आनंद सफलता की कुंजी है

जीवन उत्सव है, आनंद है। पर वो तभी है जब उसे पूरे तरीके से जिया जाए, उसमें प्रवेश किया जाए। और उस प्रवेश का ही नाम है ध्यान। पूरे तरीके से होना। जब खेल रहे हो तो पूरे तरीके से खेलो, परिश्रम बिल्कुल नहीं लगेगा।

मन प्रशिक्षण के अनुरूप ही विषय चुनेगा || आचार्य प्रशांत, युवाओं के संग (2014)

इस दुनिया ने, समाज ने, परिवार ने तुम्हें कुछ ऐसा सिखा दिया है जो झूठा है। तुम्हें जीवन को देखने की एक नकली दृष्टि दे दी गई है।

तुम जिन बातों को मूल्यवान समझ रहे हो, वो मूल्यवान है ही नहीं।

तुम्हारा मन उड़-उड़कर जिस डाल पर बैठ रहा है, उस डाल पर ना कोई फल है, ना कोई पत्ती। तुम्हारे मन को शिक्षा दे दी गई है सूनी, बंजर डालों पर बार-बार जाकर बैठ जाने की।

तो मन एकाग्र तो हो रहा है, पर ऐसी जगहों पर जहाँ से तुम्हें कुछ मिल सकता नहीं।

मन जा-जाकर के ऐसी डालों पर बैठ रहा है, जिनमें तुम्हारे लिए कोई रस है ही नहीं।

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