अगर स्वेच्छा से कर रहे तो रुक कर दिखाओ || आचार्य प्रशांत (2019)

अगर ‘कर्ता’ नहीं हो, तो सदा नहीं हो। अगर ‘कर्ता’ हो, तो सदा हो।

फिर कड़वा फल आये, या मीठा फल आये, दोनों भुगतने के लिये तैयार रहो।

घपला नहीं चलेगा – कभी ‘हाँ’, कभी ‘न’।

जीवन गँवाने के डर से अक्सर हम जीते ही नहीं

जब आदेश का पालन करते हो, तो फिर जहाँ से आदेश आता है, वहीँ से उस आदेश के पालन की ऊर्जा भी आ जाती है। वही दे देता है उर्जा, और वही एक मात्र उम्मीद है तुम्हारी, वहीं से जीत है तुम्हें, और कहीं से नहीं मिलेगी। भूलना नहीं कि तुम्हारी अपनी ऊर्जा तो तुम दूसरों को दे आए हो, तुमने अपनेआप को तो बेच ही दिया है। तुम्हारी अपनी बंदूक तो अब तुम्हारे ऊपर ही चलेगी। ये संसार तुम्हारे ऊपर जो बंदूके ताने बैठा है ये संसार ये नहीं है, ये तुम्हारी बंदूके हैं। ये दुनिया जो तुम्हें बन्धनों में कसे बैठी है, ये हक़ दुनिया को किसने दिया? तुमने दिया।
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आचार्य प्रशांत द्वारा दिए गये बहुमूल्य व्याख्यान इन पुस्तकों में मौजूद हैं:

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साक्षित्व का वास्तविक अर्थ

जो सोचने की वस्तु हो, उसके बारे में सोचो और जो सोचने की वस्तु नहीं है, उसके बारे में नहीं सोचो, बस यही आध्यात्म है पूरा। जिसके बारे में सोचा जा सकता है, उसके बारे में खूब सोचो पर कृपा करके उसके बारे में मत सोचने लग जाओ, जिसके बारे में सोचना व्यर्थ है। हम उलटे हैं, जिसके बारे में सोचना चाहिये वहाँ हम सोचने से डरते हैं, हम विचार भी तो नहीं करते ताकतवर, पूर्ण, गहरा विचार हम कहाँ करते है? डरते हैं। जहाँ सोचना चाहिये, वहाँ हम सोचते नहीं और जहाँ सोचना मूर्खता है, वहाँ हम खूब सोच का जाल फेंकते रहते हैं।
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क्रिया और कर्म के बीच अंतर

निष्काम कर्म वो, जिसमें कर्ता अनुपस्थित हो गया है। उसकी अनुपस्थिति मात्र प्रतीति नहीं है, तथ्य है।
ऐसा लग ही भर नहीं रहा है कि कोई कर्ता नहीं है, वास्तव में कोई कर्ता नहीं है क्योंकि जो कर्ता था, वो अपने ही स्रोत में मग्न हो गया है। अब जो घटना घट रही है, वो इसलिए नहीं घट रही कि उसका कोई फल अपेक्षित है। वो घटना बस घट रही है। अपेक्षाएं विलीन हो चुकी हैं, नहीं चाहिए आगे ले लिए कुछ। जो कर रहे हैं, उसी में आनंद है। जो हो रहा है, वो अपनेआप में पूर्ण आनंद ही है। वो अपनी आदि में भी आनंद है, और अपने अंत में भी आनंद है। माहौल ही आनंद का है। ये निष्काम कर्म हुआ।
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अष्टावक्र-जनक महासंवाद
आचार्य प्रशांत के साथ 6 अप्रैल से

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