दूसरों को जान पाने का तरीका || आचार्य प्रशांत (2019)

किसी के घर में कुछ नहीं चल रहा जो किसी और के घर की घटनाओं से भिन्न हो।

किसी की पीड़ा दूसरे की पीड़ा से भिन्न नहीं है।

मनुष्य तो मनुष्य, पशुओं की भी पीड़ा वही है जो ऊँचे-से-ऊँचे मनुष्य की है।

जब ये तुम समझते हो, तो इसे ‘बोध’ कहते हैं।

इसी का फल करुणा है, इसी का फल अहिंसा है।

उदासी और दुख से मुक्ति कैसे हो? || आचार्य प्रशांत (2018)

तुम्हारा अपना दिल जब तक टूटा नहीं, तुम दूसरों के क्या काम आओगे।  

वेदना का अनुभव होना चाहिए।

तुम्हारी अपनी वेदना को संवेदना बन जाना चाहिए।

और जिसके हृदय में संवेदना उठने लगी, समस्त विद्या उसको उपलब्ध हो जाती है।  

अब वो ज्ञानी हुआ।  

आचार्य प्रशांत, छात्रों के संग: डर की वजह क्या है?

जो कुछ भी ऐसा पाओ, जो तुम्हें सीमित करता है, तुम्हें छोटा करता है, तुम्हें डराता है, तुरंत उसको छोड़ दो, तुरंत त्याग दो, यही मुक्ति है।

सिर्फ इसलिए कि बहुत सारे लोगों ने, बहुत समय तक, कुछ कहा है, वो बात ठीक नहीं हो जाती। उसको जाँचो, उसको परखो, उसको अपनी मुक्त दृष्टि से देखो। सिर्फ इसलिए, कि परंपरा, समाज, एक प्रकार से चलते रहे हैं, वो बात ठीक नहीं हो जाती। बल्कि, ज़्यादा सम्भावना इसी बात की है, कि बहुत सारे लोग यदि कुछ कर रहे हैं तो वो बात मूर्खता की ही होगी।

~ आचार्य प्रशांत

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निम्नलिखित माध्यमों से दुनिया के हर कोने से लोग आचार्य जी से जुड़ रहे हैं :-

१. आचार्य जी से निजी साक्षात्कार:
यह एक अभूतपूर्व अवसर है आचार्य जी से मुखातिब होकर उनसे निजी मुद्दों पर चर्चा करने का। यह सुविधा ऑनलाइन भी उपलब्ध है।
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२: अद्वैत बोध शिविर:
अद्वैत बोध शिविर आचार्य जी के सानिध्य में समय बिताने का एक अद्भुत अवसर है। इन बोध शिविरों में दुनिया भर से लोग, अपने व्यस्त जीवन से चार दिन निकालकर, प्रकृति की गोद में शास्त्रों का गहन अध्ययन करते हैं और उनसे प्राप्त शिक्षा की प्रासंगिता अपने जीवन में देख पाते हैं। ऋषिकेश, शिवपुरी, मुक्तेश्वर, जिम कॉर्बेट नेशनल पार्क, चोपटा, कैंचीधाम जैसे नैनाभिराम स्थानों पर आयोजित अनेकों बोध शिविरों में सैकड़ों लोग आच्रार्य जी के आशीर्वचनों से कृतार्थ हुए हैं।
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३. आध्यात्मिक ग्रंथों पर कोर्स:
आध्यात्मिक ग्रंथों पर कोर्स, आचार्य प्रशांत के नेतृत्व में होने वाले क्लासरूम आधारित सत्र हैं। सत्र में आचार्य जी द्वारा चुने गये दुर्लभ आध्यात्मिक ग्रंथों के गहन अध्ययन के माध्यम से साधक बोध को उपलब्ध हो पाते हैं।
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४. जागरुकता का महीना:
फाउंडेशन हर माह जीवन-सम्बन्धित एक आधारभूत विषय पर आचार्य जी के सत्रों की एक श्रृंखला आयोजित करता है। जो व्यक्ति बोध-सत्र में व्यक्तिगत रूप से मौजूद नहीं हो सकते, उन्हें फाउंडेशन की ओर से चुनिंदा सत्रों का ऑनलाइन प्रसारण उपलब्ध कराया जाता है। इस सुविधा द्वारा सभी साधक शारीरिक रूप से दूर रहकर भी, आचार्य जी के सत्रों में सम्मिलित हो पाते हैं।
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५. आचार्य जी के साथ एक दिन
‘आचार्य जी के साथ एक दिन’ एक अनूठा अवसर है जिज्ञासुओं के लिए जो, इस पहल के माध्यम से अद्वैत आश्रम – ग्रेटर नॉएडा में हर महीने, एक पूरे दिन का समय आचार्य जी के साथ व्यतीत कर पाते हैं।
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६. पार से उपहार : आचार्य जी के साथ सप्ताहंत
‘पार से उपहार’ एक सुनहरा प्रयास है आचार्य जी के सानिध्य में रहकर स्वयं को जान पाने का। इसका आयोजन प्रति माह, २ दिन और २ रातों के लिए, अद्वैत आश्रम – ग्रेटर नॉएडा में होता है।
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७. स्टूडियो कबीर
स्टूडियो कबीर एक ऐसी पहल है जो आज के प्रचलित संस्कृति में आदिकाल से पूजनीय संतों व ग्रंथों द्वारा प्रतिपादित बोध का पठन-पाठन एक संगीतमय तरीके से करती है। आम जनमानस में संतों व ग्रंथों के गीतों की लोकप्रियता बढ़ सके, इसके लिए स्टूडियो कबीर उन गीतों को याद करवाने का और सुंदर गीतों के माध्यम से प्रस्तुत करने के अथक प्रयास में संलग्न है।
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८. फ्री-हार्ट्स शिविर: एक नयी दृष्टि में अध्यात्म
यह शिविर हर उस व्यक्ति के लिए है जो दिल से युवा हैं। इस शिविर के अंतर्गत आपसी सौहार्द्य और मैत्री का वर्धन, मनोवैज्ञानिक तथ्यों से रूबरू होना, जीवन की ग्रंथियों को सुलझाना, ध्यान की अभिनव विधियों का प्रयोग करना, नृत्य, गायन, कला-प्रदर्शन करना आदि शामिल है।
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९. त्रियोग:
त्रियोग हठ-योग, भक्ति-योग और ज्ञान-योग का अभूतपूर्व सम्मिश्रण है, जिसमें सम्पूर्ण स्वास्थ्य और सर्वांगीण विकास की प्राप्ति हेतु २ घंटे के योग-सत्र का अनूठा आयोजन किया जाता है।
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१०. बोध-पुस्तक
जीवन के महत्वपूर्ण विषयों पर आचार्य जी के व्यक्तव्यों का बेहतरीन संकलन हिंदी व अंग्रेजी भाषा में पुस्तकों के रूप में अमेज़न और फ्लिपकार्ट पर उपलब्ध हैं:

अमेज़न: http://tinyurl.com/Acharya-Prashant

फ्लिपकार्ट: http://tinyurl.com/AcharyaBooks

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इन सुन्दरतम व अनोखी पहलों में भाग लेने के लिए, अपने आवेदन requests@prashantadvait.comपर भेजें, या श्री कुन्दन सिंह से संपर्क करें: +91-9999102998

कैसे लोगों की दोस्ती मेरे लिए अच्छी है?

जब कोई ऐसा मिल जाए जो कभी तुमसे कोई कड़वी बात कहता ही न हो तो उससे सतर्क हो जाना| उससे कहना कि साहब सच सच बताया करिए हम जैसे हैं, आईना दिखाया करिए और जब कोई ऐसा मिल जाए जो हर समय कड़वा ही बोलता रहे तो उससे कहना कड़वा बोलते हैं आप भला करते हैं, जख्म देते हैं आप भला करते हैं लेकिन फिर मरहम भी लगाइए, जख्म देते हैं तो अब आपका ही फ़र्ज़ है मरहम लगाना भी, जिस हक से चोट दी थी अब उसी हक से मरहम भी लगाओ|

आचार्य प्रशांत
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आचार्य प्रशांत से जुड़ने के माध्यम:

अद्वैत बोध शिविर

हर महीने होने वाले इन यह शिविर हिमालय की गोद में, आचार्य जी के नेतृत्व में रह कर दुनिया भर के दुर्लभ शास्त्रों के अध्ययन का अनूठा अवसर हैं।

आवेदन हेतु ईमेल करें requests@prashantadvait.com पर या

संपर्क करें: श्री अंशु शर्मा: +91 – 8376055661

आध्यात्मिक ग्रंथों का शिक्षण (कोर्स)

आचार्य जी द्वारा हर माह चुनिंदा शास्त्रों पर प्रवचन एवं रोज़ मर्रा की ज़िन्दगी में उनकी महत्ता जानने का अवसर।

आवेदन हेतु ईमेल करें requests@prashantadvait.com पर या

संपर्क करें: श्री अपार मेहरोत्रा : +91 9818591240

जागृति माह

जीवन के एक विशेष विषय पर और जीवन के आम दिनचर्या की समस्याओं का हल पाने का अनूठा अवसर। जो लोग व्यक्तिगत रूप से सत्र में मौजूद नहीं हो सकते, वो ऑनलाइन स्काइप या वेबिनार द्वारा बोध सत्र का हिस्सा बन सकते हैं।

आवेदन हेतु ईमेल करें requests@prashantadvait.com पर या

सम्पर्क करें: सुश्री अनुष्का जैन: +91 9818585917

आचार्य जी से निजी साक्षात्कार

आचार्य जी से निजी बातचीत करने का बहुमूल्य अवसर।

आवेदन हेतु ईमेल करें requests@prashantadvait.com पर या

संपर्क करें: सुश्री अनुष्का जैन: +91 9818585917

सम्पादकीय टिप्पणी :

आचार्य प्रशांत द्वारा दिए गये बहुमूल्य व्याख्यान इन पुस्तकों में मौजूद हैं:

अमेज़न: http://tinyurl.com/Acharya-Prashant
फ्लिप्कार्ट: https://goo.gl/fS0zHf

सत्य और प्रेमिका में से किसे चुनूँ?

दुनिया में शान्ति सिर्फ़ एक तरीके से आ सकती है। वो तरीका तुम हो। तुम जितने मौन होते जाओगे, जितना तुम्हारे भीतर का शोर कम होता जाएगा, तुम पाओगे उतना ही बाहर के शोर को अब तुम कम पा रहे हो, बिना प्रयत्न किये। क्योंकि शोर तो गूँज की तरह होता है। उसे दीवार चाहिए। शोर कहीं से निकला, फिर उसे दीवार चाहिए, जो पलट करके उस शोर को वापिस ला दे। अगर खुले आकाश हो गए हो तुम, तो शोर फिर खो जाता है। तुम बंद कमरे में आवाजें करो, वहाँ शोर होता है। तुम खुले मैदान में आवाजें करो, तुम पते हो शोर कम होता है।
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आचार्य प्रशांत से जुड़ने के माध्यम

1.) अद्वैत बोध शिविर
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2.) आध्यात्मिक ग्रंथों पर कोर्स
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4.) आचार्य जी से निजी साक्षात्कार
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आचार्य प्रशांत द्वारा दिए गये बहुमूल्य व्याख्यान इन पुस्तकों में मौजूद हैं:

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जो ही जगेगा, वो ही करुणा से भर जाएगा

जगा हुआ व्यक्ति पूरे संसार के लिए शुभ सन्देश होता है, सूरज की तरह होता है जो पूरी दुनिया का अँधेरा मिटाए| जगे हुए होने का अर्थ ही यही है कि, ”अब आत्म-केन्द्रित नहीं रहा, कि अब मेरा आत्म ब्रह्म हो चुका है|

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