बहुमूल्य व्याख्यान इन पुस्तकों में मौजूद हैं:

अमेज़न:  http://tinyurl.com/Acharya-Prashant
फ्लिप्कार्ट:  https://goo.gl/fS0zHf                            

तुम्हें उतना पैसा तक तो मिला नहीं जितना तुम चाहते थे, तुम्हें परमात्मा मिल जाएगा?

तुम्हारे करे तुम्हें यह संसार ही नहीं मिला, तुम्हें परमात्मा क्या मिलेगा| तुम कोशिश करते रहे हाथ-पांव चलाते रहे, तुम्हें उतना पैसा तक तो मिला

अपने करे संसार तो मिला नहीं, परमात्मा क्या मिलेगा

तुम्हारे करें तुम्हें यह संसार ही नहीं मिला, तुम्हें परमात्मा क्या मिलेगा|

तुम कोशिश करते रहे हाथ-पांव चलाते रहें, तुम्हें उतना पैसा तक तो मिला नहीं जितना तुम चाहते थे, तुम्हें परमातमा मिल जाएगा? पूरी कोशिश करके तुम जाते हो टिंडा खरीदने और ले आते हो आलू, टिंडे तुम्हें मिलते नहीं अपनी कोशिशों से, परमात्मा मिल जाएगा? लेकिन हमारी पूरी कोशिश यही है कि परमात्मा भी मिले तो हम यह दावा कर सकें कि हमने पाया| और संत तुमसे कह रहे हैं कि जो उखाड़ना है उखाड़ लो तुम्हारे करे कुछ नहीं होगा, तुम्हारे करे कुछ नहीं होगा|

हाँ! करना अगर कुछ छोड़ सको, यदि चुप हो करके बैठ सको, समस्त कर्मों को समर्पित कर सको, यह जो करने-करने की चाह है इस को नमित कर सको तो फिर कुछ संभावना है, विचार किया जाएगा, एप्लीकेशन छोड़ जाओ| फिर कुछ हो सकता है| समझ रहे हो बात को?

~आचार्य प्रशांत
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अद्वैत बोध शिविर

हर महीने होने वाले इन यह शिविर हिमालय की गोद में, आचार्य जी के नेतृत्व में रह कर दुनिया भर के दुर्लभ शास्त्रों के अध्ययन का अनूठा अवसर हैं।

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संपर्क करें: श्री अंशु शर्मा: +91 – 8376055661

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आचार्य जी से निजी साक्षात्कार

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सम्पादकीय टिप्पणी :

आचार्य प्रशांत द्वारा दिए गये बहुमूल्य व्याख्यान इन पुस्तकों में मौजूद हैं:

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एकमात्र ग़लती

कुछ भी महत्वपूर्ण नहीं होता। महत्वपूर्ण बस ये होता है कि जो कर रहे हो, वो तुम्हारा चैन न छीन ले। कोई भी काम महत्वपूर्ण या

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